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राष्ट्रीय संग्रहालय में प्राचीन नक्शों की प्रदर्शनी

राजधानी में शुरू हुई प्राचीन नक्शों की एक अनोखी प्रदर्शनी पृथ्वी के सही भौतिक चित्रण के लिए सदियों से अनवरत जारी मानव की अथक कोशिश को उजागर करेगी। यह प्रदर्शनी भारतीय उपमहाद्वीप के प्रयोगात्मक ब्रह्माण्डीय निरूपण से लेकर भौगोलिक चित्रण की विकास यात्रा को भी रेखांकित करेगी।
राष्ट्रीय संग्रहालय में प्राचीन नक्शों की प्रदर्शनी

केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने राष्ट्रीय संग्रहालय (एनएम) के सहयोग से हैदराबाद स्थित कलाकृति आर्काइव द्वारा आयोजित दो महीने तक चलने वाली भारतीय मानचित्र की सांस्कृतिक यात्रा प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। राष्ट्रीय संग्रहालय ने काली दीवारों और कहीं- कहीं लाल वस्तुओं के साथ अभिनव डिजाइनों से सुसज्जित गैलरी में प्रदर्शित 72 नक्शों में से दो नक्शे उपलब्ध कराए हैं।

भारत के लिए अमरीकी राजदूत रिचर्ड वर्मा और केंद्रीय संस्कृति सचिव नरेंद्र कुमार सिन्हा की उपस्थिति में मंगलवार शाम को इस प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया। इस दौरान मंत्री ने कहा कि यह प्रदर्शनी ब्रह्मांड और परिदृश्य का चित्रण करते हुए पुरानी पीढ़ियों की क्षमता का प्रदर्शन करती है।

 

जर्मन मानचित्रकार डॉ. अलेक्जेंडर जॉनसन के साथ लंदन निवासी भारतीय वास्तुकार डॉ. विवेक नंदा द्वारा क्यूरेट की गई और विषयगत क्रम में सुरुचिपूर्ण ढंग से प्रदर्शित की गई इस प्रदर्शनी के बारे में उन्होंने कहा, ‘आज के युवाओं को इस मिशन को आगे ले जाना चाहिए।’ कलाकृति द्वारा आयोजित इसी तरह की एक प्रदर्शनी इस गर्मी के प्रारंभ में समाप्त हो चुके दूसरे कोच्चि- मुजिरिस बिनाले पर प्रकाश डालती है।

 

कला और विरासत के प्रमोटर प्रशांत लाहोटी के नेतृत्व में प्रारंभ किया गया कलाकृति आर्काइव ऐतिहासिक नक्शों का देश का सबसे व्यापक निजी संग्रह है। डिजाइनिंग फर्म चलाने वाले सिद्धार्थ चटर्जी ने गैलरी का नक्शा तैयार किया था।

 

15 वीं शताब्दी के प्रारंभ की अपनी सबसे पुरानी कृति के अलावा 10 फीट गुना 15 फीट के सबसे बड़े आकार में कलाकृति को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनी के बारे में राजनयिक रिचर्ड वर्मा ने कहा कि प्रदर्शनी में 15वीं शताब्दी के नक्शे प्रतिनिधित्व किए गए स्थानों के आधुनिक दिनों के उपग्रह चित्रों के समतुल्य आने में सफल रहे हैं।

 

1980 बैच के आईएएस अधिकारी सिन्हा ने देश भर में संग्रहालय के डिजिटलीकरण का आह्वान करते हुए कहा, ‘भविष्य की पीढ़ियों के कल्याण के लिए यह प्रक्रिया पहले से ही जारी है।’

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