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2 मार्च 2026 | Mar-02-2026

आवरण कथाः हक नहीं,हुक्म का इंसाफ

जमानत हक है और यह संविधान के अनुच्छेद 21 में रहने, जीने और जीविका चलाने के अधिकार के अलावा उस मूलभूत न्याय-सिद्धांत से निकलता है कि आरोप साबित न हो, तब तक हर कोई बेकसूर है


16 फरवरी 2026 | Feb-16-2026

आवरण कथा/गणतंत्र 76 साल: गणराज्य के दो राहे

संवैधानिक दायित्वों और मर्यादाओं की सबसे बड़ी कसौटी नागरिक अधिकारों के मामले हैं, इसलिए यह देखना जरूरी कि आज हम कहां खड़े हैं

हरिमोहन मिश्र

2 फरवरी 2026 | Feb-02-2026

आवरण कथाः दादागीरी के नए दायरे

वेनेजुएला में सीधे फौजी कार्रवाई के जरिए राष्ट्रपति मदुरो को उठा लाकर और लैटिन अमेरिका के बाकी देशों तथा ईरान को धमकी देकर ट्रम्प ने क्षेत्रीय कब्जे और उपनिवेशवाद के नए दौर का आगाज किया

हरिमाहन मिश्र

19 जनवरी 2026 | Jan-19-2026

बीता बरस/आवरण कथा: दहलते हुए बदली दुनिया

सदी का पच्चीसवां बरस दुनिया को ऐसे बदल गया कि पुराने राजनैतिक-आर्थिक समीकरण बेमानी हो गए, अलबत्ता, कुछ नई बयारें बहीं, अर्थव्यवस्था से लेकर खेल के मैदान तक में कुछ उम्मीद के बिरवे फूटे, जो 2026 में आशा लेकर पहुंचेंगे

हरिमोहन मिश्र

5 जनवरी 2026 | Jan-05-2026

आवरण कथा/हिरोइनों की नई पौधःनई उमर की नई फसल

बॉलीवुड में इन दिनों नई पीढ़ी, नए चेहरे, नई ऊर्जा और नए सपनों की हलचल है, स्क्रीन पर चमकते ये चेहरे सिर्फ सुंदरता से नहीं मोहते, बल्कि दमदार उपस्थिति, शानदार अभिनय भी उनकी ताकत, कुछ फिल्मी विरासत के साथ, तो कुछ अपने दम पर हौले-हौले फिल्माकाश में चमक बिखेर रहे

आकांक्षा पारे काशिव

22 दिसंबर 2025 | Dec-22-2025

आवरण कथा/महिला खिलाड़ी: बेमिसाल रोशन लड़कियां

दृष्टिबाधित क्रिकेट विश्व कप की जीत भारतीय लड़कियों के पॉवर और मसल्स गेम में नई कड़ी है, लड़कियों ने साबित किया दमखम सिर्फ मर्दाना नहीं होता

मंथन रस्तोगी

8 दिसंबर 2025 | Dec-08-2025

बिहार जनादेश '25 / आवरण कथाः नीमो नमः

तमाम ज्वलंत मुद्दों के बावजूद नीतीश का जादू चला और एनडीए को ऐतिहासिक बहुमत मिल गया, खासकर महिला वोटरों ने जाहिर किया कि उनके लिए बड़े मुद्दों की जगह स्त्री-सशक्तीकरण ज्यादा अहम, मगर रोजगार और आर्थिक मुद्दों पर प्राथमिकता जरूरी

गिरिधर झा

24 नवंबर 2025 | Nov-24-2025

बिहार विधानसभा चुनाव’25/ आवरण कथा: मुद्दा तो बिलाशक रोजगार

बिहार में पहले चरण के मतदान तक यह साफ हो चला है कि रोजगार, नौकरी, पलायन, महंगाई, पढ़ाई और इलाज की बेहतर व्यवस्था ही वोटरों के दिमाग में, बाकी सारे मुद्दे और पुराने सियासी समीकरण हुए पीछे

हरिमोहन मिश्र

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