Advertisement

2024की चुनौतियां/मध्य प्रदेश: उम्मीदें आधी-आधी

भाजपा में हाल के नगरीय चुनावों के नतीजे से आशंका और गुटबाजियां भी चरम पर लेकिन कांग्रेस में कमलनाथ-दिग्विजय की जोड़ी उत्साहित
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

जबरदस्त हो रही बारिश के बीच मध्य प्रदेश इन दिनों चुनावी बौछारों की गिरफ्त में है। पिछले चुनाव में पटकनी खा चुकी भारतीय जनता पार्टी बदला लेने की फिराक में है पर पार्टी को सात साल बाद जून-जुलाई 2022 में हुए नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव परिणाम का डर सता रहा है। महापौर चुनाव में भाजपा को 7 सीटों पर नुकसान उठाना पड़ा और वह भी उस समय जब प्रदेश में विधानसभा के चुनाव नवंबर 2023 में होने हैं। इससे पहले भाजपा प्रदेश की सभी 16 नगर निगमों पर काबिज थी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा का कहना था कि नगर एवं ग्रामीण निकाय के चुनावों में पार्टी को ऐतिहासिक जीत मिली है, हालांकि चुनाव खत्म होते ही पार्टी के भीतर समीक्षा का दौर शुरू हो गया। सात नगर निगमों में हार के कारणों की रिपोर्ट जल्द ही तैयार होकर भाजपा के केंद्रीय कार्यालय की टेबल जा पहुंची।

इस बीच जो कुछ हुआ उसने कयासों का पहाड़ खड़ा कर दिया। जैसे, सबसे पहले इंदौर में ज्योतिरादित्य सिंधिया का भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के घर जा कर मुलाकात करना और मीडिया में कहना कि वे विजयवर्गीय के मार्गदर्शन में उनके साथ मिलकर नई उमंग और जोश के साथ काम करेंगे। फिर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भोपाल पहुंचना और उनकी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की एक असहज भाव की फोटो का सोशल मीडिया पर वायरल होना, फिर एकाएक शिवराज सरकार में नंबर दो की हैसियत रखने वाले प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का दिल्ली जाना। अंत में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मुलाकात।

विजयवर्गीय और सिंधियाः मुलाकात के बाद मिलकर काम करने जोश

विजयवर्गीय और सिंधियाः मुलाकात के बाद मिलकर काम करने जोश

एक के बाद एक घटे यह घटनाक्रम कयासों का मकड़जाल बुनने के लिए काफी थे। फिर क्या था, जल्द ही कैलाश विजयवर्गीय के पक्ष में अटकलों का बाजार गरम हो गया। दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और शिवराज सरकार में नंबर दो की हैसियत रखने वाले गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के पक्ष में चर्चाएं होने लगीं।

जल्द ही भोपाल से दिल्ली तक के वायुमंडल और सोशल मीडिया में एक ही बात तैरने लगी,  13 महीने बाद होने जा रहे विधानसभा चुनाव के पहले मुखिया बदलेगा या मुखिया की टीम। इस बीच मुखिया ने दो दिन का अपना समय विभिन्न मंदिरों के दर्शन के लिए अलग से रख डाला। मुखिया जा पहुंचे दतिया, जहां उन्होंने पीताम्बरा पीठ पहुंच कर देवी की आराधना की। वाराणसी के मिर्जापुर में उन्होंने विंध्यवासिनी देवी के दर्शन किए, फिर काशी विश्वनाथ मंदिर के परिसर में देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा के सामने उन्होंने नमन किया।

इन बेहिसाब खबरों पर विराम उस समय लग गया जब गृह मंत्री और इंदौर जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने इंदौर पहुंच कर मीडिया को बताया कि ‘‘2023 का चुनाव सीएम शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा।’’

जानकारों का मानना है कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के आसार कम और मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना अधिक दिखाई दे रही है। वर्तमान में शिवराज मंत्रिमंडल में चार सीटें खाली हैं। इस बीच संसदीय बोर्ड से हटने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पहली बार भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलने का समय तय किया। लगता है कि भाजपा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद और कैबिनेट विस्तार के साथ ही भाजपा के सबसे लंबे कार्यकाल वाले सीएम शिवराज अपनी चुनावी यात्रा के लिए निकलने की तैयारी में हैं।

भाजपा, चौहान और संगठन को स्थानीय निकाय और पंचायत के 2022 में हुए चुनाव के साथ 2018 के विधानसभा चुनाव के परिणाम भी अच्छे से याद हैं। इस सीख के चलते भाजपा डबल इंजन के फॉर्मूले पर चुनाव लड़ने के मूड में है। मतलब पार्टी प्रधानमंत्री के चेहरे को आगे रखकर चौहान के प्रदेश से लंबे कनेक्ट को 2023 के विधानसभा चुनाव में भुनाने की तैयारी में है।

भाजपा के डबल इंजन फॉर्मूले पर प्रदेश की भाजपा सरकार और संगठन प्रधानमंत्री को केंद्र में रखकर अपने कार्यक्रमों को अमली जामा पहनाने जा रहे हैं। केंद्र की मोदी सरकार की चलाई योजनाओं को पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार एक नया अभियान शुरू करने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से लेकर 31 अक्टूबर 2022 तक एक विशेष प्रदेश स्तरीय अभियान चलाया जाना है, जिसमें मोदी सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं को लोगों तक पहुंचाना और जनता से फीडबैक लिया जाना शामिल है। वहीं पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से 2 अक्टूबर तक सेवा पखवाड़ा मनाएगी। इस दौरान प्रदेश एवं जिला स्तर पर पीएम नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व पर चित्र प्रदर्शनी और व्याख्यानों का आयोजन किया जाएगा।

भाजपा के डबल इंजन फॉर्मूले के पीछे एक और वजह यह भी है कि राज्य में विधानसभा चुनाव के बमुश्किल पांच महीने बाद मई 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं। पार्टी की सोच है कि इस फाॅर्मूले से वह वोटरों को अपने पक्ष में भुनाने में सफल रहेगी। इस फॉर्मूले के अलावा पार्टी पहली बार वंशवादी राजनीति को रोकने के लिए पार्टी के नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट न देने का फॉर्मूला भी लागू कर रही है। आने वाले चुनाव में सांसदों, विधायकों और किसी बड़ी हस्ती के रिश्तेदारों को उम्मीदवारी के लिए तरजीह नहीं दी जाएगी।

दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी में निकाय चुनावों की कामयाबी से छाई रौनक और बढ़ती नजर आ रही है। इसकी वजह नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के परिणाम हैं। इस चुनाव में पार्टी 6 नगर निगमों पर अपना कब्जा जमाने में कामयाब रही। इस कामयाबी से उत्साहित पार्टी 2023 के चुनाव में 2020 का बदला लेने की फिराक में है, जब 15 साल के अंतराल के बाद सपा-बसपा के समर्थन के साथ सत्ता पर वह काबिज हुई थी लेकिन 15 महीने बाद कुछ विधायकों की बगावत के चलते सत्ता से बेदखल कर दी गई थी। प्रदेश के इतिहास में एक साथ सात साल बाद हुए नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में पार्टी के शहरी वोट प्रतिशत में काफी बढ़त भी दर्ज की है।

चार्ट 

जानकारों का मानना है कि कांग्रेस को मिली सफलता का सबसे बड़ा राज टिकट बंटवारे में छुपा है। अकसर टिकट बंटवारे को लेकर राजनीतिक दलों को नाराजगी और अंदरूनी कलह का सामना करना पड़ता है। नगरीय निकाय चुनाव में प्रदेश कांग्रेस प्रमुख कमलनाथ भाजपा की लिस्ट आने से एक सप्ताह पहले ही सभी 16 मेयर उम्मीदवारों की सूची जारी करने में सफल रहे थे। इसका पार्टी को भरपूर फायदा पहुंचा। आगामी चुनाव में भी पार्टी इसी रणनीति पर अमल करने के मूड में है।

नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में कांग्रेस के पास खोने के लिए वैसे तो कुछ नहीं था, लेकिन उसके तीन विधायकों का महापौर चुनाव में हार जाना पार्टी के लिए बड़ा सबक है। इस हार के सबक पर भी पार्टी गौर करने के मूड में है। इसी चुनाव में पार्टी ने उदयपुर घोषणा पर अमल करते हुए उन्हीं परिवारों को टिकट के योग्य माना जिनका कोई अन्य सदस्य कम से कम पांच साल से राजनीति में सक्रिय हो। पार्टी इस तरीके का पालन 2023 के चुनाव में भी टिकट बंटवारे के दौरान करेगी।

तेरह महीने बाद होने जा रहे सत्ता के इस महासंग्राम में भाजपा के डबल इंजन फॉर्मूले के जवाब में 2018 के चुनाव की तरह ही कांग्रेस का कमलनाथ और दिग्विजय सिंह वाला डबल इंजन फार्मूला बॉटम्स अप के एप्रोच के साथ पटरियों में एक बार फिर से  दौड़ता दिखाई दे सकता है।