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नेपाल: ताजा झड़प में पुलिस की गोली से तीन लोगों की मौत

भारत की सीमा से सटे नेपाल के शहर मोरंग में आंदोलनकारी मधेसियों और सत्तारूढ़ सीपीएन-यूएमएल की युवा शाखा के कार्यकर्ताओं के बीच गुरूवार को जमकर झड़प हुई। नेपाल में हुई इस ताजा हिंसा की घटना में तीन लोगों की जान चली गई। लोगों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस की ओर से की गई गोलीबारी में एक महिला समेत तीन व्यक्तियों की मौत हुई है।
नेपाल: ताजा झड़प में पुलिस की गोली से तीन लोगों की मौत

देश में नया संविधान लागू होने के बाद से ही हिंसक झड़प जारी हैं। गुरूवार की घटना के बाद प्रधानमंत्री ओ.पी. कोली ने वहां का अपना दौरा रद्द कर दिया। मोरंग जिले की रंगेली नगरपालिका में जब संयुक्त लोकतांत्रिक मधेसी मोर्चा (एसएलएमए) के कार्यकर्ताओं ने यूथ एसोसिएशन ऑफ नेपाल (वाईएएन) द्वारा प्रधानमंत्री के लिए आयोजित अभिनंदन समारोह में विघ्न पैदा करने की कोशिश की तब वहां तनाव पैदा हो गया। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस ने लाठीचार्ज कर, आंसू गैस के गोले दागकर और हवाई फायरिंग कर झड़प रोकने की कोशिश की लेकिन भीड़ जब हिंसक हो गई तो पुलिस को गोलियां चलानी पड़ी।

मोरंग के मुख्य जिलाधिकारी स्वयं राय ने बताया कि तीन व्यक्तियों की मौत हो गई जबकि आठ अन्य लोग घायल हो गए। मारे गए व्यक्तियों की पहचान द्रौपदी देवी चौधरी (60), शिवू माझी और महादेव ऋषि के रूप में हुई है। पुलिस उपमहानिरीक्षक माधव जोशी ने बताया कि घायलों को एक स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया।

प्रधानमंत्री ओली ने इलाके में तनाव फैलने के बाद वहां का अपना दौरा रद्द कर दिया। सीपीएन-यूएमएल महासचिव इश्वर पोखारेल तथा अन्य वरिष्ठ नेता सभा को संबोधित करने सभास्थल पर गए। मधेसी फ्रंट ने पहले वाईएएन को कार्यक्रम नहीं आयोजित करने की चेतावनी दी थी और कहा था कि वह प्रधानमंत्री को सम्मानित करने की किसी भी कोशिश को विफल कर देगा।

दक्षिणी जिलों में भारतीय मूल के मधेसी देश के नए संविधान का पिछले पांच महीनों से विरोध कर रहे हैं। उनका दावा है कि नए संविधान का संघीय ढांचा उनकी मांगों पर खरा नहीं उतरा। संविधान में देश को छह प्रांतों में विभाजित करने का प्रावधान है। इसी बीच आंदोलनकारी मधेसी संगठनों और सरकार के बीच आज भी वार्ता जारी रही। हालांकि आंदोलनकारी नेताओं और प्रधानमंत्री के बीच आज हुई बैठक में भी कोई सहमति नहीं बन पाई। यूनाईटेड डेमोक्रेटिक मधेसी फ्रंट के एक शीर्ष नेता ने कहा कि दोनों पक्ष अपने-अपने रूख पर कायम हैं और कोई प्रगति नहीं हुई है।

भारतीयों के साथ अपना दृढ़ सांस्कृतिक और पारिवारिक नाता रखने वाले मधेसियों की मांग है कि प्रांतों का सीमांकन और निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन जनसंख्या एवं आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर हो। आंदोलन में अबतक 50 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

 

 

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