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शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन अवसरवादी, ज्यादा दिन नहीं चल पाएगी सरकारः गडकरी

महाराष्ट्र में कांग्रेस, शिवेसना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के बीच गठबंधन को भाजपा नेता...
शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन अवसरवादी, ज्यादा दिन नहीं चल पाएगी सरकारः गडकरी

महाराष्ट्र में कांग्रेस, शिवेसना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के बीच गठबंधन को भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अवसरवादी गठबंधन करार दिया है। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि वैचारिक तालमेल ना होने के कारण यह गठबंधन टिकेगा नहीं और अगर वे महाराष्ट्र में सरकार बनाते हैं, तो यह छह से आठ महीने से ज्यादा नहीं चलेगी।

गठबंधन पर टिप्पणी करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, 'इनके बीच वैचारिक तालमेल नहीं है। शिवसेना जिस विचारधारा पर चलती है, कांग्रेस उसका पूरी तरह से विरोध करती है। कांग्रेस जिस विचारधारा पर चलती है, उसका शिवसेना विरोध करती है। एनसीपी भी शिवसेना के विचारों से तालमेल नहीं रखती है।'

'भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए हुए एकजुट'

उन्होंने कहा कि इन "वैचारिक रूप से अलग" पार्टियों के गठबंधन का आधार अवसरवाद है, जो भाजपा को सत्ता से दूर रखने के एकमात्र मकसद के साथ तीनों दल एकजुट हो गए हैं। यह महाराष्ट्र में स्थिर सरकार नहीं दे पाएगा। मुझे संदेह है कि यह सरकार बनेगी। भले ही यह सरकार बने लेकिन छह से आठ महीने से ज्यादा नहीं चलेगी।

'विचारों पर आधारित था शिवसेना से गठबंधन'

शिवसेना के साथ गठबंधन होने के बावजूद भाजपा के सरकार नहीं बनाने पर गडकरी ने कहा, 'इतिहास तो सबको पता है। सवाल यह है कि भाजपा और शिवसेना का जो गठबंधन था, वह हिंदुत्व के विचारों पर आधारित था। इसलिए यह देश में सबसे लंबा गठबंधन साबित हुआ है। आज भी हमारे विचारों में मतभिन्नता नहीं है। इसलिए ऐसे गठबंधन का न रहना, देश के लिए विचारधारा के लिए, हिंदुत्व के लिए और विशेष रूप से महाराष्ट्र के लिए नुकसानदायक है।' "क्रिकेट और राजनीति में कुछ भी हो सकता है", यह कहते हुए उन्होंने चुटकी ली कि यह उनकी समझ से परे है कि तीनों दल भारी वैचारिक मतभेदों के बावजूद सरकार बनाने के लिए गठबंधन क्यों बनाएंगे।

'मुख्यमंत्री पद को लेकर हुए मतभेद'

शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी महाराष्ट्र में सरकार बनाने के तौर तरीकों पर चर्चा कर रहे हैं। लंबे समय से सहयोगी रही शिवसेना ने राज्य के चुनाव नतीजों के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा के साथ उनके मतभेद उभरे। गठबंधन टूटने की स्थिति में भाजपा सरकार बनाने के प्रयास पर उन्होंने कहा कि  ऐसी परिस्थितियों में  पार्टी अपनी भविष्य की रणनीति तय करेगी।

'अधिक जनादेश वाली पार्टी का होना चाहिए मुख्यमंत्री'

गडकरी ने कहा, "पार्टी अध्यक्ष और अन्य लोगों के अनुसार, मुख्यमंत्री के बारे में पार्टी का रुख बाद में तय किया जाना था लेकिन चीजें दुर्भाग्यपूर्ण थीं।" उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को उस पार्टी से होना चाहिए, जिसे ज्यादा जनादेश मिला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कौन होगा यह निर्णय महाराष्ट्र पार्टी अध्यक्ष, राज्य के मुख्यमंत्री और भाजपा अध्यक्ष के पास होगा।

एनसीपी प्रमुख शरद पवार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बैठक में क्या हुआ, इस पर  गडकरी ने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है। गुरुवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने एनसीपी और शिवसेना के साथ महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी।

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