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भाजपा के विकास का मुखौटा हैं योगी

उग्र हिंदुत्व फैलाना ही है उप्र के सीएम का असली चेहरा, वे चलाते हैं निजी फौज
मणिशंकर अय्यर

उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री बनाए गए योगी आदित्यनाथ भारतीय जनता पार्टी के तथाकथित विकास का मुखौटा हैं। उनका असली चेहरा उग्र हिंदुत्व फैलाना ही है। योगी अपना दबदबा फैलाने के लिए हिंदू युवा वाहिनी के नाम से निजी फौज चलाते हैं। इसके सहारे उन्होंने राज्य के कई हिस्सों में दहशत का माहौल बना रखा है। योगी के जरिए भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का लक्ष्य भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का है। इन सब के बीच कांग्रेस चुप्पी साध के नहीं बैठेगी। पार्टी पुराने भारत के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बनाए रखने के लिए अभियान चलाएगी। इतना ही नहीं भाजपा की नीतियों के खिलाफ और इस पार्टी की सरकार के खिलाफ विपक्ष को भी एकजुट किया जाएगा।

योगी ने मुख्‍यमंत्री बनने के बाद 'सबका साथ, सबका विकास’ की बात कही है। मुझे नहीं लगता है कि यह बात उनके एजेंडे में है। उनका एकमात्र एजेंडा उग्र हिंदूवाद ही है। उनके शासन में अकलियतों के लिए कोई जगह नहीं होगी। चुनाव प्रचार के दौरान ही नहीं उससे पहले कोई 10-15 साल से वह राम जन्मभूमि, लव जिहाद, गो रक्षा, धर्मांतरण आदि पर उग्र बयान देते रहे हैं। इन बयानों में धमकी के पुट भी होते थे। योगी कभी अपने विरोधियों का सम्मान नहीं करते। उनके मन में दूसरे धर्म के प्रति लगाव नहीं है। वह इनकी मान्यताओं से लेकर इन्हें मानने वाले लोगों से घृणा करते हैं। इनके बारे में जब भी वे मुंह खोलते हैं इनके विरोध में ही बात करते हैं। उनके मुख्‍यमंत्री बनने के बाद राज्य के अल्पसंख्‍यकों के बीच नकारात्मक संदेश गया है। वे पहले से ही भाजपा के आने से संशय में हैं अब उनका डर और ज्यादा बढ़ गया है। इतना ही नहीं योगी से निजी रूप से जुड़े लोगों के बीच इतनी खुशी है जिससे लगता है कि वे अब कुछ भी करने के लिए स्वतंत्र हैं।

उनके बयान इतने उग्र थे कि 2014 के लोक सभा चुनाव के दौरान भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेन्द्र मोदी को भी कहना पड़ा था कि वह योगी के बयान से सहमत नहीं हैं। हिंदुत्व का कार्यफ्म सावरकर के जमाने से चल रहा है। आरएसएस और भाजपा इस कदम को आगे बढ़ा रहे हैं। इसी कदम की एक कड़ी योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश जैसे राज्य का मुख्‍यमंत्री बनाना है। इनका एक ही कार्यफ्म है, वह है उग्र राष्ट्रवाद फैलाना। इसके लिए ये लोग किसी भी हद तक जा सकते हैं। योगी ने चुनाव से पूर्व मुस्लिमों के नाम पर बसे शहरों से लेकर इमारतों और स्मारकों के नाम बदलने की बात कही है। अब जब वे मुख्‍यमंत्री बन गए हैं तो वे अपने इस एजेंडे को मुख्‍य रूप से लागू करने की हरसंभव कोशिश करेंगे। ऐसे में उनका यह कहना कि वे सबको साथ लेकर चलेंगे और सबका विकास करेंगे, लोगों को बरगलाने जैसा ही लगता है। यह मुखौटे की तरह है। लोगों को दिख कुछ रहा है जबकि असली चेहरा कुछ और है।

कांग्रेस ऐसा नहीं होने देगी। इतना ही नहीं देश की जनता भी नहीं चाहती कि ऐसा हो। 2014 में हुए लोक सभा के चुनाव के दौरान भी देश की करीब 70 फीसदी जनता ने मोदी के खिलाफ वोट दिया था। इस बार भी उत्तर प्रदेश में यही बात हुई। राज्य की 60 प्रतिशत जनता ने भाजपा और उसके गठबंधन को नकार दिया। अगर यहां विपक्ष बंटा नहीं होता तो राज्य की तस्वीर ही दूसरी होती। आंकड़े साफ तौर पर बताते हैं कि राज्य में कांग्रेस-सपा गठबंधन को जितने वोट मिले अगर उसमें बहुजन समाज पार्टी के मिले वोट जोड़ दिए जाते तो परिणाम कुछ और ही होते। यहां कांग्रेस गठबंधन को 28 और बसपा को 22 प्रतिशत वोट मिले हैं। इसका अर्थ यह है कि राज्य में भाजपा को जितने वोट मिले हैं वे बहुमत का प्रतिनिधित्व नहीं करते।

ऐसे में देश में मोदी की सुनामी चलने की बात की जा रही है। इसे और भाजपा को रोकने के लिए वैकल्पिक विकास और सामाजिक न्याय का कार्यफ्म चलाया जाएगा। एक बात साफ है कि या तो देश के विपक्षी दल आपस में मतभेद रखें और अलग-थलग पड़े रहें। इससे अलग एक और रास्ता भी है कि सारे दल हिंदुत्व की लहर को रोकने के लिए साथ आएं और संघर्ष की राह पकड़ कर सफलता हासिल करें। इसके लिए ममता बनर्जी, नीतीश कुमार, लालू यादव, अखिलेश यादव, फारूक अब्दुल्ला, शरद पवार को साथ आने की जरूरत है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अभी अमेरिका में हैं। वह वहां अपनी मां और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के इलाज के सिलसिले में गए हैं। वह वहां से शीघ्र ही लौटने वाले हैं। वहां से उनके लौटने के बाद सभी विरोधी दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश की जाएगी। इसमें सफलता मिलेगी और एक नया फ्रंट तैयार होगा जो 2019 में होने वाले लोक सभा चुनाव में न सिर्फ सशक्‍त हो कर उभरेगा बल्कि मोदी की लहर को रोकेगा और धर्मनिरपेक्ष और विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में सफल होगा।

(लेखक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं) 

 

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