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26 August 2019

कश्मीर में मीडिया पर अंकुश को लेकर प्रेस काउंसिल में मतभेद

File Photo

जम्मू-कश्मीर में मीडिया पर अंकुश को लेकर प्रेस काउंसिल में मतभेद उभर आए हैं। सदस्यों का कहना है कि काउंसिल के चेयरमैन जस्टिस (रिटायर्ड) सी.के. प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट में जो हलफनामा दायर किया है, उस पर उन्होंने काउंसिल में चर्चा नहीं की। यह नियमों का उल्लंघन है। गौरतलब है कि कश्मीर टाइम्स की एक्जीक्यूटिव एडिटर अनुराधा भसीन ने जम्मू-कश्मीर में मीडिया पर लगी पाबंदी हटाने के लिए 10 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। लेकिन प्रेस काउंसिल के चेयरमैन ने इस मामले में हस्तक्षेप का आग्रह करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया। काउंसिल के दूसरे सदस्यों का कहना है कि चेयरमैन के इस कदम से संगठन की विश्वसनीयता कम हुई है।

22 अगस्त को पूरे दिन बैठक हुई, पर चेयरमैन ने नहीं बतायाः सदस्य

काउंसिल के सदस्य जयशंकर गुप्ता ने कहा कि चेयरमैन का फैसला प्रेस काउंसिल की सुविचारित राय नहीं है। काउंसिल में इस पर कोई चर्चा ही नहीं हुई। चेयरमैन को अगर जल्दी थी तो 22 अगस्त की बैठक के एजेंडे में इसे रखते। चेयरमैन ने हलफनामे में सेल्फ-रेगुलेशन की बात कही है, लेकिन जब कहीं से कोई शिकायत ही नहीं है तो सेल्फ-रेगुलेशन की बात ही कहां उठती है। सिर्फ अंदेशा जाहिर करके हलफनामा दायर करना ठीक नहीं है 

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मंगलवार को प्रेस एसोसिएशन की बैठक में होगी चर्चा

जयशंकर गुप्ता प्रेस एसोसिएशन के प्रेसिडेंट भी हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार को वह एसोसिएशन के महासचिव और काउंसिल के सदस्य सी.के. नायक के साथ चेयरमैन से मिले। इस मुलाकात में चेयरमैन ने कहा कि हलफनामे में उन्होंने कहीं यह नहीं कहा है कि वह मीडिया पर पाबंदी के पक्ष में है। गुप्ता ने बताया कि कल इस मुद्दे पर प्रेस एसोसिएशन की बैठक बुलाई गई है।

चेयरमैन का कदम प्रेस काउंसिल रेगुलेशन के नियम का उल्लंघन

काउंसिल के एक अन्य सदस्य ने कहा कि चेयरमैन ने हलफनामे में जो कहा है, वह उनकी व्यक्तिगत राय हो सकती है, काउंसिल की नहीं। चेयरमैन का कदम प्रेस काउंसिल रेगुलेशन, 1979 के नियम 8 का उल्लंघन है। इससे पहले एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और इंडियन वुमेंस प्रेस कोर भी कश्मीर में संचार सुविधाओं पर पाबंदी की आलोचना कर चुके हैं।

हर बार काउंसिल की बैठक बुलाना जरूरी नहीः चेयरमैन

चेयरमैन जस्टिस प्रसाद का कहना है कि यह आवेदन 15 दिन पहले दायर किया गया था। यह पूछने पर कि सदस्यों को क्यों नहीं बताया गया, जस्टिस प्रसाद ने कहा कि यह चेयरमैन का अधिकार है। जरूरी नहीं कि हर बार काउंसिल की बैठक बुलाई ही जाए। उन्होंने अपने हलफनामे में लिखा है, “प्रेस काउंसिल ने पत्रकारों के लिए एक संहिता तैयार की है। इसके क्लॉज 23 में कहा गया है कि पत्रकारों को राष्ट्रीय, सामाजिक और व्यक्तिगत हितों के मामलों में रिपोर्टिंग के दौरान सेल्फ-रेगुलेशन रखना चाहिए। इस याचिका का मकसद स्वतंत्र रिपोर्टिंग के लिए पत्रकारों/मीडिया के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ देशहित का भी ख्याल रखना है। अतः प्रेस की स्वतंत्रता और देशहित में मैं अपने विचार रखकर कोर्ट की मदद करना चाहता हूं।”

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TAGS: press council, freedom of press, kashmir
OUTLOOK 26 August, 2019
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