ऐसी अटकलें हैं कि ‘सत्ता में भागीदारी’ के लिए एक गुप्त फॉर्मूला बना था, जिसके अनुसार सिद्धरमैया कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यकाल के पहले भाग में मुख्यमंत्री होंगे और फिर शिवकुमार उनकी जगह लेंगे।
कांग्रेस विधायकों और मंत्रियों का एक वर्ग सिद्धरमैया का समर्थन कर रहा है और चाहता है कि वह पांच साल का कार्यकाल पूरा करें। दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस प्रमुख शिवकुमार पार्टी में अपने विरोधियों को चुप कराने की कोशिश कर रहे हैं और उनसे ऐसी किसी भी चर्चा से दूर रहने के लिए कह रहे हैं।
मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान सिद्धरमैया ने इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा, “मैं अब विवाद के बारे में नहीं बोलूंगा। राजन्ना और शिवकुमार ने अपने विचार व्यक्त किए हैं।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या वास्तव में ‘सत्ता में भागीदारी’ को लेकर कोई समझौता था, उन्होंने कहा, “मुझे आपको कितनी बार बताना पड़ेगा कि अंतिम निर्णय आलाकमान लेता है? वह (आलाकमान) जो भी निर्णय लेगा वह सभी पर लागू होगा।”
राजन्ना ने सोमवार को शिवकुमार पर निशाना साधते हुए उनसे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) और पार्टी आलाकमान के नाम का "दुरुपयोग" न करने का आग्रह किया।
वह रविवार को शिवकुमार के बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।
शिवकुमार ने परोक्ष रूप से राजन्ना और मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के करीबी माने जाने वाले अन्य नेताओं व मंत्रियों पर निशाना साधते हुए कहा था कि कर्नाटक में कांग्रेस के निर्विवाद नेता सिद्धरमैया के नाम का 'दुरुपयोग' करने वाले बयान देने की किसी को कोई जरूरत नहीं है।