झारखंड कैबिनेट की बैठक: सोरेन सरकार ने रघुवर सरकार के फैसले को पलटा
डीवीसी ( दामोदर घाटी निगम) के बकाया बिजली का पैसा केंद्र द्वारा राज्य सरकार के खजाने से काटे जाने की टीस मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को इस तरह हुई थी कि राज्य सरकार ने उस त्रिपक्षीय समझौते से ही खुद को अलग कर लिया। इस प्रकार केंद्र का हाथ काट दिया कि वह राज्य के खजाने से खुद कटौती कर ले। बुधवार को कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई। इस तरह भाजपा की रघुवर सरकार के समय में लिये गये इस फैसले को हेमंत सरकार ने पलट दिया।
डीवीसी से राज्य सरकार बिजली खरीदती है। उसके भुगतान को लेकर ऊर्जा मंत्रालय, रिजर्व बैंक और झारखंड सरकार के बीच रघुवर सरकार के समय में त्रिपक्षीय फैसला लिया गया था। जिसमें तय हुआ था कि बकाया राशि एक मियाद के बाद राज्य सरकार के खजाने से काट लिया जा सकेगा। रघुवर सरकार ने समझौता 2017 में कर लिया था मगर बिजली बकाया की अदायगी नहीं की थी। नतीजा हुआ कि हेमंत सरकार के शासन में डीवीसी से खरीदी गई बिजली के एवज में 5608.32 करोड़ का बकाया दिखाते हुए त्रिपक्षीय समझौते के हवाले से 14017.50 करोड़ रुपये केंद्र ने राज्य के खजाने से काट लिये। और दूसरी किश्त की राशि जनवरी में काटने की चेतावनी दे दी।
मुख्यमंत्री ने कैबिनेट की बैठक के बाद बुद्धवार की रात कहा कि उस समझौते का खामियाजा राज्य के लोगों को उठाना पड़ रहा था। एक तरफ बकाया को लेकर डीवीसी ने बिजली की कटौती शुरू कर दी है। दूसरी तरफ केंद्र सरकार आरबीआइ के माध्यम से राज्य के खजाने से पैसा काट रही है। इस पैसे का इस्तेमाल वृद्धावस्था पेंशन, छात्रवृत्ति कल्याण, अनुसूचित जाति, जनजाति के कल्याण के लिए होता। मगर पैसा सीधा काट लिया गया। वित्त आयोग से मिलने वाली राशि की सीधे कटौती कर ली गई जिससे योजनाओं पर ग्रहण लग गया। ऊर्जा सचिव अविनाश कुमार के अनुसार अब जितनी बिजली खरीदेंगे उतने का ही भुगतान करेंगे।
बता दें कि राज्य सरकार के खजाने से राशि काट लेने को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़ी गंभीरता से लेते हुए 22 अक्टूबर को प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखा था। कोरोना में राज्य की माली हालत खराब होने का जिक्र करते हुए राशि वापस करने का आग्रह किया था। कहा था कि 70 प्रतिशत बिजली कोयले से तैयार होती है और कोयला मंत्रालय पर झारखंड की बड़ी राशि बकाया है। ऐसे में कोयला मंत्रालय को त्रिपक्षीय समझौते में चौथा पक्ष बनाया जाये। मैं कटौती के निर्णय से व्यथित हूं, आहत हूं। झारखंड से ज्यादा बकाया दूसरे राज्यों का है मगर कटौती हमारे खजाने से हुई। लगभगत 5514 करोड़ का बकाया तो रघुवर सरकार के समय का है। मेरे काल का बकाया 1313 करोड़ है जिसमें 741 करोड़ का भुगतान कर दिया गया है। पीएम को पत्र लिखे जाने के बावजूद न पैसा लौटा न कोई पहल हुई। इससे उलट डीवीसी अगले बकाया की धमकी देकर बिजली की कटौती शुरू कर दी और अभी कोई पचास फीसदी बिजली की कटौती कर रहा है। अंतत: मजबूर होकर हेमंत सरकार ने खुद को उस त्रिपक्षीय समझौते से अलग कर लिया।
कैबिनेट ने एक अन्य निर्णय में झारखंड कंबाइंड सर्विसेज नियमावली को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1951 के बाद पहली बार यह नियमावली बनी है। इससे जेपीएससी की परीक्षाओं को लेकर उठने वाले विवाद पर विराम लगेगा।