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19 फरवरी 2024 · FEB 19 , 2024

हरियाणा: रोजगार चाहिए, इजरायल जाओ

केंद्र सरकार इजरायल से भारतीयों को सुरक्षित निकालने में लगी है तो हरियाणा सरकार युवाओं को वहां नौकरी के नाम पर भेज रही
हरियाणा रोजगार कौशल निगम विदेश में नौकरियां दिलाने के लिए नोडल एजेंसी बन गया है

सरकारी या गैर-सरकारी, हर सर्वे में हरियाणा बेरोजगारी में ऊपरी पायदान पर है। इसका एक अंदाजा राज्य सरकार की ‘द ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम’ (एचआरएमएस) रिपोर्ट से मिलता है। रिपोर्ट के मुताबिक विभिन्न सरकारी विभागों में पिछले छह-सात वर्ष से 2,02,576 पद खाली हैं, लेकिन सरकार इन खाली पदों को भरने के बजाय विभागों में आउटसोर्सिंग से काम चला रही है और युवा बेरोजगारों की फौज को इजरायल और रूस जैसे युद्धग्रस्त देशों में भेजने की प्रक्रिया में है। हरियाणा रोजगार कौशल निगम विदेश में नौकरियां दिलाने के लिए नोडल एजेंसी बन गया है। बाकायदा विज्ञापन जारी कर यह निगम इजरायल सरकार की मांग पर वहां युद्ध में ध्वस्त भवनों के पुनर्निर्माण के लिए 10,000 श्रमिक भेजने की मुहिम चला रहा है। इस मामले में विपक्ष का कहना है कि केंद्र सरकार इजरायल से भारतीय मूल के लोगों को सुरक्षित निकालने में लगी है जबकि हरियाणा सरकार प्रदेश के बेरोजगार युवाओं की जिंदगी खतरे में डाल रही है।

इजरायल और हमास के बीच पिछले चार महीने से छिड़ा युद्ध थमने के संकेत नहीं हैं। इस बीच इजरायल में नौकरी के लिए हरियाणा में भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में 16 से 20 जनवरी तक चली भर्ती प्रक्रिया में इजरायल की 15 सदस्यीय टीम ने श्रमिकों का हुनर देखा और उन्हें अपने देश की जरूरत के मुताबिक भवन निर्माण प्रशिक्षण कार्यशालाएं भी आयोजित की हैं। डेढ़ लाख रुपये मासिक वेतन, भोजन, आवास और बीमा सुरक्षा के लालच में यहां के बेरोजगार युवा अपनी जान जोखिम में डालकर पांच साल के लिए इजरायल जाने को तैयार दिख रहे हैं।

दरअसल इजरायल सरकार ने वहां काम करने वाले 90 हजार से अधिक फिलिस्तीनियों के वर्क परमिट रद्द कर दिए थे। ऐसे में श्रमिक संकट से जूझ रहे इजरायल की मदद के लिए नोडल एजेंसी हरियाणा कौशल रोजगार निगम को बदले में इजरायली कंपनियां फीस दे रही हैं। ऐसी पहल करने वाले हरियाणा के इस सरकारी उपक्रम के पास सात देशों से करीब 14,000 कुशल श्रमिकों की भर्तियों के लिए मांग आई है, जिनमें इजराइल के अलावा रूस, इंग्लैंड, फिनलैंड, जापान, उज्बेकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) शामिल हैं। इजराइल में 10 हजार कंस्ट्रक्शन श्रमिकों की जरूरत है। इंग्लैंड को 2500 नर्स चाहिए। जापान में रेस्तरां स्टाफ की जरूरत बताई गई है। उज्बेकिस्तान में भवन निर्माण, फिनलैंड में हेल्थकेयर सेक्टर और यूएई को ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए ड्राइवर से लेकर क्लीनर चाहिए।

नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) के ताजा आंकड़ों मुताबिक हरियाणा में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग में 17.5 प्रतिशत बेरोजगारी दर देश में केरल के बाद दूसरे पायदान पर है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग द इंडियन इकोनॉमी की मानें तो 37.4 प्रतिशत दर के साथ देश में सवार्धिक बेरोजगारी हरियाणा में है। हर साल औसतन 1.70 लाख बेरोजगार युवा राज्य एप्लायमेंट एक्सचेंज में पंजीकरण करवा रहे हैं। 2015 से 2022 के दौरान 14 लाख से अधिक बेरोजगारों ने रोजगार पाने के लिए पंजीकरण कराया है। मौजूदा सरकार के सवा नौ साल के कार्यकाल में हरियाणा में सात गुना बढ़ी बेरोजगारी ने बिहार और झारखंड जैसे बीमारू राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है, हालांकि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का कहना है, ‘‘हरियाणा में 8.5 प्रतिशत बेरोजगार हैं। सबको पक्की सरकारी नौकरी देना संभव नहीं है मगर सवा नौ साल में कुल 30 लाख नौकरियां दी गई हैं जिसमें प्राइवेट सेक्टर शामिल है।’’

कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा कहते हैं, ‘‘हरियाणा में दो लाख से अधिक सरकारी नौकरियों के पद खाली हैं पर भाजपा-जेजेपी सरकार ने मान लिया है कि वह युवाओं को हरियाणा में नौकरी देने में सक्षम नहीं है। ठेके पर कच्ची नौकरियां देने वाला हरियाणा कौशल रोजगार निगम अब इमिग्रेशन एजेंट बन गया है। पहले कम वेतन में पढ़े-लिखे युवाओं का शोषण करने वाला यह निगम अब विदेशी कंपनियों से कमीशन वसूल कर युवाओं को युद्धग्रस्त इजरायल में मजदूरी के लिए भेज रहा है।’’

निगम का कौशल  

प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी को कम करने के लिए हरियाणा सरकार ने 13 अक्टूबर 2021 को कंपनी अधिनियम 2013 के तहत हरियाणा कौशल रोजगार निगम की स्थापना की। निगम अपने पोर्टल के जरिये सरकारी विभागों के लिए कर्मचारियों को आउटसोर्स करता है। निगम के गठन और उसके प्रयोजन पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल का कहना है, ‘‘सरकार ने युवाओं को ठेकेदारी प्रथा से मुक्ति दिलाने के लिए हरियाणा कौशल रोजगार निगम का गठन किया। अब निगम के माध्यम से निजी क्षेत्र में भी युवाओं को रोजगार मुहैया कराया जाएगा। इसके लिए निगम ने सेवाएं शुरू कर दी हैं। इसके लिए युवाओं की पहचान कर ली गई है। 2024 में दो लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।’’

आउटलुक से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘‘ठेकेदारों के माध्यम से कांट्रैक्ट पर काम कर रहे कर्मचारियों को पूरा वेतन नहीं मिलता था। ईपीएफ, ईएसआइ, लेबर वेलफेयर फंड जैसी सुविधा नहीं मिलती थीं। विभिन्न कर्मचारी संघों की मांग भी थी कि ठेकेदारी प्रथा को बंद किया जाए। ठेकेदारों और सरकारी विभाग के अफसरों के बीच मिलीभगत 50 पदों की मंजूरी ली जाती थी और सरकारी खजाने से वेतन भी 50 पदों का ही जारी किया जाता था, लेकिन वास्तव में 40 लोगों को काम पर रखा जाता था। इस मिलीभगत के खात्मे के लिए सरकार ने सवा दो साल पहले कौशल रोजगार निगम की स्थापना की।’’ 

दरअसल, हरियाणा ही नहीं, बल्कि समूचे देश में बढ़ती युवा आबादी के अनुपात में रोजगार के अवसर बहुत कम हैं। उधर, विकसित देशों में वृद्धावस्था की ओर बढ़ती आबादी को भारत अपने युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा अवसर मान रहा है। इसके मद्देनजर देश के कार्यबल को विदेशों में रोजगार के लिए केंद्र सरकार ने बीते पांच साल में 17 मोबिलिटी ऐंड माइग्रेशन पार्टनरशिप एग्रीमेंट (एमएमपीए) जापान, जर्मनी, इटली, फ्रांस, फिनेलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया और ब्रिटेन जैसे देशों से किए हैं। इन देशों में वर्कफोर्स की आवाजाही आसान करने के लिए ऐसे ही समझौते नीदरलैंड, ग्रीस, डेनमार्क, स्विट्जरलैंड, दक्षिण कोरिया और ताइवान के साथ भी जल्द किए जाने की तैयारी है।

मुख्यमंत्री कहते हैं, ‘‘अवैध कंपनियों के हाथों  युवा लाखों रुपये गंवा कर विदेशों में नौकरी हासिल नहीं कर पा रहे हैं। विदेश मंत्रालय के ओवरसीज एम्लायमेंट डिविजन और स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सहयोग से हरियाणा कौशल रोजगार निगम विदेशों में इम‌िग्रेशन और उनके कौशल से मेल खाती नौकरी के लिए युवाओं की मदद रहा है। हाल ही में इजरायल, दुबई और इंग्लैंड ने श्रमिकों की मांग की है। 5 हजार से अधिक युवाओं ने इन देशों में जाने की इच्छा जताई है।’’

कहां-कहां विदेशों में मांग

अमेरिका:  यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स के मुताबिक अमेरिका में 30 लाख नौकरियों के अवसर हैं। ट्रांसपोर्ट, हेल्थ, हॉस्पिटेलिटी, फूड, मेन्युफैक्चरिंग, होलसेल और रिटेल ट्रेड में अधिक नौकरियां हैं। चैंबर के सर्वे मुताबिक तीन साल में पांच अमेरिकियों में से एक ने अपनी आजीविका का जरिया बदला है। 17 प्रतिशत रिटायर हुए हैं,19 प्रतिशत होममेकर बन गए हैं। 14 प्रतिशत ने पार्ट-टाइम काम चुना है। कोरोना के समय नौकरी जाने पर मिले सरकारी पैकेज के बाद 24 प्रतिशत काम पर ही नहीं लौटे।

यूरोप: 1.43 करोड़ कामगरों की कमी झेल रहे यूरोप की वर्कफोर्स में 2030 तक 9.6 करोड़ कामगार घटने की संभावना है। इसकी वजह से अगले छह साल में यूरोप को सालाना 1.323 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है। यूरोप में वर्कफोर्स की भारी कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इमिग्रेशन में कड़ी सख्ती बरतने वाले ग्रीस की संसद ने हाल ही में इमिग्रेशन पॉलिसी में बड़ा बदलाव करते हुए अवैध इमिग्रेशन करने वालों को भी तीन साल रहने व वर्क परमिट की इजाजत दी है। ग्रीस ने भारत से खेतों के लिए 10,000 श्रमिक मांगे हैं।

ताइवान: भारत व ताइवान के बीच जल्द ही एम्लॉयमेंट मोबिलिटी एग्रीमेंट होने की संभावना है। एक लाख भारतीय श्रमिकों की कारखानों, खेतों व अस्पतालों में काम के लिए भर्ती की जानी है। 790 अरब अमेरिकी डॉलर वाली अर्थव्यवस्था को बनाए रखने के लिए ताइवान भारतीय श्रमिकों को ताइवानी श्रमिकों के बराबर वेतन व बीमा की पेशकश कर रहा है।

जापान: दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग देश होने के नाते वर्कफोर्स की गंभीर कमी का सामना कर रहे जापान पर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अपनी स्थिति व क्षमता बनाए रखने का दबाव है। श्रमिकों की कमी के कारण 2030 तक जापान को 195 बिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है।

जर्मनी: जर्मनी को भी श्रमिकों की कमी के कारण अपने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर असर का डर सता रहा है। मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में वर्तमान में 24 लाख श्रमिकों की कमी का सामना कर रहे जर्मनी की स्थिति और भी खराब होने की आशंका है। साल 2030 तक एक करोड़ श्रमिकों की कमी के कारण जर्मनी को 78 अरब डॉलर रेवेन्यू का नुकसान संभावित है।