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उन्नाव रेप केस की पीड़िता के चाचा बोले, ‘पहले दर्ज होती एफआईआर तो जिंदा होता मेरा भाई’

उन्नाव गैंगरेप मामले में योगी सरकार पर चौतरफा दबाव के बाद अब आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उसके...
उन्नाव रेप केस की पीड़िता के चाचा बोले, ‘पहले दर्ज होती एफआईआर तो जिंदा होता मेरा भाई’

उन्नाव गैंगरेप मामले में योगी सरकार पर चौतरफा दबाव के बाद अब आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उसके साथियों पर प्राथमिकी दर्ज हो गई है। वहीं इस मामले को सीबीआई के हवाले भी कर दिया गया है।

एफआईआर दर्ज होने की बाद पीड़िता के चाचा ने कहा कि अगर ये ही एफआईआर पहले दर्ज होती तो शायद उनके भाई जिंदा होते। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक उन्होंने कहा, “हम खुश हैं कि आखिरकार कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, यह बहुत पहले किया गया होता तो मेरे भाई (पीडि़ता के पिता) आज जिंदा होते। फिर भी, यह देखते हैं कि उसे गिरफ्तार किया जाएगा या नहीं।”

उन्नाव से भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर बलात्कार का मामला दर्ज हुआ है। पीड़िता की मां की तहरीर पर उन्नाव के माखी थाने में ये केस दर्ज हुआ है। माखी थाने में आईपीसी की धारा 363, 366, 376, 506 और पास्को एक्ट में मुकदमा दर्ज हुआ। इस एफआईआर में विधायक कुलदीप सिंह के साथ उनके भाई शशि सिंह को भी नामजद किया गया है।

मामला सीबीआई के हवाले

गृह विभाग के सचिव अरविंद कुमार ने मामले को सीबीआई को सौंपने की जानकारी दी। मामले में विधायक की गिरफ्तारी को लेकर सूबे के डीजीपी ने एएनआई से कहा कि कोई भी आरोपी विधायक का बचाव नहीं कर रहा है। हम सभी कह रहे हैं कि हमें दोनों पक्षों को सुनना होगा। अब मामला सीबीआई को दिया गया है, वह गिरफ्तारी पर फैसला करेगी।

क्या है मामला?

उन्नाव जिले की एक युवती भाजपा के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर बलात्कार का आरोप लगा रही है। मामला पिछले साल 4 जून, 17 का बताया है। जब युवती की मां ने विधायक कुलदीप सिंह सेंगर सहित कुछ लोगों के खिलाफ रेप की शिकायत की थी। हाल ही में जब बीते 3 अप्रैल को विधायक के भाई अतुल ने मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया, तब 8 अप्रैल (रविवार) को पीड़िता ने परिवार समेत मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया था। 9 अप्रैल को पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत हो गई। अब इस मामले में विधायक के खिलाफ एफआईआर हो गई है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने मामले को सीबीआई को सौंपने का निर्णय लिया है।

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