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कार्टून में दिखी बाघों की व्यथा

अगर शेर, बाघ और अन्य पशु बोलने लगें तो क्या होगा। शायद वह यही कहें, प्लीज हमें बक्श दो। मध्य प्रदेश के कार्टूनिस्ट हरिओम तिवारी ने बाघों पर आधारित कार्टून बनाए और टाइगर स्पीक नाम से दिल्ली में लोगों तक यह बात पहुंचाने की कोशिश की कि उन्हें भी चैन चाहिए हमारी तरह।
कार्टून में दिखी बाघों की व्यथा

केंद्रीय इस्पात और खनन मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने दिल्ली के प्यारे लाल भवन की आर्टीज़न आर्ट गैलरी में आयोजित इस प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। बाघों पर आए अस्तित्व के संकट और उनकी व्यथा  को 52 कार्टूनों के माध्यम से हरिओम ने अभिव्यक्त किया गया।

हंसते-हंसाते और गुदगुदाते हुए बाघों ने अपनी वेदना ‘अभिव्यक्त’ की। जरूरी है कि पूरा समाज  बाघों की आवाज बने और उन्हें संरक्षित करे। वन्य जीव संरक्षण के प्रति आम लोगों जागरुक करने का यह अभिनव प्रयास था। समापन अवसर पर केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडे़कर भी उपस्थित थे।

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