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15 May 2017

सीपीईसी के बदले चीनी कंपनियों को बेहिसाब जमीन देगा पाकिस्तान

गूगल

पहला वर्जन 231 पन्नों का है जिसमें विस्तार से पूरी परियोजना की जानकारी दी गई है जबकि दूसरा वर्जन संक्षिप्त है और सिर्फ 30 पन्नों का है। पा‌किस्तान सरकार ने अपने देश की राज्य सरकारों को इस परियोजना के प्रति सहमत करने के लिए ये दूसरा वर्जन उनके पास भेजा था। अखबार ने दोनों ही दस्तावेजों की मुख्य बातों को प्रकाशित किया है।

चीन विकास बैंक (सीडीबी) और नेशनल डेवेलपमेंट रिफॉर्म कमीशन (एनडीआरसी) द्वारा तैयार विस्तृत मास्टर प्लान के अनुसार चीन के शिंजियान उइगर स्वायत्त क्षेत्र से लेकर बलूचिस्तान के ग्वादर तक जो आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) बनाया जा रहा है उसके आस-पास की हजारों एकड़ कृषि भूमि पाकिस्तान ने चीन की कंपनियों को बीज विश्वविद्यालय से लेकर सिंचाई तकनीक तक अलग-अलग क्षेत्रों के प्रदर्शनी परियोजनाओं को स्‍थापित करने के लिए देने का फैसला किया है।

इस आर्थिक गलियारे के तहत पेशावर से कराची तक पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में सड़कों और व्यस्त बाजारों में कानून-व्यवस्‍था बनाए रखने के लिए 24 घंटे जांच और निगरानी की व्यवस्‍था की जाएगी और इसके लिए वीडियो रिकार्डिंग की सुविधाएं स्‍थापित की जाएंगी। इसके साथ ही पूरे देश में चीन ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क का जाल बिछाएगा जो न सिर्फ तेज गति इंटरनेट मुहैया कराएगा बल्कि टेलीविजन के प्रसार में भी मददगार होगा। खास बात यह है कि इस मास्टर प्लान के अनुसार इस क्षेत्रीय टेलीविजन प्रसार में चीनी मीडिया की अहम भूमिका होगी जो पाकिस्तान में चीन की संस्कृति के प्रसार के लिए काम करेगा। सीपीईसी मास्टर प्लान में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्‍था के हर क्षेत्र में चीनी कंपनियों और वहां की संस्कृति के गहरे दखल की परिकल्पना की गई है। प्लान के अनुसार कुछ क्षेत्रों में चीनी कंपनियों के लिए बाजार निर्मित करने की बात कही गई और इसपर अमल भी हो चुका है। उदाहरण के लिए घरेलू उपकरणों के क्षेत्र में हायर, टेलीकम्युनिकेशन के क्षेत्र में चाइनामोबाइल और हुवेई और खनन और खनिज के क्षेत्र में चाइना मेटेलर्जिकल ग्रुप कॉरपोरेशन ने काम करना शुरू कर दिया है।

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खास बात यह है कि पाकिस्तान की केंद्रीय सरकार ने सीपीईसी की पूरी जानकारी सिर्फ पंजाब सरकार को दी। अन्य राज्य सरकारों को इस मास्टर प्लान का संक्षिप्त विवरण दिया गया ताकि कहीं किसी तरह का असंतोष न हो। वैसे अब इस मास्टर प्लान के सामने आने और उसमें देश के संसाधनों को इस तरह चीनी कंपनियों के हवाले करने को लेकर हंगामा होने की बात कही जा रही है। भारत लगातार चीन की इस परियोजना को लेकर संदेह और विरोध जताता रहा है क्योंकि इसका कुछ हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से गुजरता है। पीओके में भी इस परियोजना को लेकर विरोध शुरू हो गया है। (एजेंसी)

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TAGS: सीपीईसी, चीन, पाकिस्तान, आर्थिक गलियारा, पेशावर, कराची
OUTLOOK 15 May, 2017
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