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SC के फैसले के बाद बोले ओवैसी, विवाहेतर संबंध अपराध नहीं तो फिर तीन तलाक कैसे?

गुरुवार को एडल्टरी कानून पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद राजनीति शुरू हो गई है। इस पर एआईएमआईएम...
SC के फैसले के बाद बोले ओवैसी, विवाहेतर संबंध अपराध नहीं तो फिर तीन तलाक कैसे?

गुरुवार को एडल्टरी कानून पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद राजनीति शुरू हो गई है। इस पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट कर तीन तलाक पर लाए गए अध्यादेश को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा, 'क्या मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सबक लेते हुए तीन तलाक पर अपने असंवैधानिक अध्यादेश को वापस लेगी?'

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एडल्टरी (विवाहेतर संबंध) को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया। कोर्ट ने एडल्टरी या व्यभिचार मामले में आईपीसी की धारा 497 को असंवैधानिक करार दिया।

‘एडल्टरी कानून पर आए फैसले से क्या मोदी सरकार सीखेगी

एडल्टरी कानून पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करते हुए ओवैसी ने ट्वीट किया कि, सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक नहीं कहा है जबकि शीर्ष कोर्ट ने 377 और 497 को असंवैधानिक करार दिया। क्या मोदी सरकार इन फैसलों से सीखेगी और तीन तलाक पर अपने असंवैधानिक अध्यादेश को वापस लेगी?

'क्या इंसाफ है मित्रों... बीजेपी क्या करेगी'

ओवैसी यहीं नहीं रुके उन्हें एक और ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने लिखा कि धारा 377 और धारा 497 अब अपराध नहीं है लेकिन तीन तलाक को अपराध माना गया है। क्या इंसाफ है मित्रों... बीजेपी क्या करेगी।

अध्यादेश को बताया फ्रॉड, देंगे चुनौती?

न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक, ओवैसी ने कहा कि उनकी राय में तीन तलाक अध्यादेश को कोर्ट में चुनौती दी जानी चाहिए क्योंकि यह एक फ्रॉड है। उन्होंने कहा, 'अध्यादेश के पहले पेज में सरकार कहती है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार दिया है जबकि SC ने ऐसा कुछ नहीं कहा है।'

जानें आज सुप्रीम कोर्ट ने क्या सुनाया फैसला

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने एक मत से सुनाए गए फैसले में दो बालिगों के बीच सहमति से बनाए गए समलैंगिक संबंधों को अपराध मानने वाली धारा 377 के प्रावधान को खत्म कर दिया है। अब ओवैसी ने 377 और 497 पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही आधार बनाकर सरकार पर निशाना साधा है।

हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट ने एक बार में तीन तलाक को दंडनीय अपराध बनाने के अध्यादेश को मंजूरी दी थी, जिस पर राष्ट्रपति ने भी मुहर लगा दी है। अब सरकार को 6 महीने में इस बिल को संसद में पास कराना होगा।

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