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14 February 2026

नृत्य में लय-भाव की रसधारा

दक्षिण भारत की भरतनाट्‌यम नृत्य परंपरा में श्रेष्ठ नृत्यांगनाओं में एक नाम सु़श्री प्रिया वेंकटरमण का है। प्रिया मशहूर नृत्यांगना के अलावा उत्कृष्ट गुरु भी हैं। उनकी छत्रछाया में सीख रहीं कई शिष्याएं कुशल कलाकार के रूप में उभरती दिख रही हैं। उनमें एक नाम अनुष्का चैधरी का है। ऊर्जाशील और प्रतिभावान युवा नृत्यांगना अनुष्का ने नृत्य के हर पक्ष में पूर्णाता हासिल करने के साथ अभिनय को भी सुंदरता से निखारा है। हाल में दिल्‍ली में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सभागार में उनके मनोरम नृत्य की प्रस्तुति हुई। उसने राग हंसध्वनि और चापूताल में निबद्ध ‘’कालि कौतहम’’ की पहली प्रस्तुति से ही अपनी प्रतिभा को दिखा दिया।

इसमें करुणामयी, न्यायप्रिय महादेवी कालि के शौर्य और उनके असीम व्यक्तित्व के चित्रण को नृत्य और अभिनय के माध्यम से अभिव्यक्त करने में अनुष्का की प्रस्तुति अद्भुत थी। अधर्म का विनाश करने में देवी कालि की प्रासंगिता का जो संदेश समाज के लिए है, उसका भी मनोरमा चित्रण अनुष्का के नृत्य में उभरा।

अगली प्रस्‍तुति राग आनंदभैरवी और अदिताल में निबद्ध वरनम की प्रस्तुति भी शुद्ध चलन में सौन्दर्यपूर्ण थी। भरतवाह्यम का प्रधान हिस्सा वरनम में नृत्य, संगीत, और अभिनय का सामंजस्य होता है, उसे शुद्धता और पूर्णता में पेश करना चुनौती भरा काम है। उसे प्रस्तुत करने में नृत्यांगना परिपक्व और कुशल दिखी। भगवान राजगोपाल के प्रेम में डूबी नायिका अपनी सखि से आग्रह करती है कि मेरे आराधक से मिलाओ जो वाणों के जाल से घिरे हैं।

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इस अभिनय में नृत्यांगना का संचारी और स्थायी भाव बड़ा सरस था। नृत्य की गति, सुरों का मेल और विविध लय के चलन सुंदरता से निखरते दिखे। नृत्‍य में अंग संचालन, मुद्रा और पद संचालन में भी अच्छा गठजोड़ ‌दिखा। राग सहाना और मिश्र चापू ताल में शादीशुदा नायिका का चित्रण है, लेकिन प्रेम वह कृष्ण से करती है। जब उसका पति उसको ले जाने के लिए आता है तो वह कृष्ण से कहती है कि मुझे कभी न भूलना क्योंकि मैं तुम्हारी समर्पित भक्त हूं। उसे अनुष्का ने नृत्य और अभिनय के जरिए रंजकता से प्रस्तुत किया। 

अगली प्रस्तुति में संत जयदेव के गीत गोविंद में अष्टपदी के प्रसंग ‘’याही माधव’’ में नायिका को खंडित रूप में दर्शाया गया। कथा के सार में माधव यानी कृष्णा के देर रात आने पर उनकी नायिका को शक होता है कि वे किसी पराई स्त्री के साथ तो नहीं थे। यह सोचकर उसमें अपने पति के प्रति नफरत का भाव आ जाता है और वह खंडित नायिका का रूप लेकर अपने प्रेमी को कोसने लगती है, लेकिन बाद में कृष्ण का स्नेह पाकर उसका भ्रम दूर हो जाता है। इस प्रसंग को अनुष्का चैधरी ने बहुत ही प्रभावी और रोमांचक ढंग से प्रस्तुत किया। आखिर में राग कपि और आदिताल में लयात्मक गति के तिललाना में शिव शिवाकर्मा के चमत्कारिक गौरवशाली रूप के दर्शन करवाया।

TAGS: Indian classical dance, indian music, South Indian music, bharatnatyam music,
OUTLOOK 14 February, 2026
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