रांची। हेमंत सरकार की ताजा नियोजन नीति के खिलाफ सत्ताधारी दल झामुमो के गढ़ संताल परगना और कोल्हान में युवाओं का आंदोलन तेज हो रहा है। नियोजन नीति और 60:40 के आरक्षण फार्मूले के विरोध में शनिवार को संताल परगना के छह जिलों में बंद से आम जनजीवन प्रभावित रहा। शनिवार को बंद का सबसे ज्यादा असर झारखंड की उप राजधानी दुमका और साहिबगंज में देखने को मिला।
हजारों की संख्या में छात्र सुबह से ही सड़कों पर उतर आये और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बंद को सफल बनाने में जुट गये। बाजार को बंद कराया। दुमका में बस स्टैंड से एक भी बस नहीं खुली। बाजार पूरी तरह बंद रहे। निजी वाहनों का परिचालन भी बुरी तरह प्रभावित रहा। छात्र सड़क जाम कर रोड पर बैठ गये। गोड्डा और पाकुड़ में भी बंद का असर दिखा। देवघर में बंद का प्रभाव थोड़ा कम दिखा। 60:40 आरक्षण नाय चलतो के नारे से लगाते रहे।
संताल के छह जिले यानी दुमका, पाकुड़, देवघर, साहिबगंज, पाकुड़ और गोड्डा में बंद का कॉल दिया गया था। 1932 के खतियान आधारित नियोजन नीति बनाने और 60:40 के आरक्षण नीति को रद करने को लेकर छात्र समन्वय समिति ने एक अप्रैल को बंद का कॉल दिया था। वहीं तीन अप्रैल को कोल्हान के सरायकेला खरसावां जिले में विरोध मार्च का निर्णय किया गया है। यह भी चेतावनी दी गई है कि जल्द सरकार ने निर्णय नहीं किया तो राज्य स्तर पर आंदोलन चलाया जायेगा।
गोड्डा में भी आंदोलनकारी छात्रों ने सुबह में ही कारगिल चौक से गोड्डा कॉलेज चौक तक मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। छात्रों का कहना है कि बाहरी को 40 फीसद आरक्षण देना अनुचित है। इस क्रम में दोपहर ने पुलिस प्रशासन ने करीब ढाई सौ आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया जिन्हें शाम में छोड़ दिया गया। इधर मूलवासी सदान मोर्चा ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए दुमका में रोस्टर में ओबीसी के आरक्षण को शून्य किये जाने का विरोध किया है। मोर्चा ने दुमको में चार अप्रैल को नुक्कड़ सभा और पांच अप्रैल को मशाल जुलूस निकालने का एलान किया है।
बता दें कि संताल और कोल्हान के ही इलाके हैं जहां बीते विधानसभा चुनाव में झामुमो ने अपना झंडा गाड़ते हुए भाजपा का सूपड़ा साफ कर दिया था। संताल के साहिबगंज और दुमका का ही इलाका है जहां से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनके भाई बसंत सोरेन और भाभी सीता सोरेन विधायक हैं। नियोजन नीति और 60:40 आरक्षण, यानी 40 प्रतिशत बाहरी को आरक्षण के सवाल पर विधानसभा के बजट सत्र में विपक्ष ने जमकर हंगामा किया और कई दिनों तक सदन की कार्यवाही बुरी तरह बाधित रही।