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07 November 2015

‘खेर के मार्च को दादरी कांड-कुलबर्गी की हत्या के समर्थन में माना जाए?’

http://www.newslaundry.com/2015/11/02/an-open-letter-to-anupam-kher-where-were-you-when-is-a-lazy-ar

पत्रकार प्रभात शुंगलू फेसबुक पर लिखते हैं- खेर साहब, कलबुर्गी और अखलाक देशभक्त थे या नहीं? इसका जवाब हां या ना में दें प्लीज़। फिर कल आपसे मिलता हूं।

 

विक्रम सिंह चौहान- देश के तमाम बुद्धिजीवियों के विरोध में खड़े होकर अनुपम खेर ने अपनी मूर्खता का परिचय दिया है। सभी मोदीभक्त एक जैसे ही क्यों होते हैं ?

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गुलशन कुमार अरोड़ा- अनुपम खेर जिस मार्च का नेतृत्व करने जा रहे हैं उसे दादरी कांड और कुलबर्गी जैसों की हत्या के समर्थन में क्यों नहीं माना जाना चाहिए ?

 

राजा कुरैशी- जैसी खुराक होगी वैसे ही डकार आएंगे, इसमे अनुपम खेर की कोई गलती नही है।

 

सोनू शर्मा- क्योंकि बुद्धिमान व्यक्ति भले ही एक बात में सहमत ना हो मूर्ख जरूर सहमत होते हैं।

 

कृष्णा शर्मा- अनुपम खेर की आज की चाटुकारिता रैली, राज्यसभा सीट के लिए कवायद है।

 

प्रवीण झा- अनुपम व्यापम पर क्यों नही बोलते?

 

सोनू नाथ भार्गव- अगर मिसेज़ खेर M.P. नहीं होती तो खेर साहब की भाषा अलग होती।

 

पुरनेंदु गोस्वामी- इसे कहते है राजनीति अनुपम खेर ने बॉलीवुड में भी दो फाड़ कर दिए।

 

पंकज मिश्रा- यक्ष - अनुपम खेर कौन हैं ?
 युधिष्ठिर - अनुपम खेर वह विचित्र प्राणी है जो अपना पेट और पीठ दोनों , एक साथ देख सकता है | कुदरत  ने उसे यह हुनर बख्शा है कि वह साइमलटेनियसली यह देख सकता है कि पेट पर लात भी न पड़ने पाए और पीठ पर किसी का आश्वस्ति भरा हाथ बना भी रहे।

 

 


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TAGS: सोशल मीडिया, अनुपम खेर, असहिष्णुता, #‎MarchForIndia
OUTLOOK 07 November, 2015
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