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जानिए 2जी मामले का पूरा घटनाक्रम

मई 2007- डीएमके के ए राजा यूपीए सरकार में संचार मंत्री बने अगस्त 2007- संचार विभाग (डॉट) द्वारा अमेरिकी...
जानिए 2जी मामले का पूरा घटनाक्रम

मई 2007- डीएमके के ए राजा यूपीए सरकार में संचार मंत्री बने

अगस्त 2007- संचार विभाग (डॉट) द्वारा अमेरिकी लाइसेंस के साथ 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया शुरू।

25 सितंबर- संचार मंत्रालय ने प्रेस नोट जारी किया और आवेदन के लिए एक अक्टूबर 2007 की आखिरी तारीख तय की।

1 अक्टूबर 2007- डॉट को 46 कंपनियों से 575 आवेदन प्राप्त हुए

2 नवंबर 2007- प्रधानमंत्री मनमोहन सिह ने राजा को पत्र लिखकर निष्पक्ष आवंटन सुनिश्चित करने को कहा।

22 नवंबर 2007- वित्त मंत्रालय ने डॉट को पत्र लिखकर अपनाई गई प्रक्रिया के प्रति चिंता जताई।

2008- स्वान टेलीकॉम, यूनिटेक और टाटा टेलीसर्विसेज ने अपनी हिस्सेदारी काफी ऊंची कीमत पर क्रमशः एतिसलात, टेलीनॉर और डोकोमोको को बेची।

जनवरी 2008- डॉट ने पहले आओ पहले पाओ नीति के तहत लाइसेंस देने का फैसला किया और आखिरी तारीख बढ़कार एक अक्टूबर कर दी। इस दिन डॉट ने कहा कि जिन्होंने 3.30 बजे से 4.30 बजे तक आवेदन किया है उन्हें लाइसेंस दिया जाएगा।

4 मई 2009- एनजीओ टेलीकॉम वाचडॉग ने सीवीसी से लूप टेलीकॉम को स्पेक्ट्रम आवंटित करने में अनियमितता की शिकायत की। सीवीसी ने सीबीआइ से इसकी जांच करने को कहा।

एक जुलाई 2009- दिल्ली हाइकोर्ट ने आखिरी तारीख में बदलाव को गलत कहा।

21 अक्टूबर 2009- सीबीआइ ने डॉट के अज्ञात अधिकारियों और अज्ञात निजी व्यक्तियों/कंपनियों और अन्य के खिलाफ एफआइआर दर्ज की।

22 अक्टूबर 2009- सीबीआइ ने डॉट के कार्यालयों में छापे मारे।

20 नवंबर 2009- सूचना एवं प्रौद्योगिकी (आइटी) विभाग से मिली जानकारी के अनुसार साफ हुआ कि कॉरपोरेट प्लेयर्स की नीतियों को प्रभावित करने में भूमिका रही है। नीरा राडिया राजा से सीधे संपर्क में थी।

31 मार्च 2010- कैग की रिपोर्ट में कहा गया कि लाइसेंस जारी करने की पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता का अभाव था।

13 सितंबर 2010- सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और राजा को 2008 में टेलीकॉम लाइसेंस आवंटन में 70,000 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप वाली तीन याचिकाओं पर दस दिन में जवाब देने को कहा।

27 सितंबर 2010- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जिन कंपनियों के पर फेमा के उल्लंघन का शक है उन पर चल रही जांच के बारे में सुप्रीम कोर्ट को बताया। यह कहा गया कि राजा के संलिप्तता के बारे न तो पुष्टि की जा सकती है ना ही इनकार।

10 नवंबर 2010- कैग ने 2जी मामले में दाखिल रिपोर्ट में  सरकारी कोष में 1.76 लाख करोड़ रुपये के घाटे की बात कही।

14-15 नवंबर 2010- राजा ने संचार मंत्री के पद से इस्तीफा दिया। कपिल सिब्बल को दूरसंचार मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार।

दो फरवरी 2011- राजा को सीबीआइ ने गिरफ्तार किया

10 फरवरी 2011- सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ से उन कॉरपोरेट घरानों की जांच करने के लिए कहा जो 2जी स्पेक्ट्रम के लाभार्थी थे।

दो अप्रैल 2011- सीबीआइ ने पहला आरोपपत्र दाखिल किया। इसमें राजा, उनके निजी सचिव आरके चंदोलिया, पूर्व दूरसंचार सचिव, सिद्धार्थ बेहुरा समेत कॉरपोरेट अधिकारियों के नाम थे।

25 अप्रैल 2011- सीबीआइ ने दूसरा आरोपपत्र दाखिल किया जिसमें द्रमुक अध्यक्ष एम करुणानिधि की बेटी और सांसद कनिमोझी के अलावा चार नाम थे।

23 अक्टूबर 2011- सभी 17 आरोपियों पर आरोप तय।

11 नवंबर 2011- ट्रायल शुरू।

12 दिसंबर 2011- सीबीआइ ने तीसरा आरोपपत्र दाखिल किया। इसमें एस्सार ग्रुप के प्रोमोटर अंशुमान और रवि रुइया, लूप टेलीकॉम के प्रोमोटर किरण खेतान, उनके पति आइपी खेतान और अन्य अधिकारियों के नाम थे।

दो फरवरी 2012- सुप्रीम कोर्ट ने राजा के कार्यकाल में जारी 122 लाइसेंसों को रद्द किया और चार महीने में लाइसेंस जारी करने के लिए नीलामी का निर्देश दिया।

नौ दिसंबर 2013- विरोध के बाद भी 2जी पर जेपीसी की रिपोर्ट लोकसभा में पेश की गई।

19 अप्रैल 2017- विशेष अदालत ने सुनवाई पूरी की।

21 दिसंबर 2017- ए राजा, कनिमोझी समेत सभी आरोपी विशेष अदालत से बरी किए गए।

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