भारत की वृद्धि दर कर उपायों व निरंतर मौद्रिक सहजता के दम पर चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 6.5 प्रतिशत रहेगी जो कि जी-20 देशों में सबसे अधिक होगी। साथ ही देश पूंजी आकर्षित करना जारी रखेगा और किसी भी विदेशी निकासी को झेल सकेगा।
रेटिंग एजेंसी ने साथ ही भारत में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 6.5 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो 2024-25 में 6.7 प्रतिशत से कम है। उसने मुद्रास्फीति के औसतन 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया, जो गत वित्त वर्ष में 4.9 प्रतिशत थी।
मूडीज ने साथ ही कहा कि अमेरिकी नीतियों में अनिश्चितता से पूंजी निकासी का जोखिम बढ़ेगा, लेकिन भारत तथा ब्राजील जैसे बड़े उभरते बाजार अपनी बड़ी और घरेलू रूप से उन्मुख अर्थव्यवस्थाओं, बड़े घरेलू पूंजी बाजारों, मध्यम नीति विश्वसनीयता व पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार के दम पर ऐसी परिस्थितियों में वैश्विक पूंजी को आकर्षित करने और बनाए रखने के लिए बेहतर स्थिति में हैं।
रिपोर्ट में कहा गया, उभरते बाजारों की वृद्धि 2025-26 में कुल मिलाकर धीमी लेकिन दृढ़ रहेगी, जिसमें प्रत्येक देश की स्थिति के अनुरूप व्यापक अंतर होगा। एशिया-प्रशांत में वृद्धि सबसे अधिक रहेगी, लेकिन वैश्विक व्यापार में इस क्षेत्र के एकीकरण का मतलब है कि यह अमेरिकी शुल्क और वृद्धि को धीमा करने की उनकी क्षमता के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील है।
जी20 अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग का एक प्रमुख मंच है जिसके 20 सदस्य देश हैं।