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नेपाल की स्वायत्ता में भारत का कोई हस्तक्षेप नहीं: सुषमा स्वराज

नेपाल की स्वायत्तता में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप से इंकार करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सोमवार को कहा है कि उन्होंने पड़ोसी देश के विदेश मंत्री तथा मधेसी नेताओं को परस्पर वार्ता के जरिए स्थिति का समाधान खोजने की सलाह दी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक हफ्ते में स्थिति में सुधार होगा और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति बहाल हो जाएगी। साथ ही उन्होंने नेपाल में संसदीय दल भेजने पर भी सहमति जताई।
नेपाल की स्वायत्ता में भारत का कोई हस्तक्षेप नहीं: सुषमा स्वराज

भारत नेपाल संबंधों के बारे में राज्यसभा में हुई अल्पकालिक चर्चा का जवाब देते हुए सुषमा ने इस बात का कड़ाई से इंकार किया कि भारत ने नाकेबंदी कर रखी है। उन्होंने कहा कि नेपाल सीमा पर मधेसियों ने नाकेबंदी की है और हमारे 11206 ट्रक सीमा पर सामान लेकर खड़े हैं। सुषमा ने कहा कि कुछ नाकों से नेपाल में सामान भेजा जा रहा है और उनके जरिये 864 ट्रक पिछले हफ्ते ही भेजे गए। उन्होंने कहा कि हमने नेपाल को दवाओं से लदे 400 ट्रक भेजे हैं। भारत द्वारा नेपाल को आवश्यक दवाएं नहीं देने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सुषमा ने कहा कि उन्होंने नेपाल के विदेश मंत्री कमल थापा से कहा था कि वह उन आवश्यक दवाओं की सूची और उसकी मात्रा का ब्यौरा दें जिसे भारत तत्काल वायुमार्ग से भिजवा देगा। उन्होंने कहा कि अभी तक नेपाल की ओर से सूची नहीं सौंपी गई है। सुषमा ने कहा कि भारत ने नेपाल से कहा है कि यदि आवश्यकता पड़े तो वह कंपनियों से सीधे दवा खरीद सकता है और हम यहां उसका भुगतान कर देंगे। नेपाल के प्रति भारत के धौंस जमाने वाले रवैये के आरोपों पर विदेश मंत्री ने कहा कि हमारा रवैया बिग ब्रदर वाला न होकर एल्डर ब्रदर वाला है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार बडा भाई चिंता रखता है और मदद करता है, उसी तरह भारत एल्डर ब्रदर वाला रूख नेपाल के प्रति रखता है। उन्होंने कहा कि हम नेपाल को नुस्खा नहीं बल्कि सलाह देते हैं। यह सलाह एक शुभचिंतक के नाते हैं।

 

कांग्रेस नेताओं मणिशंकर अॉ्यर और रेणुका चौधरी के नरेंद्र मोदी सरकार आने के बाद से नेपाल के साथ संबंध बिगड़ने के आरोपों पर विदेश मंत्री ने कहा कि वह इस मुद्दे को नहीं उठाना चाहती थीं। किन्तु पिछले 17 साल से कोई भारतीय प्रधानमंत्री नेपाल नहीं गया था। इसमें दस साल कांग्रेस का शासन था। इसके अलावा 23 साल से संयुक्त आयोग बैठक (जेसीएम) नहीं हुई जिसमें 17साल कांग्रेस का शासन था। इससे पहले चर्चा में भाग लेते हुए मणिशंकर अय्यर ने यह आरोप लगाया कि यदि वह नेपाल गए तो कहेंगे कि यह नाकेबंदी भारत नहीं मोदी सरकार ने की है। इस आरोप को सरासर गलत बताते हुए सुषमा ने कहा कि यह नाकेबंदी मोदी सरकार ने नहीं मधेसियों ने की है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की ओर से नाकेबंदी मार्च 1989 से जून 1990 तक की गई थी जब राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री थे। उन्होंने नेपाल के मुद्दे पर भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय के बीच तालमेल के अभाव की बात को भी गलत बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जब नेपाल यात्रा पर गए थे तो उन्होंने उसे संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र कहकर संबोधित किया था। उन्होंने कहा कि यह कहना सर्वथा गलत है कि हम नेपाल में राजतंत्र चाहते हैं। नेपाल के नए संविधान की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इससे मधेसियों को गंभीर आपत्ति है और उनका मानना है कि इसमें उनके हितों की पूर्ति नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि इस संविधान में उन प्रावधानों को भी नहीं रखा गया है जो 2007 के अंतरिम संविधान में थे। उन्होंने कहा कि नए संविधान में मधेसियों के वैवाहिक अंगीकृत नागरिकता के प्रावधान को भी खत्म कर दिया गया है।

 

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