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पाकिस्तान से विवाद बढ़ने के बीच पुराने मित्रों पर भारत का दांव

ऐसा लगता है कि पाकिस्तान के साथ विवाद बढ़ने, कश्मीर में अशांति पर काबू पाने में मुश्किलें आने और बलूचिस्तान का मुद्दा उठाने के बाद भारत अब विदेश नीति में एक बार फिर से पुरानी और परखी हुई दोस्ती पर दांव लगाने में जुटा है।
पाकिस्तान से विवाद बढ़ने के बीच पुराने मित्रों पर भारत का दांव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंबे समय तक अमेरिका और यूरोप के देशों से संबंध सुधारने और इन देशों में भारत का प्रभाव बढ़ाने के लिए पूरा प्रयास किया मगर लगता है कि आखिरकार उन्हें रूस के साथ ही भारत के संबंधों की अहमियत समझ में आ गई है।

तभी तो शनिवार को प्रधानमंत्री कार्यालय ने बयान जारी कर कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस को समय के साथ परखा हुआ और भरोसेमंद मित्र मानते हैं। मोदी ने रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के साथ सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को विस्तार देने, मजबूती प्रदान करने और प्रगाढ़ करने के प्रति साझा प्रतिबद्धता जताई। पीएमओ के वक्तव्य के अनुसार उन्होंने यह टिप्पणी रूस के उपराष्ट्रपति दमित्री रोगोजिन की अगवानी करते हुए की। रोगोजिन फिलहाल भारत दौरे पर हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पुतिन की तरफ से अभिवादन प्रेषित किया और उन्हें भारत और रूस के बीच चल रही परियोजनाओं में प्रगति के बारे में जानकारी दी।

मोदी ने पुतिन के साथ जून में ताशकंद में हुई हालिया मुलाकात और इस महीने की शुरुआत में वीडियो लिंक के जरिए कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र राष्ट्र को समर्पित करने का जिक्र किया। वक्तव्य के अनुसार प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा का उत्सुकता से इंतजार कर रहा है।

गौरतलब है कि सिर्फ रूस ही नहीं भारत ने पाकिस्तान के संग विवाद में अफगानिस्तान को अपने साथ जोड़ने की भी पहल की है। अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई इन दिनों दिल्ली की यात्रा पर हैं और बलूचिस्तान के मुद्दे पर वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रुख का खुला समर्थन कर चुके हैं। जाहिर है कि भारत धीरे-धीरे इस मसले पर अपने दोस्तों को एकजुट करने में लगा है।

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