सदी का पच्चीसवां बरस दुनिया को ऐसे बदल गया कि पुराने राजनैतिक-आर्थिक समीकरण बेमानी हो गए, अलबत्ता, कुछ नई बयारें बहीं, अर्थव्यवस्था से लेकर खेल के मैदान तक में कुछ उम्मीद के बिरवे फूटे, जो 2026 में आशा लेकर पहुंचेंगे
छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद फैली हिंसा और अशांति की आड़ में कट्टरपंथी ताकतें भारत विरोध को हवा देकर आसन्न चुनावों को बेमानी बनाने और अपना दबदबा कायम करने की कोशिश में
वैभव यकीनन प्रतिभा संपन्न है लेकिन उसकी असली परीक्षा अंतरराष्ट्रीय स्तर के मैचों में होनी है। उम्मीद है कि सोशल मीडिया के जमाने में भारी प्रशंसा और आकांक्षाओं के दबाव में वह नहीं आएगा और अपना मजबूत प्रदर्शन जारी रखेगा