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निलंबन से नाराज शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने संसद टीवी के एंकर पद से दिया इस्तीफा, बताई ये वजह

शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने रविवार को संसद के पूरे शीतकालीन सत्र के लिए राज्यसभा से निलंबित...
निलंबन से नाराज शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने संसद टीवी के एंकर पद से दिया इस्तीफा, बताई ये वजह

शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने रविवार को संसद के पूरे शीतकालीन सत्र के लिए राज्यसभा से निलंबित होने के बाद संसद टीवी के एक शो के एंकर पद से इस्‍तीफा दे दिया है। इसकी उन्‍होंने वजह भी बताई है। राज्‍यसभा सभापति एम. वेंकैया नायडू को लिखे पत्र में शिवसेना सांसद ने कहा है कि बहुत पीड़ा लेकिन जिम्मेदारी की भावना के साथ मैं आपको सूचित करना चाहती हूं कि मैं संसद टीवी के शो मेरी कहानी के एंकर का पद छोड़ना चाहती हूं। 

संसद के मानसून सत्र में 11 अन्य सांसदों के साथ राज्यसभा से निलंबन के बाद शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने संसद टीवी के एक शो के लिए एंकर के पद से इस्तीफा दे दिया है। चतुर्वेदी संसद टीवी के शो मेरी कहानी की एंकर थीं। प्रियंका चतुर्वेदी ने राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को एक पत्र लिखकर इस्ताफे का कारण भी बताया है।

रविवार को वेंकैया नायडू को लिखे पत्र में शिवसेना सांसद ने कहा है कि मेरे मनमाने निलंबन ने स्थापित संसदीय मानदंडों और नियमों का पूरी तरह से हनन किया है। बहुत पीड़ा लेकिन जिम्मेदारी की भावना के साथ मैं आपको सूचित करना चाहती हूं कि मैं मेरी कहानी के एंकर का पद छोड़ना चाहती हूं। मैं ऐसी जगह पर किसी पद पर रहने के लिए तैयार नहीं हूं, जहां मेरे प्राथमिक अधिकार को ही छीना जा रहा है। यह हम 12 सांसदों के मनमाने निलंबन के कारण हुआ है। इसलिए, जितना मैं इस शो के करीब थी, उतना ही मुझे दूर जाना पड़ रहा है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने पत्र में लिखा है कि इस निलंबन से मेरा सांसद ट्रैक रिकॉर्ड भी खराब हुआ है। मुझे लगता है कि अन्याय हुआ है, लेकिन अगर सभापति की नजर में ये जायज है तो मुझे इसका सम्मान करना होगा। उन्होंने कहा कि जब संविधान की मेरी प्राथमिक शपथ को पूरा करने से वंचित किया जा रहा है तो ऐसे में संसद टीवी में सेवाएं देने को तैयार नहीं हूं। उन्होंने कहा कि पिछले सत्र में आचरण के लिए 12 सांसदों का निलंबन संसद के इतिहास में कभी नहीं हुआ। आज मुझे उनके लिए बोलने और एकजुटता से खड़े होने की जरूरत है। साथ ही हमें 12 सांसदों के निलंबन की इस घटना को कभी नहीं भूलना चाहिए।

सोमवार को संसद के शुरू हुए शीतकालीन सत्र के पहले दिन राज्यसभा में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना सहित अन्य विपक्षी दलों के 12 सांसदों को इस सत्र की बाकी अवधि  के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया था। जिन सदस्यों को निलंबित किया गया है उनमें मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के इलामारम करीम, कांग्रेस की फूलों देवी नेताम, छाया वर्मा, रिपुन बोरा, राजमणि पटेल, सैयद नासिर हुसैन, अखिलेश प्रताप सिंह, तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन और शांता छेत्री, शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी और अनिल देसाई तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विनय विस्वम शामिल हैं।

निलंबन के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध खत्‍म होने का नाम नहीं ले रहा है। इस मसले पर उच्च सदन के नेता पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा था कि इसका कोई समाधान कैसे निकलेगा जब अनुचित आचरण के लिए निलंबित किए गए सदस्य माफी मांगने तक को राजी नहीं हैं। गोयल ने बताया कि कुछ सदस्यों ने इस मसले पर मुझसे संपर्क साधा था। मैंने उनसे कहा कि माफी मांगना आसन के प्रति एक शिष्टाचार है। इस पर सदस्‍यों का कहना था कि हम माफी नहीं मांग सकते।

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