Advertisement

केवी कामथ: ब्रिक्‍स निर्माण में भारतीय लोहा

के.वी. कामथ के नाम से बेहतर पहचाने जाने वाले आईसीआईसीआई के अध्यक्ष कुंडापूर वामन कामथ जल्दी ही उस नए विकास बैंक की अध्यक्षता संभालने वाले हैं जिसे ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) ने ग‌ठित किया है। यह बैंक शंघाई में स्थित होगा और उदीयमान देशों को इनफ्रास्टक्चर परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्‍ध कराएगा। इसे विश्व बैंक के विलोम के तौर पर देखा जा रहा है। क्योंकि तेजी से विकासशील ‌ब्रिक्स देशों का पूरी विश्व अर्थव्यवस्‍था में 5वां हिस्सा है और वे दुनिया की आबादी का 42 प्रतिशत है।
केवी कामथ: ब्रिक्‍स निर्माण में भारतीय लोहा

67 वर्ष की उम्र में जब ज्यादातर लोग शांत रिटायरमेंट तलाश रहे होते हैं तब कामथ एक बार फिर संस्‍था निर्माण के एक नए क्षेत्र में कदम रख रहे हैं। यह कल की बात लगती है लेकिन 1970 के दशक की शुरूआत में कामथ ने इंडस्ट्रीयल क्रेडिट एंड इनवेस्टमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (आईसीआईसीआई) में एक युवा अधिकारी के तौर पर ज्वाॅइन किया था। उन्हें अपना पहला वैश्विक बैंक अनुभव 1988 में मिला जब उन्होंने इंडोनेशिया में एशियाई विकास बैंक ज्वॉइन करने के लिए भारत छोड़ा था। वह आईसीआईसीआई के प्रमुख के तौर पर 1990 के दशक के मध्य में भारत लौटे। उन्होंने आईसीआईसीआई बैंक शुरू किया और 2002 में पूर्व आईसीआईसीआई का बैंक में विलय कर दिया।

 

कामथ तमाम विभाजनों के परे व्यापार नेताओं, वैश्विक नेताओं और राजनीतिक पार्टियों के बीच अपने संपर्कों के लिए मशहूर हैं। सावधानी और गोपनीयता के लिए मशहूर कामथ सबसे मित्रता के लिए चर्चित रहे हैं। सभी ग्राहकों से निकटता की यह खूबी उन्हें एक प्रोफेशनल बैंकर की योग्यता प्रदान करती है। किस्सा मशहूर है कि 1970 के दशक की शुरूआत में जब कपड़े का कारोबार फैलाने के लिए धीरू भाई अंबानी का ऋण अनुरोध ज्यादातर लोग ठुकरा रहे थे तब कामथ ही वह बैंकर थे जो उनकी मदद के लिए आगे आए। इस तरह अंबानी परिवार से उनके दीर्घकालीन रिश्ते का बीज बोया गया। सबकी नजर में यह रिश्ता तब आया जब धीरू भाई अंबानी के निधन के बाद कामथ ने मुकेश और अनिल अंबानी के बीच बंटवारे में मध्यस्थता की। अपनी लड़ाई में दोनों भाईयों ने समझौते का आधार कामथ के फैसले के ही बनाया।

 

संधिकर्ता के रूप में कामथ का कद फिर दिखाई पड़ा जब कुछ साल पहले संस्‍थापक एन. आर. नारायण मूर्ति की विदाई के बाद इनफोसिस बदलाव के दौर से गुजर रहा था। एक मत से कामथ को कंपनी की अध्यक्षता सौंपी गई। इस पद पर वह अब भी बने हुए हैं। कामथ में भविष्य भांप लेने की काबिलियत है जिसका नतीजा भारत में एटीएम क्रांति के रूप में सामने आया। भारतीय ऋण कारोबार में लीजिंग का प्रवेश उन्होंने ही कराया। विद्वान कामथ ने भविष्य के नेताओं का चयन करने की काबिलियत है। यह खूबी उन्होंने आईसीआईसीआई बैंक में दिखाई जो 2009 में मुख्य कार्यकारी अधिकारी के तौर पर कामथ की विदाई के बाद भी नेतृत्व के संकट से कभी नहीं गुजरा।

 

बैंकर के रूप में वह इस क्षेत्र, भारत के अलावा खासकर चीन और रूस, और यहां की बैंकिंग प्रक्रियाओं से अच्छी तरह वाकिफ हैं। इसी वजह से कामथ इस पद के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार माने गए। आईसीआईसीआई बैंक में उनकी सफलता पर गौर कीजिए।  इस बैंक की परिसंपत्तियां कामथ के पद ग्रहण के बाद 21 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 2009 में उनके जाने के वक्त 3,80,000 करोड़ रुपये मूल्य की हो गईं।

 

ब्रिक्स बैंक 50 अरब डॉलर के पूंजी आधार से शुरूआत करेगा। यदि सबकुछ योजना के अनुसार चला तो यह आधार कुछ ही समय में दोगुना हो जाएगा। खेल के नियमों से अच्छी तरह वाकिफ, नई टेक्नोलॉजी में सिद्धहस्त कामथ इस बैंक के नेतृत्व के लिए सर्वाधिक उपयुक्त हैं। आरंभिक वर्षों में इस बैंक की नाव खेने और एक अन्य संस्‍था के निर्माण का काम वह बखूबी अंजाब देंगे जैसा कि वह आईसीआईसीआई बैंक में पहले कर चुके हैं।

 

 

 

अब आप हिंदी आउटलुक अपने मोबाइल पर भी पढ़ सकते हैं। डाउनलोड करें आउटलुक हिंदी एप गूगल प्ले स्टोर या एपल स्टोर से
  Close Ad