पोस्ट ऑफिस बिल 2023 सदन में हुआ पारित, विपक्ष ने प्राइवेसी को लेकर जताई चिंता
राज्यसभा ने सोमवार को डाकघर विधेयक, 2023 पारित कर दिया है। यह विधेयक औपनिवेशिक युग के भारतीय डाकघर अधिनियम 1898 को बदलेगा। इस विधेयक के माध्यम डाक संस्थानों को पुनर्जीवित करने काम होगा। साथ ही साथ 125 साल पुराने भारतीय डाकघर अधिनियम, 1898 को निरस्त भी कर दिया जाएगा। नया विधेयक कई बदलाव की बात करता है। जिसमें केंद्र सरकार की भूमिका को फिर से परिभाषित करना और डाक सेवाओं के महानिदेशक को और भी ज्यादा सशक्त बनाना शामिल है। विधेयक डाक लेखों के अवरोधन, दायित्व छूट और कुछ अपराधों और दंडों को हटाने जैसे प्रमुख पहलुओं को संबोधित करता है।
वहीं आप, राकांपा, अन्नाद्रमुक, तेदेपा और वाम दलों जैसे कई विपक्षी दलों ने बहस के दौरान विधेयक पर चिंता जताई और आरोप लगाया कि यह संघीय सिद्धांतों के खिलाफ है। आम आदमी पार्टी नेता राघव चड्ढा ने कहा कि विधेयक पैकेजों को रोकने या खोलने के लिए कोई प्रक्रिया नहीं बताता है। आइये जानते हैं कि विधेयक की मुख्य विशेषताएं और विवादास्पद प्रावधान क्या है? संसद के मानसून सत्र के दौरान पेश किए गए विधेयक का उद्देश्य डाकघरों के लिए एक सरल विधायी ढांचा प्रदान करना है। इसके माध्यम से नागरिक सेवाओं के विकास को सुविधाजनक बनाया जा सकेगा।
विधेयक में विवादास्पद प्रावधान केंद्र सरकार को अधिसूचना के माध्यम से अधिकारियों को राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, आपातकाल या प्रचलित कानूनों के उल्लंघन से संबंधित कारणों से वस्तुओं को रोकने, खोलने या हिरासत में लेने का अधिकार देने की अनुमति देता है। 1898 का मौजूदा भारतीय डाकघर अधिनियम भी कुछ मतभेदों के साथ अवरोधन का प्रावधान देता है। अधिनियम की धारा 26 केंद्र सरकार, राज्य सरकार, या एक विशेष रूप से अधिकृत अधिकारी को किसी भी डाक लेख या एक विशिष्ट वर्ग या डाक लेख के विवरण को रोकने, हिरासत में लेने या निपटान के लिए एक लिखित आदेश जारी करने का अधिकार देती है।
इसके विपरीत, नया डाकघर विधेयक, खंड 9 के तहत, पाबंदी के लिए लिखित आदेश की आवश्यकता को हटा देता है। केंद्र सरकार को अब लिखित आदेश जारी करने की आवश्यकता के बिना किसी भी वस्तु को रोकने, खोलने या हिरासत में लेने का अधिकार है। संचार मंत्री वैष्णव ने एक जटिल और विविध समाज में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इसकी आवश्यकता बताते हुए अवरोधन प्रावधान का बचाव किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि अवरोधन को नियंत्रित करने वाले नियम संसद के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। विधेयक सरकार और अधिकारियों को डाक वस्तुओं के नुकसान, गलत वितरण, देरी या क्षति से संबंधित दायित्व में छूट देता है। हालाँकि, यह विधेयक प्रावधान देता है जिसके माध्यम से केंद्र सरकार नियमों के तहत इंडिया पोस्ट द्वारा सेवाओं के संबंध में दायित्वों को भी निर्धारित कर सकती है।