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28 March 2016

पर्सनल लॉ पर समिति की रिपोर्ट दाखिल करे केंद्रः सुप्रीम कोर्ट

गूगल

मुस्लिम पर्सनल लॉ को चुनौती देने वाली एक याचिका पर आज सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी एस ठाकुर और न्यायमूर्ति यू यू ललित की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता से अदालत में छह सप्ताह के अंदर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। पीठ ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय से भी शायरा बानो नामक महिला द्वारा दायर याचिका पर जवाब मांगा है। शायरा बानो ने मुसलमानों में प्रचलित बहुविवाह, एक साथ तीन बार तलाक कहने (तलाक ए बिदत) और निकाह हलाला के चलन की संवैधानिकता को चुनौती दी है। मुसलमानों में प्रचलित तलाक प्रथा के तहत पति एक तुहर (दो मासिकधर्मों के बीच की अवधि) में, या सहवास के दौरान तुहर में, एकसाथ तीन बार तलाक कह कर पत्नी को तलाक दे सकता है।

 

इस बीच, पीठ ने उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री को छह सप्ताह के अंदर, मुद्दे पर याचिका के न्यायिक रिकॉर्ड की प्रति उपलब्ध कराने को कहा, जिसे उसने एक अलग याचिका के तौर पर लिया है। इस माह के शुरू में उच्चतम न्यायालय ने शायरा बानो की अपील पर केंद्र से जवाब मांगा था। शायरा बानो ने मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन कानून 1937 की धारा 2 की संवैधानिकता को चुनौती दी है।

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TAGS: सुप्रीम कोर्ट, केंद्र सरकार, समिति की रिपोर्ट, मुस्लिम, धार्मिक अल्पसंख्यक, विवाह, तलाक, संरक्षण, पर्सनल लॉ, शरियत, शायरा बानो, प्रधान न्यायाधीश, न्यायमूर्ति टी एस ठाकुर, न्यायमूर्ति यू यू ललित, अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल, तुषार मेहता
OUTLOOK 28 March, 2016
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