Advertisement
07 January 2016

छाप तिलक की अनूगूंज स्मृतियों में समाहित है

ध्वनियां हमेशा चैतन्यमना व्यक्तित्व को ही प्रभावित करती हैं। स्थान कोई भी हो उसका एक इतिहास और वर्तमान अवश्य होता है।

मध्यप्रदेश के मांडू में साहित्य और कलाओं पर मांडू उत्सव का आयोजन हुआ। भारतीय संगीत और संस्कृति के वैभवशाली समृद्ध इतिहास से यह आयोजन जीवंत हो उठा।

 पांच दिवसीय मांडू उत्सव मे लोक संस्कृति के बहुरंगी पक्षों से सजी प्रस्तुतियां दर्शकों के मन को छू गईं। कार्यक्रम का शुभारंभ जामा मस्जिद और अशर्फी महल के बीच स्थित मांडू उत्सव के मंच से हुआ। इस कार्यक्रम में ही मुख्यमंत्री द्वारा भोपाल की तर्ज पर प्रदेश का दूसरा भारत भवन बनाने के लिए तीन करोड़ रूपये की मंजूरी भी दी। यहां कार्यक्रम में जुगलबंदी ने मन मोह लिया। ग्वालियर घराने से संबद्ध कलाकार पं. देशराज जी वशिष्ठ का वायलिन और तबले पर अपना पूरा अधिकार रखने वाले कलाकार पंकज राठौर की जुगलबंदी ने उत्सव में समां बांध दिया।

अब आप हिंदी आउटलुक अपने मोबाइल पर भी पढ़ सकते हैं। डाउनलोड करें आउटलुक हिंदी एप गूगल प्ले स्टोर या एपल स्टोरसे
TAGS: mandu utsav, madhya pradesh, मांडू उत्सव, मध्यप्रदेश
OUTLOOK 07 January, 2016
Advertisement