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20 March 2020

कोरोना वायरस पर एम्स के डायरेक्टर प्रो. रणदीप गुलेरिया से बातचीत| ‘घबराएं नहीं, सतर्क रहें’

कोरोना वायरस अब भारत में भी पैर पसार चुका है। करीब 130 करोड़ आबादी को इस खतरे से बचाने के लिए क्या तैयारियां हो रही हैं, इससे बचने के लिए क्या करना जरूरी है, साथ ही आगे की क्या रणनीति होनी चाहिए, इस पूरे मसले पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के डायरेक्टर प्रो. रणदीप गुलेरिया से नीरज कुमार ने बात की। मुख्य अंश...

कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं, यह कितनी गंभीर स्थिति है?

कोरोना को लेकर ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। अगर हम कुछ सावधानियां अपनाएं तो इससे बच सकते हैं। हमें अपने खान-पान के साथ-साथ खुद को साफ-सुथरा रखने की जरूरत है। लोगों को ज्यादा भीड़ वाली जगहों पर जाने से परहेज करना चाहिए। अभी तक भारत में बहुत गंभीर मामले नहीं आए हैं। बुजुर्गों में इम्युनिटी कम होती है। ऐसे में जिनको डायबिटीज, हाइपर-टेंशन, दिल और फेफड़े की बीमारी जैसी समस्या है, उनमें इस वायरस के फैलने की संभावना ज्यादा है। एक मीटर से कम दूरी हो जाने पर इस वायरस के बढ़ने का खतरा ज्यादा है। ऐसे में किसी भी तरह की सर्दी, खांसी, जुकाम या नजला होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

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चीन, ईरान और इटली में बहुत बुरा हाल है, भारत उनकी तुलना में कितना तैयार है?

अभी जो स्थिति भारत में है, हम उससे पूरी तरह से निपटने में सक्षम हैं। हमने 50 से ज्यादा टेस्टिंग लैब बना लिए हैं। कई सारे अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड की व्यवस्था हो चुकी है। ऐसे में हम काफी हद तक तैयार हैं। जरूरत पड़ने पर इसमें प्राइवेट सेक्टर को भी शामिल किया जा सकता है। एम्स में हमने ट्रामा सेंटर में एक जगह बनाई है। झज्जर में 100 बेड का एक स्पेशल वार्ड बनाया गया है जिसमें 25 बेड आईसीयू के हैं। जरूरत पड़ने पर हम इसमें 100 बेड और बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही इसमें वेंटीलेटर की भी व्यवस्था की गई है।

होमियोपैथी और आयुर्वेद में इसके इलाज के दावे किए जा रहे हैं, क्या ऐसा संभव है?

यदि  इस तरह का दावा किया जा रहा है तो वह सही नहीं है। क्योंकि यह वायरस नया है। अभी एलोपैथी में जो उपचार किया जा रहा है वे एमईआरएस कोरोना वायरस की दवाएं हैं जिसे एक तरह से हम इस वायरस की छोटी बहन कह सकते है। जब तक किसी दवा का ट्रायल नहीं हो जाता तब तक हम नहीं कह सकते कि यह दवा काम करेगी या नहीं। अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।

कोरोना और स्वाइन फ्लू के लक्षण एक जैसे होते हैं। फिर इसमें फर्क कैसे किया जाए?

आज कल के मौसम में स्वाइन फ्लू के मामले आम हैं और यह अब मौसमी वायरस हो गया है। कोरोना और स्वाइन फ्लू के लक्षण एक जैसे हैं। सिर्फ लक्षण के आधार पर यह कह देना मुश्किल है कि ये स्वाइन फ्लू के मामले हैं या कोरोना के हैं, इसलिए जिनमें भी इस तरह के लक्षण मिल रहे हैं उनकी स्क्रीनिंग के साथ-साथ ट्रैवल हिस्ट्री खंगाली जा रही है।

क्या मास्क और सेनेटाइजर की हर किसी को जरूरत है और दवाओं की क्या स्थिति है?

जिन्हें सर्दी, खांसी और जुकाम के लक्षण हैं, वे सर्जरी वाले मास्क लगा सकते हैं। अहम बात यह है कि हमें अपने हाथों को साफ रखने की जरूरत है। इसके लिए अपने दोनों हाथों को साबुन से धोना है। उसके बाद सेनेटाइजर यदि हो तो उंगलियों को एक-दूसरे में फंसाते हुए लगाना है। देखा जाए तो सेनेटाइजर से बेहतर साबुन है। जो भी दवाएं कोरोना वायरस को लेकर इस्तेमाल की जा रही हैं, वे हमारे पास पर्याप्‍त मात्रा में हैं। अगर कमी आती है तो हम दक्षिण एशियाई देशों से दवाएं आयात कर अपनी जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।

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TAGS: Coronavirus, Prof. Randeep Guleria, एम्स, रणदीप गुलेरिया, कोरोना वायरस, बचाव
OUTLOOK 20 March, 2020
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