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06 September 2019

नहीं रहे साहित्य अकादेमी पुरस्कार विजेता किरण नागरकर, ये था उनका आखिरी उपन्यास

File Photo

सुप्रसिद्ध उपन्यासकार, नाटककार और पत्रकार किरण नागरकर का गुरुवार रात मुंबई में निधन हो गया, वे 77 वर्ष के थे। अभी कुछ दिन पहले ही उन्हें ब्रेन हेमरेज होने की खबर आई थी। मराठी और अंग्रेजी भाषाओं में लिखने वाले किरण नागरकर आधुनिक साहित्यकार, नाटककार, पटकथा लेखक तथा फिल्म एवं नाटक समीक्षक भी थे। उन्होंने साहित्यिक जीवन को अपने 45 साल दिए।

मिली जानकारी के अनुसार, साहित्य अकादेमी पुरस्कार विजेता नागरकर को ब्रेन हेमरेज होने के बाद दक्षिण मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। नागरकर का जन्म मुंबई में वर्ष 1942 में हुआ था। उनका पहला उपन्यास 'साट सक्कम त्रेचालिस' वर्ष 1974 में प्रकाशित हुआ था। इसी वर्ष लिखा गया उनका एक और उपन्यास 'द आर्सेनिस्ट' नाम से प्रकाशित हुआ था, जो काफी चर्चित हुआ। बाद में इसका अंग्रेजी में अनुवाद भी हुआ। एक शिक्षाविद, पत्रकार, पटकथा लेखक और साहित्यकार किरण नागरकर ने बच्चों के लिए भी कई नाटक और स्क्रीनप्ले लिखे।

इसके बाद ककल्‍ड लिखा, जिसने उन्हें साल 2001 का साहित्य अकादेमी पुरस्कार दिलाने के साथ ही, ‌अंग्रेजी में स्वतंत्रता के बाद के सबसे सम्मानित भारतीय लेखकों में शामिल कर दिया था।

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किरण नागरकर की कुछ प्रसिद्ध रचनाएं

सात सक्कम श्रेचालिस (1974), रावण ऐंड एडी (1994) और महाकाव्यात्मक अंग्रेजी उपन्यास ककल्ड (1997)। इसी अ्रग्रेजी उपन्यास के लिए उन्हें वर्ष 2001 में साहित्य अकादेमी का पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

- 'गॉड्स लिटिल सोल्जर'

- 'रावण ऐंड एडी'

- 'द एक्स्ट्रा'

- 'रेस्ट इन पीस'

- 'बेडटाइम स्टोरीज'

- 'द आर्सेनिस्ट'

किरण नागरकर ने बच्चों के लिए भी कई नाटक और स्क्रीनप्ले लिखे। उन्होंने विज्ञापन इंडस्ट्री के लिए भी काफी लिखा, जिसके लिए उन्हें कई सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।

इन पुरस्कारों से हुए सम्मानित

- 2001 का साहित्य अकादेमी पुरस्कार ककल्‍ड के लिए

- 2013 में 'द हिंदू लिटरेरी प्राइज' से सम्मानित किया गया था।

TAGS: Noted novelist, playwright, Kiran Nagarkar, dies, in Mumbai
OUTLOOK 06 September, 2019
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