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अथ श्री वर्चुअल कथा: कोरोना काल में बाबाओं ने निकाला 'ऑनलाइन भक्ति' का नया तरीका

“कोरोना के कारण धार्मिक आयोजन रुके, तो धर्मगुरुओं का इंटरनेट के सहारे आध्यात्मिक क्रियाकलाप...
अथ श्री वर्चुअल कथा: कोरोना काल में बाबाओं ने निकाला 'ऑनलाइन भक्ति' का नया तरीका

“कोरोना के कारण धार्मिक आयोजन रुके, तो धर्मगुरुओं का इंटरनेट के सहारे आध्यात्मिक क्रियाकलाप जारी”

कोरोना के संकट काल में तमाम तरह से बदलावों के बीच योग और अध्यात्म का स्वरूप भी तेजी से बदला है। कभी नगरों-महानगरों में लगने वाले आध्यात्मिक गुरुओं के भव्य कथा पंडालों और सम्मेलनों में जुटने वाले हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ भी ‘वर्चुअल’ हो गई है। तमाम बड़ी आध्यात्मिक संस्थाएं और उनके प्रमुख इस वर्ष देश-विदेश में पहले से तय अपने कार्यक्रम रद्द कर वर्चुअल मंच पर आ रहे हैं। भारी शुल्क के चलते धार्मिक टीवी चैनलों से दूर रहने वाले कई आध्यात्मिक गुरुओं ने अपने डिजिटल चैनल लांच कर दिए हैं। ‘वर्चुअल’ के आगमन से एक तरफ तो भव्य आयोजनों पर आयोजकों का होने वाला करोड़ों का खर्च बच रहा है, वहीं दूसरी तरफ, आश्रमों के रखरखाव का खर्च जुटाने के लिए इन आध्यात्मिक गुरुओं की संस्थाएं चंदा भी ऑनलाइन मंगा रही हैं।

एक समय दिल्ली के बुराड़ी में लगने वाला निरंकारी संत समागम लाखों श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र होता था। बढ़ती भीड़ के चलते दो-तीन साल से हरियाणा के पानीपत-समालखा जीटी रोड पर 800 एकड़ से अधिक के मैदान में इसका आयोजन होने लगा था। इस बार 73वां वार्षिक निरंकारी संत समागम 5 से 8 दिसंबर तक वर्चुअल होगा। संत निरंकारी मिशन के प्रचार विभाग के संयोजक विवेक मौजी के मुताबिक मिशन की प्रमुख संत सुदीक्षा की अगुआई में समागम का लाइव वेबकास्ट होगा। कोराना के चलते देशभर में स्थित सत्संग भवनों में होने वाले संस्था के साप्ताहिक आयोजन बंद हैं, इसलिए मिशन ने दान के लिए अपनी वेबसाइट पर ऑनलाइन लिंक दिया है।

राधास्वामी सत्संग डेरा ब्यास के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने फरवरी 2021 तक संस्था के तमाम आयोजन बंद रखने के निर्देश दिए हैं। डेरा के कई सत्संग घरों में क्वारंटीन सेंटर बनाए गए हैं। हालांकि राधास्वामी डेरा ने कोरोना काल में कोई विशेष वर्चुअल आयोजन नहीं किया है, पर सत्संग घरों की देखभाल का खर्च उठाने के लिए ऑनलाइन दान लिया जा रहा है।

रामचरित मानस कथाओं में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटाने वाले कथा वाचक मुरारी बापू ने कारोना काल में भी अपनी कथा को विराम नहीं दिया। टीवी और यू-ट्यूब चैनल पर उनका कथा वाचन जारी है। पंजाब के जालंधर में बापू के श्रद्धालु शीतल विज के मुताबिक 14 वर्ष की आयु में मुरारी बापू ने गुजरात के भावनगर स्थित अपने पैतृक गांव तलगाजरडा के वन में वट वृक्ष के तले तीन चरवाहों के बीच रामकथा की शुरुआत की थी, उसी त्रिभुवन वट (मुरारी बापू के दादा के नाम पर) वृक्ष के नीचे इस साल जून में नौ दिवसीय ऑनलाइन रामकथा की शुरुआत की गई।

दिल्ली के रामलीला मैदान में 49 वर्षों से मानव उत्थान सेवा समिति की तरफ से नवंबर में आयोजित होने वाले सालाना सद्भावना सम्मेलन को जियो टीवी ने इस बार वर्चुअल रूप दिया। उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री एवं आध्यात्मिक गुरु सतपाल महाराज के संरक्षण में चलने वाली इस संस्था ने 8 नवंबर से अपना विशेष चैनल जियो टीवी के मंच पर लांच किया है। मानव उत्थान सेवा समिति की पंजाब एवं हरियाणा इकाई के अध्यक्ष ओमप्रकाश अग्रवाल ने आउटलुक को बताया कि मार्च से ही देश-विदेश में संस्था के 5,000 से अधिक आश्रमों में आयोजन बंद हैं, इसलिए सभी गतिविधियां ऑनलाइन हो गई हैं। देश में संस्था के सालाना 30 से अधिक सद्भावना सम्मेलन होते थे। उनकी जगह इस साल अप्रैल में बैसाखी के अवसर पर जूम के जरिए शुरू हुए वर्चुअल सम्मेलनों में हजारों श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।

भागवत कथा वाचक रमेश भाई ओझा की संस्था ‘संदीपनी’ देश-विदेश में बड़े आयोजन करती थी, लेकिन उसे भी सब रद्द करना पड़ा। संस्था ने कोरोना संकट को देखते हुए कथा आयोजनों को गुजरात के मंदिरों तक सीमित कर दिया और यू-ट्यूब तथा टीवी चैनल की मदद से लाइव प्रसारण बढ़ा दिया है। सुधांशु महाराज की विश्व जागृति मिशन संस्था भी देश के कई शहरों में यू-ट्यूब और धार्मिक टीवी चैनल के जरिए ऑनलाइन सत्संग आयोजित कर रही है। इन्हें ‘ऑनलाइन भक्ति सत्संग’ का नाम दिया गया है।

कोरोना महामारी के चलते तमाम प्रतिबंधों के बीच तिब्बतियों के आध्यात्मिक गुरु चौदहवें दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो का 6 जुलाई को 85वां जन्‍म दिन ऑनलाइन मनाया गया। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित केंद्रीय तिब्बत प्रशासन के अध्यक्ष डॉ. लोबसांग सांगेय के मुताबिक इस साल मनाए जा रहे लामा के अवतरण दिवस समारोहों में कोई कमी नहीं आएगी। उनके अनुयायियों ने एक जुलाई से ‘ईयर ऑफ ग्रेटिट्यूड’ यानि आभार वर्ष के रूप में समर्पित करने के लिए वैश्विक समारोह की शुरुआत की है। सांगेय ने बताया कि 30 जून 2021 तक पूरे विश्व में कई ऑनलाइन वर्चुअल कार्यक्रम आयोजित होंगे।

योग गुरु बाबा रामदेव के इंग्लैंड स्थित पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के इस साल मई से तमाम आयोजन ऑनलाइन कर दिए गए। एक मई से जूम और फेसबुक पर योग कक्षाएं ऑनलाइन शुरू की गईं। 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रामदेव ने अमेरिका में ‘योग फ्रॉम होम’ थीम पर योग का वर्चुअल सत्र आयोजित किया। इसका सीधा प्रसारण वॉशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास से अमेरिका में भारत के राजदूत तरणजीत सिंह संधू की मौजूदगी में हुआ। इंग्लैंड में 15 नवंबर को पतंजलि परिवार मिलन समारोह भी ऑनलाइन होना है।

श्री श्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग ने बेंगलूरू से नौ दिनों तक नवरात्रि समारोहों का यू-ट्यूब और फेसबुक से ऑनलाइन लाइव प्रसारण किया। ऑर्ट ऑफ लिविंग के प्रवक्ता अशोक खन्ना के मुताबिक कोरोना के दिनों में श्री श्री के सत्संग की सीडी और आध्यात्मिक साहित्य की ऑनलाइऩ बिक्री में भारी उछाल आया है। ऑनलाइन सत्संग और योग कक्षाएं भी जारी हैं।

इन दिनों सुबह साढ़े सात बजे अंग्रेजी, हिंदी, तमिल, कन्नड़ और तेलुगू में शुरू हुए सदगुरु वासुदेव जग्गी के ऑनलाइन सत्संग को उनकी संस्था ईशा फाउंडेशन ने केवल उन्हीं श्रद्धालुओं के लिए खोला है, जिन्हें शम्भवी महामुद्रा क्रिया में दीक्षित किया गया है। श्रद्धालु खाली पेट इस वर्चुअल सत्संग में शामिल होते हैं और उन्हें अपने समक्ष सदगुरु की तस्वीर रखकर उसके आगे एक दीया जलाकर रखना होता है। संस्था ने इनर इंजीनियरिंग ऑनलाइन आध्यात्मिक कोर्स भी शुरू किया है, जिसके लिए फीस ली जा रही है।

ऑनलाइन भक्ति से वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर बढ़े ट्रैफिक ने यू-ट्यूब और अन्य डिजिटल चैनल का राजस्व भी बढ़ा दिया है। कंसल्टेंसी फर्म केपीएमजी के मुताबिक कोरोना काल में इंटरनेट का प्रयोग 70 फीसदी और लाइव स्ट्रीमिंग 52 फीसदी तक बढ़ी है। फिलहाल ऑनलाइन भक्ति का चलन भले उभार पर हो, लेकिन माना जा रहा है कि कोरोना का भय कम होने के साथ इसमें भी कमी आएगी और श्रद्धालु एक बार फिर अपने गुरुओं का वाचन सीधे सुनना पसंद करेंगे।

 

 

 

 

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