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भारत-ब्रिटेन के बीच कई व्यापारिक समझौते, मोदी विरोध भी जारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली ब्रिटेन यात्रा के दौरान भारत और ब्रिटेन के बीच करीब नौ अरब पौंड के व्यापारिक समझौते हुए। अपने दौरे में पीएम ने ब्रिटेन के सामने कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। पीएम ने उद्योग जगत की हस्तियों को संबोधित कर भारत के आर्थिक विकास के लिए अपने सरकार की प्रतिबद्धता जाहिर की। पीएम का दौरा हालांकि अब तक सफल रहा है लेकिन पीएम मोदी के विरोध के स्वर अब भी उठ रहे हैं। हालिया दिनों में भारत में बढ़ती असहिष्णुता के मुद्दे पर ब्रिटेन की विपक्षी पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन सहित करीब 46 ब्रिटिश सांसदों ने ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरुन को पत्र लिखकर मोदी के समक्ष इन मुद्दों को उठाने की मांग की है।
भारत-ब्रिटेन के बीच कई व्यापारिक समझौते, मोदी विरोध भी जारी

भारत के आर्थिक विकास की दिशा में ये समझौते बेहद अहम भूमिका निभाएंगे। इन समझौतों में छह महत्वपूर्ण समझौते शामिल हैं। पीएम और व्यापार जगत के बीच हुए समझौते के तहत वोडाफोन भारत में अपने नेटवर्क को उन्नत बनाने और उसके विस्तार में, पुणे एवं हैदराबाद में नए तकनीक केंद्र बनाने में, नए डाटा केंद्र बनाने तथा नए पेमेंट बैंक बनाने में 1.3 अरब पौंड का निवेश करेगी। वहीं अगले पांच वर्षों में भारत में तीन गीगावाट्ज की सौर उर्जा के डिजाइन और उसके प्रबंधन में लाइट सोर्स दो अरब पौंड का निवेश करेगी जिससे भारत और ब्रिटेन में 300-300 लोगों के लिए रोजगार का अवसर उपलब्ध हो सकेगा। ऊर्जा के ही क्षेत्र में काम करने वाली इंटेलिजेंट एनर्जी ने भारत के 27,400 टेलिकॉम टॉवर को स्वच्छ उर्जा मुहैया कराने के लिए 1.2 अरब पौंड के समझौते पर हस्ताक्षर किया है। वहीं चिकित्सा क्षेत्र में हुए एक महत्वपूर्ण समझौते के तहत किंग्स कॉलेज हॉस्पिटल्स फाउंडेशन ट्रस्ट और इंडो-यूके हेल्थकेयर चंडीगढ़ में एक अस्पताल की स्थापना करेगा। यह भारत में बनने वाले 11 इंडो-यूके हॉस्पिटल्स का पहला अस्पताल होगा। समय के साथ भारत में चिकित्सा क्षेत्र में यह सौदा एक अरब पौंड का होगा। भारत के साथ व्यापारिक समझौते में बैंकिंग क्षेत्र भी पीछे नहीं रहा। इंडिया बुल्स ब्रिटिश स्टार्ट-अप बैंक ओकनार्थ में 6.6 करोड़ पौंड का निवेश करेगी। यस बैंक और लंदन स्टॉक एक्सचेंज ने एक करार पर हस्ताक्षर किया है।

लंदन के मध्य में स्थित ऐतिहासिक गिल्ड हॉल में उद्योग जगत की बड़ी हस्तियों और निवेशकों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की तरक्की के लिए जरूरी दशाएं पैदा की गई हैं। उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया कि आने वाले दिनों में ये स्थितियां बेहतर होती जाएंगी। मोदी ने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के ताजा सुधारों के बाद भारत अब विदेशी निवेश के लिए सबसे खुले देशों में से एक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अभी भारत में होना समझदारी है। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि 2016 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की शुरुआत सफलतापूर्वक हो जाएगी। पीएम मोदी ने कहा, भारतीय अर्थव्यवस्था की उड़ान के लिए जरूरी दशाएं बनाई गई हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, हम आपके विचारों, नवोन्मेषों एवं उद्यमों का स्वागत करेंगे। हम अपनी नीतियों एवं प्रक्रियाओं में जरूरी सुधार करने को लेकर काफी खुले विचार के हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, मेरी सरकार ने जब से कामकाज संभाला है, हम लगातार अर्थव्यवस्था को सही रास्ते पर लाने के लिए काम कर रहे हैं। हमारी कड़ी मेहनत का नतीजा दिख रहा है। आईएमएफ प्रमुख ने हाल ही में कहा कि भारत आज वैश्विक अर्थव्यवस्था के दमकते सितारों में से एक है। पिछले साल हमारी वृद्धि दर 7.3 फीसदी थी। प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटिश औद्योगिक जगत को आश्वस्त किया कि भारत सभी नवोन्मेषकों एवं उद्यमियों के बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए एक विस्तृत राष्ट्रीय आईपीआर नीति तैयार की जा रही है। मोदी ने ऐसे समय में यह बयान दिया है जब कई देशों और बहुराष्ट्रीय निगमों की मांग है कि भारत अपने पेटेंट कानून वैश्विक मानकों के मुताबिक बनाए।

वहीं ब्रिटेन की विपक्षी लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन सहित करीब 46 ब्रिटिश सांसदों ने एक संसदीय प्रस्ताव पर दस्तखत कर प्रधानमंत्री डेविड कैमरन से कहा है कि वह अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी के सामने मानवाधिकार के मुद्दे उठाएं। प्रस्ताव में कहा गया है कि प्रधानमंत्री द्वारा घोषित भारत के साथ ब्रिटेन के तथाकथित विशेष संबंधों को देखते हुए भारत सरकार के साथ इन चिंताओं को उठाया जाना चाहिए और सरकार से अनुरोध किया जाता है कि रिपोर्टों की जांच करें और भारतीय सरकार के साथ चिंताएं जाहिर करें। प्रस्ताव में भारत में अनेक राजनीतिक कैदियों की रिहाई का भी आह्वान किया गया है और कहा गया है कि मोदी ने ब्रिटिश सांसदों को संबोधित करने आ रही ग्रीनपीस कार्यकर्ता प्रिया पिल्लई को ब्रिटेन आने से रोक दिया था। दैनिक अखबार दि गार्जियन ने लेबर पार्टी के सूत्रों के हवाले से कहा कि जब मोदी सांसदों को संबोधित कर रहे थे, उस वक्त कॉर्बिन रॉयल गैलरी में मौजूद नहीं थे। लेकिन शनिवार को वह मोदी से मुलाकात करेंगे। पार्टी सूत्रों के हवाले से मीडिया में आई खबरों में कहा गया है कि कॉर्बिन मोदी से मुलाकात के वक्त इस मुद्दे को उठाएंगे। इस प्रस्ताव पर दस्तखत करने वालों में जॉन मैकडोनेल और एलेक्स सेलमंड भी शामिल हैं। इससे पहले, सलमान रश्दी सहित 200 से ज्यादा जानेमाने लेखकों ने कैमरन से आग्रह किया था कि वह भारत में बढ़ती असहनशीलता और खौफ के बढ़ते माहौल को मोदी के सामने उठाएं।

अपनी यात्रा में पीएम नरेंद्र मोदी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के साथ बातचीत में ब्रिटेन में पढ़ने के लिए आने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में भारी कमी और उन्हें वीजा आवेदन के संबंध में होने वाली दिक्कतों पर चिंता भी जताई। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा, प्रधानमंत्री ने छात्र वीजा का मुद्दा बहुत मजबूती से उठाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले तीन साल में ब्रिटेन में भारतीय छात्रों की संख्या 50 प्रतिशत घटी है। प्रवक्ता ने कहा, उन्होंने कहा कि भारतीय छात्र दुनिया में बेहतरीन और मेधावी हैं और दोनों पक्षों के लिए यह फायदे की स्थिति होगी। भारतीयों को अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा की जरूरत है और भारतीय छात्र जो विशेषज्ञता लेकर आते हैं उससे ब्रिटेन को फायदा होगा।

 

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