कई दिनों तक चले सियासी ड्रामें के बाद बीएस येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला को उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
कर्नाटक में बहुमत जुटाने की सारी कोशिशें विफल रहने के बाद मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने विश्वास मत हासिल करने से पहले ही इस्तीफा देने की घोषणा कर दी थी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि कहा कि मैं विश्वास मत का सामना नहीं करूंगा और इस्तीफा देने जा रहा हूं। उनके इस्तीफा देते के साथ ही कर्नाटक में भाजपा की तीन दिन पुरानी सरकार गिर गई।
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-कर्नाटक में भाजपा की कोशिशें नाकाम, भावुक भाषण देकर येदियुरप्पा ने दिया इस्तीफा
-मेरे पास 104 विधायक हैं। जनादेश कांग्रेस और जेडीएस के खिलाफ गया है दोनों का गठबंधन अवसरवादिता है। जनादेश के खिलाफ दोनों एक हो गए।
-मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने कहा कि लोगों ने हमें सराहा। लोगों ने हमें बड़े प्यार से चुना है।
-येदियुरप्पा ने बोलना शुरू किया
-बहुमत परीक्षण में विधायकों को अनुपस्थित कराने की योजना फेल, 111 का आंकड़ा जुटाना मुश्किल
भाजपा को बड़ा झटका तब लगा जब कांग्रेस के गायब विधायक सदन में आ गए। ऐसे में येदियुरप्पा की राह और कठिन हाो गया । बता दें कि कर्नाटक विधानसभा में 222 सीटों के लिए चुनाव हुए हैं। बीजेपी के 104 विधायक जीतकर आए हैं। जेडीएस के 37 और कांग्रेस के 78 विधायक और 3 अन्य दलों के विधायक जीत कर आए हैं। येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए 8 अतिरिक्त विधायकों की जरूरत पड़ सकती थी। हालांकि जेडीएस के कुमारस्वामी दो सीटों से जीतकर विधायक बने हैं। ऐसे में उन्हें एक सीट से इस्तीफा देना पड़ेगा। साथ ही एक प्रोटेम स्पिकर के एक वोट को कम करें तो ऐसी हालत में 220 सीट के लिहाज से भाजपा को बहुमत साबित करने के लिए लगभग 111 सीटों की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में बहुमत का आंकड़ा भाजपा के पक्ष में नहीं दिख रहा था।