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फिर खुलेगा आरुषी-हमेराज मर्डर केस, सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

डाक्टर दम्पत्ति राजेश तलवार और नूपूर तलवार को बरी करने का इलाहाबाद हाईकोर्ट सही है या नहीं, इसका फैसला...
फिर खुलेगा आरुषी-हमेराज मर्डर केस, सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

डाक्टर दम्पत्ति राजेश तलवार और नूपूर तलवार को बरी करने का इलाहाबाद हाईकोर्ट सही है या नहीं, इसका फैसला सुप्रीम कोर्ट करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने हेमराज की पत्नी खुमकला बेंजाडे की याचिका मंजूर करते हुए नोटिस जारी किया है। सीबीआई ने भी याचिका दाखिल की है लेकिन उसमें कुछ खामियां हैं।  

पिछले साल दिसंबर में तलवार दंपति को बरी करने के फैसले के खिलाफ हेमराज की पत्नी ने  भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हेमराज की पत्नी खुमकला बेंजाडे ने याचिका में कहा है कि इस बारे में 12 अक्तूबर 2017 को हाईकोर्ट ने फैसला पटल दिया था जो गलत है क्योंकि हाईकोर्ट ने इसे हत्या तो माना है लेकिन किसी को दोषी नहीं ठहराया। इसका मतलब ये है कि दोनों को किसी ने नहीं मारा, ऐसे में जांच एजेंसी की ड्यूटी  है कि वो हत्यारों का पता लगाए।  इस याचिका में ये भी कहा गया है कि हाईकोर्ट आखिरी बार देखे जाने की थ्योरी पर विचार करने में नाकाम रहा है जबकि इस बात के ठोस सबूत थे कि एल-32 जलवायु विहार में नूपुर  तलवार और राजेश तलवार मरने वालों के साथ ही मौजूद थे। इसकी पुष्टि के लिए उनके ड्राइवर उमेश शर्मा ने कोर्ट के सामने बयान भी दिए।

बता दें कि  विशेष सीबीआई जज एस लाल की कोर्ट  ने नवंबर 2013  में डॉ. राजेश तलवार और डॉ. नूपुर तलवार को उम्रकैद की सजा सुनाई। इस मामले में सबूतों को मिटाने के लिए तलवार दंपति को पांच वर्ष की अतिरिक्त सजा व गलत सूचना देने के लिए राजेश तलवार को एक साल की अतिरिक्त सजा सुनाई थी। इसी मामले में सजा के खिलाफ दंपत्ति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की।  नोएडा के आरुषि- हेमराज हत्याकांड मामले में सीबीआई ने भी तलवार दंपति को बरी करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सीबीआई ने कहा है कि हाईकोर्ट का फैसले में गलतियां की गई हैं। सीबीआई ने कहा है कि जिन परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर निचली अदालत ने फैसला दिया था उन्हें अनदेखा नही किया जा सकता।

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