Advertisement
17 February 2018

छत्तीसगढ़ के धान से होगा कैंसर का इलाज

छत्तीसगढ़ के धान के तीन किस्मों में ‘कैन्सर’ कोशिकाओं को नष्ट करने का गुण पाया गया है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि छत्तीसगढ़ का धान खतरनाक बीमारी कैन्सर से लड़ने में मददगार साबित हुआ है। भाभा एटॉमिक रिसर्च सेन्टर मुम्बई में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के सहयोग से किये जा रहे अनुसंधान में छत्तीसगढ़ की तीन औषधीय धान प्रजातियों -गठवन, महाराजी और लाईचा में फेफडे़ एवं स्तन के कैन्सर की कोशिकाओं को खत्म करने के गुण पाए गए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि इनमें से लाईचा प्रजाति कैन्सर की कोशिकाओं का प्रगुणन रोकने और उन्हें समाप्त करने में सर्वाधिक प्रभावी साबित हुई है। औषधीय धान की ये तीनों प्रजातियां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में संग्रहित जर्मप्लाज्म से ली गई हैं। इस नए अनुसंधान से कैन्सर के इलाज में आशा की एक नई किरण नजर आई है।

Advertisement

राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री रमन सिंह और कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने अनुसंधान के परिणामों पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लड़ने में राज्य की बहुमूल्य धान प्रजातियां समक्ष है। कृषि वैज्ञानिक स्वर्गीय डाक्टर रिछारिया की मेहनत से इस तरह की दुर्लभ प्रजातियों के धान जर्मप्लाज्म छत्तीसगढ़ के पास उपलब्ध है।

अधिकारियों ने बताया कि प्रयोगशाला में किए गए अनुसंधान के निर्ष्कषों से पता चलता है कि इन तीनों किस्मों के मेथेनॉल में बने एक्सट्रेक्ट ने हयूमन ब्रेस्ट कैन्सर और हयूमन लंग कैन्सर कोशिकाओं की वृद्धि को ना केवल रोक दिया बल्कि कैन्सर कोशिकाओं को नष्ट भी कर दिया।

धान की इन तीनों किस्मों में से लाईचा किस्म ब्रेस्ट कैन्सर सेल्स को नष्ट करने में सबसे प्रभावी साबित हुई। लंग कैन्सर सेल्स को नष्ट करने में तीनों किस्में लगभग बराबर प्रभावी रहीं। हयूमन ब्रेस्ट कैन्सर सेल्स के संबंध में किये गए अनुसंधान में गठवन धान के एक्सट्रेक्ट ने जहां 10 प्रतिशत कैन्सर सेल्स को नष्ट किया वहीं महाराजी के एक्सट्रेक्ट ने लगभग 35 प्रतिशत और लाईचा के एक्सट्रेक्ट ने लगभग 65 प्रतिशत कैन्सर सेल्स को नष्ट कर दिया।

इसी प्रकार हयूमन लंग कैन्सर के संबंध में किये गए अनुसंधान में गठवन धान के एक्सट्रेक्ट ने जहां 70 प्रतिशत कैन्सर सेल्स को नष्ट किया वहीं महाराजी के एक्सट्रेक्ट ने लगभग 70 प्रतिशत और लाईचा के एक्सट्रेक्ट ने लगभग 100 प्रतिशत कैन्सर सेल्स को नष्ट कर दिया। कैन्सर सेल्स नष्ट करने के लिए आवश्यक एक्टिव इन्ग्रेडिएट की मात्रा 200 ग्राम चावल प्रति दिन खाने से प्राप्त की जा सकती है।

अधिकारियों ने बताया कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति एस.के. पाटील ने अनुसंधान के परिणामों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा है कि डाक्टर आर.एच. रिछारिया द्वारा संग्रहित छत्तीसगढ़ की धान की किस्मों में कैन्सर का इलाज पाया जाना विश्वविद्यालय और छत्तीसगढ़ राज्य के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि अनुसंधान के परिणामों के आधार पर शीघ्र ही कैन्सर का इलाज खोजा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि अनुसंधान के अगले चरण में इन चावल की किस्मों से एक्टिव तत्व अलग करने और उनका चूहों पर प्रयोग करने की योजना तैयार की जा रही है।

अब आप हिंदी आउटलुक अपने मोबाइल पर भी पढ़ सकते हैं। डाउनलोड करें आउटलुक हिंदी एप गूगल प्ले स्टोर या एपल स्टोरसे
TAGS: rice, Chhattisgarh, capable, treating cancer
OUTLOOK 17 February, 2018
Advertisement