नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) तीन आतंकियों के साथ पकड़े गए जम्मू-कश्मीर के डीएसपी देवेंद्र सिंह मामले की जांच करेगी। इसकी जानकारी एनआईए ने शनिवार को दी है। सिंह को पुलिस उपाधीक्षक के रूप में तैनात किया गया था, जिसे पिछले सप्ताह प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के जिला कमांडर नवीद बाबू सहित हाल ही में शामिल हुए आतिफ और एक वकील इरफान मीर के साथ गिरफ्तार किया गया था।
इन चारों को हथियार और गोला-बारूद के साथ पकड़ा गया था, जब वे दक्षिणी कश्मीर में राष्ट्रीय राजमार्ग पर काजीगुंड के पास एक कार में जा रहे थे।
गृह मंत्रालय ने दिया था आदेश
केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने 14 जनवरी को इस मामले की जांच एनआईए के जिम्मे सौंपने की जानकारी दी थी। मंत्रालय से आदेश मिलने के बाद जांच एजेंसी ने मामले को दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
एनआईए के जिम्मे मिली जांच के साथ ही राजनीति हुई तेज
आतंकियों के साथ गिरफ्तार हुए देवेंद्र सिंह मामले की जांच एनआईए द्वारा किए जाने पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए 17 जनवरी को ट्वीट कर कहा था, ‘आतंकी डीएसपी देवेंद्र सिंह को चुप कराने का सबसे अच्छा तरीका है, मामले की जांच को एनआईए को सौंप देना। एनआईए के मुखिया एक और मोदी हैं- वाई के मोदी, जिन्होंने गुजरात दंगे और हरेन पांड्या की मर्डर की जांच की थी’। वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस मामले पर ट्वीट करते हुए कहा था, ‘डीएसपी की गिरफ्तारी से परेशान करने वाले सवाल खड़े हुए हैं जो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह बहुत अजीब लगता है कि वह न सिर्फ शिनाख्त किए जाने से बचा, बल्कि वह मौजूदा हालात में जम्मू-कश्मीर में विदेशी राजनयिकों के दौरे के समय उनके साथ रहने जैसे महत्वूपर्ण संवेदनशील ड्यूटी में लगाया गया। इस मामले की पूरी जांच होनी चाहिए। भारत के खिलाफ आतंकी हमले के षड्यंत्र में मदद करना देशद्रोह है’।
अफजल गुरु ने भी लगाए थे कई आरोप
13 दिसंबर 2001 को हुए संसद हमले का दोषी अफजल गुरु ने 2013 में लिखी गई एक चिट्ठी में देवेंद्र सिंह पर कई आरोप लगाए गए थे। हालांकि, इन आरोपों की जांच की गई थी लेकिन सबूत के साथ इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई थी। हमले का मास्ट रमाइंड अफजल को 9 फरवरी 2013 को फांसी दी गई थी। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में ही फांसी की सजा सुनाई थी।