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UNGA में PM मोदी बोले- अफगानिस्तान की धरती का न हो आतंकी हमलों के लिए इस्तेमाल, रहना होगा सतर्क

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76 वें सत्र को संबोधित किया।...
UNGA में PM मोदी बोले- अफगानिस्तान की धरती का न हो आतंकी हमलों के लिए इस्तेमाल, रहना होगा सतर्क

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76 वें सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा, ये सुनिश्चित किया जाना बहुत जरूरी है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने और आतंकी हमलों के लिए ना हो। हमें इस बात के लिए भी सतर्क रहना होगा वहां कि नाजुक स्थितियों का इस्तेमाल कोई देश अपने स्वार्थ के लिए एक टूल की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश ना करें। आतंकवाद को हर हाल में रोकना ही होगा। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इसके लिए एक सुर में आवाज उठानी होगी।

पीएम ने कहा कि प्रतिगामी सोच के साथ, जो देश आतंकवाद का राजनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें ये समझना होगा कि आतंकवाद, उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने चरमपंथ का खतरा बढ़ता जा रहा है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्रगतिवादी सोच को बढ़ाना जरूरी हो गया है। 

पीएम मोदी ने चीन का नाम लिए बिना कहा, हमारे समुद्र भी हमारी साझी विरासत है इसलिए हमें ये ध्यान रखना होगा कि ओसियन रिसोर्सेज को हम यूज करें अब्यूज नहीं। हमारे समंदर अंतरराष्ट्रीय व्यापार की लाइफलाइन भी है। इन्हें हमें एक्सपैंशन और एक्सक्लूज़न की दौड़ से बचाकर रखना होगा।

प्रधानमंत्री ने अफगानिस्तान को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि इस समय अफागानिस्तान की जनता को. वहां की महिलाओं और बच्चों को, वहां के अल्पसंख्यकों को मदद की ज़रूरत है और इसमें हमें अपना दायित्व निभाना ही होगा।

पीएम ने कहा कि ये आवश्यक है कि हम संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक ऑर्डर, वैश्विक वैश्विक कानूनों, और वैश्निक मूल्यों  के संरक्षण के लिए निरंतर सुदृढ़ करें। भारत के महान कूटनीतिज्ञ, आचार्य चाणक्य ने सदियों पहले कहा था कालाति क्रमात काल एव फलम् पिबति. जब सही समय पर सही कार्य नहीं किया जाता, तो समय ही उस कार्य की सफलता को समाप्त कर देता है। संयुक्त राष्ट्र को खुद को प्रासंगिक बनाए रखना है तो उसे अपनी प्रभावशीलता सुधारना होगा, विश्वसनीयता को बढ़ाना होगा।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र पर आज कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। इन सवालों को हमने जलवायु संकट में देखा है, कोरोना काल के दौरान देखा है। दुनिया के कई हिस्सों में चल रही प्रॉक्सी वॉर, आतंकवाद और अभी अफगानिस्तान संकट ने इन सवालों को और गहरा कर दिया है।

पीएम मोदी ने कहा, गत डेढ़ वर्ष से पूरा विश्व, 100 साल में आई सबसे बड़ी महामारी का सामना कर रहा है। ऐसी भयंकर महामारी में जीवन गंवाने वाले सभी लोगों को मैं श्रद्धांजलि देता हूं और परिवारों के साथ अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं।

पीएम ने कहा, भारत का वैक्सीन डिलीवरी प्लेटफॉर्म कोवीन एक ही दिन में करोड़ों वैक्सीन डोज लगाने के लिए डिजीटल सहायता दे रहा है। मैं ये जानकारी देना चाहता हूं कि भारत ने दुनिया की पहली डीएनए वैक्सीन विकसीत विकसीत कर ली है जिसे 12 साल से ज्यादा आयु के सभी लोगों को लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा, मैं आज दुनिया भर के वैक्सीन मैन्युफैक्चर्स को भी आमंत्रित करता हूं कि आइए और भारत में वैक्सीन बनाइए।

पीएम मोदी ने कहा, हमारी विविधता, हमारे सशक्त लोकतंत्र की पहचान है. एक ऐसा देश जिसमें दर्जनों भाषाएं हैं, सैकड़ों बोलियां हैं, अलग-अलग रहन सहन, खान-पान है। ये वाइब्रेंट डेमोक्रेसी का उदाहरण है। ये भारत के लोकतंत्र की ताकत है कि एक छोटा बच्चा जो कभी एक रेलवे स्टेशन की टी स्टॉल पर अपने पिता की मदद करता था वो आज चौथी बार भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर यूएनजीए को संबोधित कर रहा है।

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