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20 August 2015

जवाब में बर्खास्‍त आईपीएस अफसर संजीव भट्ट की कविता

 

मेरे पास सिद्धांत हैं और कोई सत्‍ता नहीं 

तुम्‍हारे पास सत्‍ता है और कोई सिद्धांत नहीं 

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तुम्‍हारे तुम होने 

और मेरे मैं होने के कारण 

समझौते का सवाल ही नहीं उठता

इसलिए लड़ाई शुरू होने दो ...

 

मेरे पास सत्‍य है और ताकत नहीं 

तुम्‍हारे पास ताकत है और कोई सत्‍य नहीं 

तुम्‍हारे तुम होने 

और मेरे मैं होने के कारण 

समझौते का सवाल ही नहीं उठता

इसलिए शुरू होने दो लड़ाई ...

 

तुम मेरी खोपड़ी पर भले ही बजा दो डंडा 

मैं लड़ूंगा 

तुम मेरी हड्डि‍यां चूर-चूर कर डालो 

फिर भी मैं लड़ूंगा 

तुम मुझे भले ही जिंदा दफन कर डालो 

मैं लड़ूंगा 

सच्‍चाई मेरे अंदर दौड़ रही है इसलिए

मैं लड़ूंगा 

अपनी अंतिम दम तोड़ती सांस के साथ भी 

मैं लड़ूंगा ...

 

मैं तब तक लड़ूंगा, जब तक 

झूठ से बनाया तुम्‍हारा किला

ढह कर गिर नहीं जाता 

जब तक जो शैतान तुमने अपने झूठों से पूजा है

वह सच के मेरे फरिश्‍ते के सामने घुटने नहीं टेक देता

 

 

 

(मूल कविता संजीव भट्ट के फेसबुक पेज https://www.facebook.com/sanjivbhattips पर अंग्रेजी में है। )

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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TAGS: बर्खास्‍त, आईपीएस, अधिकारी, संजीव भट्ट, गुजरात दंगे, गोधरा कांड, नरेंद्र मोदी, गुजरात सरकार, कविता
OUTLOOK 20 August, 2015
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