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2 फरवरी 2026 · FEB 02 , 2026

पत्र संपादक के नाम

पाठको की चिट्ठियां
पिछले अंक पर आई प्रतिक्रियाएं

हर जगह अव्वल

19 जनवरी के अंक में, ‘‘वैभव’ खोज’, 2025 में सर्वाधिक खोजे गए एक लड़के की कहानी बताती है कि काम अच्छा हो, तो लोगों की जिज्ञासा बनी रहती है। लोगों ने उसे गूगल पर इतना खोजा कि वह अव्वल आ गया। उसकी उम्र और खेल में उसका प्रदर्शन दोनों बातों ने उसे इस मुकाम तक पहुंचाया। देश में कई बड़ी-बड़ी घटनाएं हुईं लेकिन वैभव इन सबमें आगे रहे। यह बताता है कि भारत में क्रिकेट को लेकर कितना जुनून है। इसी जुनून के कारण एक क्रिकेट खिलाड़ी को इतना खोजा गया। भारत में कोई भी नेता, अभिनेता से ऊपर खिलाड़ी होता है। फिल्मी हस्तियों को लेकर भी लोगों में क्रेज रहता है लेकिन खिलाड़ी के आगे वह कुछ भी नहीं। उम्मीद है कि वह ऐसे ही लोगों की उत्सुकता बनाए रखेगा और हम उसके काम खोजते रहेंगे।

नविता नव्या | पटना, बिहार

माहौल चिंताजनक

19 जनवरी के अंक में, ‘नए हिंसक दौर के मायने’, बांग्लादेश की खूनी तस्वीर पेश करता है। बांग्लादेश लंबे समय से अराजक लोगों की भेंट चढ़ा हुआ है। शेख हसीना को देश छोड़ कर भागने पर मजबूर करने वाले नहीं चाहते कि वहां कभी चुनाव हों। बांग्लादेश में जैसे-जैसे अस्थिरता बढ़ती जा रही हैं, वैसे-वैसे भारत की चिंता भी बढ़ रही है। चुनाव की घोषणा के बाद ही छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत मात्र संयोग नहीं हो सकती। यह सोची-समझी हिंसा है। इस हिंसक दौर में वहां रह रहा हिंदू समुदाय पिस रहा है। हादी खुद ढाका से चुनाव लड़ने वाले थे लेकिन उनकी हत्या कर इस बहाने हिंदुओं पर निशाना साधा जा रहा है। भारत के आलोचक समझे जाने वाले हादी की हत्या का गुस्सा बेवजह वहां रह रहे हिंदू समुदाय पर निकल रहा है। भारत को तत्काल बांग्लादेश मुद्दे पर बात करना चाहिए और हिंदुओं के हित को देखना चाहिए।

देववाणी अग्रवाल | इंदौर, मध्य प्रदेश

ट्रम्प का साल

19 जनवरी के अंक में, ‘दहलते हुए बदली दुनिया’, देश और देश से बाहर का जायजा लेती दिखती है। 2025 साल बहुत कठिनाई में बीता। उम्मीद की जा सकती है कि 2026 थोड़ा स्थिर होगा। बीता साल ट्रम्प के नाम रहा। ऐसा कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। ट्रम्प ने पूरे साल तरह-तरह की हरकतें कर सुर्खियां बटोरीं। उन्होंने पूरी दुनिया की नाक में दम करके रखा। कभी टैरिफ तो कभी युद्ध की धमकी। कभी शांति वार्ता तो कभी सीजफायर। जहां जब मौका मिला उन्होंने हर जगह दखल दिया। ऐसे में बदली हुई दुनिया का इतना अच्छा लेखा-जोखा मिलना कहीं और मुश्किल है।

 

सुरेश जोशी | गुवाहाटी, असम

साल का हिसाब

पूरे साल लोगों ने क्या खोजा, क्या देखा या उनकी किस विषय में दिलचस्पी रही, यह जानने का मौका मिला। 19 जनवरी के अंक में, ‘खोज के ट्रेंड’ में लोगों ने जो भी सामग्री या जानकारी चाही उसे अंग्रेजी की वर्णमाला के अनुसार देकर आपने बहुत अच्छा किया। गूगल और अन्य तरह के सर्च इंजन से इतना तो हो गया है कि लोगों के रुझान को पकड़ना आसान हो गया है। सोशल मीडिया ने इस राह को और भी आसान कर दिया है। देश में बहुत तरह की घटनाएं हो जाती हैं। धीरे-धीरे दूसरी कोई और घटना होने पर लोगों की स्मृति से ये घटनाएं मिटने लगती हैं। ऐसे में इन पलों को फिर याद करना अच्छा लगता है। आइपीएल से लेकर महिला क्रिकेट तक इस साल की ट्रेंडिंग सूची को देख कर जश्न का माहौल फिर याद आ जाता है। सर्च से यह भी पता चला कि एआइ के प्रति जो जिज्ञासा दुनिया में दिखाई दी, उससे ही पता चलता है कि अब एआइ का ही राज होगा।

सिद्धार्थ पूरण | भिलाई, छत्तीसगढ़

मजेदार प्रश्न

जेमिमा रोड्रिग्स और वैभव सूर्यवंशी दोनों ने खेल में अलग तरह की उपलब्धियां हासिल कीं। लेकिन यह पढ़ कर हंसी आ गई कि लोग, ‘‘मेरे आसपास भूकंप’’ ‘‘मेरे आसपास वायु गुणवत्ता’’ जैसे प्रश्न भी कई-कई बार पूछते हैं। इससे पता चलता है कि हम व्यस्त होने की बात भले ही कहें लेकिन हमारे पास फुर्सत की कोई कमी नहीं है। एक फिल्म आती है और लोग उसके बारे में जानने के लिए प्रश्नों की झड़ी लगा देते हैं। कुछ तो ऐसी बातें भी खोजी गईं, जिनका कोई मतलब ही नहीं था। लेकिन लोग हैं, बस की बोर्ड पर उंगलियां ही चलाना है, सो चला रहे हैं। दिन भर लोगों के हाथ में मोबाइल और लैपटॉप रहता है, तो भला वे लोग भी क्या करें। कुछ तो खोजना है, सो बे-सिर पैर की बातें ही सही। (19 जनवरी, ‘खोज के ट्रेंड’)

सतीश राजौरिया | बीकानेर, राजस्थान

प्रकृति का संदेश

19 जून के अंक में, ‘दोहन की कानूनी परिभाषा’ अरावली पर्वत शृंखला के बारे में अच्छी जानकारी उपलब्ध कराती है। उत्तर भारत की सबसे प्राचीन पर्वत शृंखला, जिसने न जाने कितनी सभ्यताओं का पोषण किया, आज उसे ही नष्ट करने की कोशिश की जा रही है। आधुनिकता के नशे में हम अपनी ही जड़ों को नष्ट करने पर तुले हुए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न तो यही है कि वहां से प्राप्त खनिज आखिर कितने दिनों तक चल पाएगा। एक न एक दिन वहां की प्राकृतिक संपदा नष्ट होगी ही। लेकिन आज तक इस पर्वतमाला ने जितना हमारा जीवन सुगम किया है, उसकी भरपाई फिर कभी नहीं हो सकेगी। अरावली पर लोगों को एकजुट होकर आवाज उठाने की जरूरत है। वरना आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं कर सकेगी। आशा है कि कोर्ट का नया आदेश अरावली के पक्ष में होगा और अरावली पर्वतमाला शान से खड़ी रहेगी। (19 जनवरी ‘दोहन की कानूनी परिभाषा’)

निर्मल सिंह ऐरी | पिथौरागढ़, उत्तराखंड

असली कलाकार

5 जनवरी 2026 के अंक में स्मिता पाटिल की पुण्यतिथि पर प्रकाशित इंटरव्यू, ‘स्टार नहीं, स्मृति का हिस्सा’ वास्तव में स्मिता जी जैसी प्रतिभाशाली और प्रभावी व्यक्तित्व की विशेषताओं को उजागर करता है। कुछ व्यक्ति अपने अल्पकालीन जीवन में भी ऐसी अमिट छाप छोड़ते हैं कि उनके कला गुण अविस्मरणीय रहते हैं। समानांतर सिनेमा की फिल्मों में उनका योगदान अतुलनीय रहा है। व्यावसायिक फिल्मों में भी उन्होंने अपने काम की गहरी छाप छोड़ी। दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित पद्मश्री स्मिता पाटिल ने अपनी प्रतिभा से फिल्म उद्योग को जो भी दिया, वह निस्‍संदेह लंबे समय तक सबकी स्मृति का हिस्सा बनकर रहेगा।

आनंद तांबे | पुणे, महाराष्ट्र

पूरे देश में हो विरोध

5 जनवरी के अंक में, ‘महाराष्ट्र का चिपको आंदोलन’ समय-समय पर भारत में पर्यावरण बचाने के लिए विभिन्न समाज के योगदान को रेखांकित करता है। नासिक के तपोवन में पेड़ों को बचाने के लिए घरेलू कामगारों के चिपको आंदोलन को शुरू करना सार्थक पहल है। 1700 पेड़ों को काटने का फैसला किसी भी सूरत में सही नहीं कहा जा सकता। इसका विरोध सिर्फ नासिक ही नहीं, पूरे भारत में होना चाहिए।

मीना धानिया | नई दिल्ली

कठिन काम

5 जनवरी के अंक में, आवरण कथा, ‘नई उमर की नई फसल’ नए कलाकारों के बारे में अच्छी जानकारी देती है। इनमें से कुछ ने दमदार शुरुआत की, तो कुछ की ट्रोलिंग हुई। फिल्म में करिअर बनाना आसान नहीं है। देखने में यह जितना सरल लगता है, दरअसल उतना ही कठिन काम है। कलाकार की बहुत  जिम्मेदारी होती है। किसी वास्तविक पात्र को निभाना और कठिन होता है, क्योंकि लोगों के पास पहले से ही वास्तविक पात्र की जानकारी रहती है। लेकिन नई लड़कियां वाकई मेहनत कर रही हैं। यह लेख उनके बारे में बहुत अच्छे ढंग से बताता है।

शैलेंद्र कुमार चतुर्वेदी | फीरोजाबाद, उत्तर प्रदेश

पुराने दोस्त की खातिरदारी

5 जनवरी के अंक में, ‘पुतिन के दौरे का हासिल’ दो देशों की परस्पर साझेदारी, परस्पर हितों को बताता है। रूस के साथ हमारी दोस्ती बहुत पुरानी है और इसे हमें संभाल कर रखना चाहिए। रूस ने भी भारत के साथ हमेशा दोस्ती निभाई है। भारत के पास वैसे भी दोस्तों की कमी है इसलिए उसे कभी भी रूस को नहीं छोड़ना चाहिए। भारत चौतरफा ऐसे पड़ोसियों से घिरा है, जो उसका अहित ही सोचते हैं। पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन के साथ अब नेपाल में भी स्थिति अराजक हो गई है। इसलिए हमें अपने पुराने दोस्त को संभाल कर रखना चाहिए। अमेरिका भी अपनी मनमानी दिखाता है। उसकी प्राथमिकताएं अलग हैं। हमने दिल खोलकर दोस्त का स्वागत किया।

चारू मल्होत्रा | महू, मध्य प्रदेश

 

पुरस्कृत पत्रः खोज की फितरत

19 जनवरी के अंक में, ‘खोज के ट्रेंड’ पढ़ने से पूरा साल आंखों के आगे फिर घूम गया। कितनी ही बातें होती हैं, जो हम पढ़ते हैं और भूल जाते हैं। साल बीत जाने के बाद जब इस तरह के लेख पढ़ें, तब याद आता है कि साल में यह भी हुआ था। अंग्रेजी की वर्णमाला के अनुसार घटना और लोगों के बारे में जानना दिलचस्प रहा। कुछ ऐसे व्यक्ति भी रहे, जिनके बारे में पहले पढ़ा नहीं था। गूगल सर्च की यह अच्छी बात है कि इसके सर्च ट्रेंड साल का लेखा-जोखा देते हैं। इससे यह भी पता चलता है कि देश क्या सोच रहा है। लोगों के बारे में जानना हमेशा ही दिलचस्प रहता है। पहले भी लोगों को सेलेब्रिटीयों के बारे में जानने में दिलचस्पी रहती थी। लेकिन तब साधन सीमित थे।

अंकिता भारद्वाज|हिसार, हरियाणा

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