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कारोबार: बड़ी कंपनियों को मात देते स्टार्टअप

“ज्यादा पैसा, इंसेंटिव और बेहतर कार्य संस्कृति के साथ काम के समय की आजादी का आकर्षण” दिल्ली के 25...
कारोबार: बड़ी कंपनियों को मात देते स्टार्टअप

“ज्यादा पैसा, इंसेंटिव और बेहतर कार्य संस्कृति के साथ काम के समय की आजादी का आकर्षण”

दिल्ली के 25 वर्षीय प्रद्युम्न ठाकुर दो बड़ी कंपनियों की नौकरी ठुकराकर अब स्टार्टअप में अपनी दूसरी नौकरी करने जा रहे हैं। अपने निर्णय के बारे में वे बताते हैं, "बड़ी कंपनियों में काम करने का मतलब है कि वहां आप हजारों लोगों के बीच बस एक नम्बर हैं। बड़ी कंपनियों में काम करने का एक पैटर्न तय हो जाता है और उसी के हिसाब से आपको काम करना पड़ता है। बड़ी कंपनियां बढ़ती हैं तो फायदा सिर्फ ऊपर के लोगों को होता है, लेकिन स्टार्टअप में कंपनी के साथ आपकी भी ग्रोथ होती है।" यह कहानी केवल प्रद्युम्न की नहीं, बल्कि देश के लाखों युवाओं की है। पर्सनल सेफ्टी एप 'लाइटहाउस' के सीईओ धीरज नौभार इस ट्रेड पर कहते हैं, "आज के युवाओं में कुछ सीखने का जुनून है। जहां उनका यह जुनून पूरा हो रहा है, वे उसी कंपनी को अपनी कर्मभूमि बना रहे हैं।"

हाल ही में आई टेक्नोलॉजिस्ट सेंटीमेंट रिपोर्ट 2021 के अनुसार, विश्व स्तर पर 48% तकनीकी पेशेवर अपनी कंपनी बदलना चाहते हैं। वहीं, माइक्रोसॉफ्ट ने अपने एक सर्वेक्षण में पाया कि वैश्विक स्तर पर 'जनरेशन जेड' के 54% कर्मचारी अपनी कंपनी में इस्तीफा सौंपने पर विचार कर रहे हैं। बड़ी कंपनियों में नौकरी करने के रुझान में कमी आने से स्टार्टअप सेक्टर को नया 'बूम' मिला है।

आखिर क्यों बड़ी कंपनियों से लोग स्टार्टअप की तरफ बढ़ रहे हैं, इस पर एम्बरस्टूडेंट नामक एक स्टार्टअप के को-फाउंडर सौरव गोयल आउटलुक को बताते हैं, "बड़ी कंपनियों में आपकी ग्रोथ नहीं होती। अगर बड़ी कंपनियों में सालाना ग्रोथ 10-12% हो रही है, तो स्टार्टअप में यही ग्रोथ कम से कम 30-40% की होगी। यही वजह है कि लोग स्टार्टअप की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं।"

टेकगिग के हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, भारत के आइटी क्षेत्र में औसत वेतन वृद्धि 2019 में 9.5% से काफी कम होकर 2020 में महामारी के बीच 5.2% हो गई। हालांकि, यह 2021 में बढ़कर 8.8% हो गई है, फिर भी तुलनात्मक रूप में बहुत कम है।

स्टार्टअप में काम करने वाले आधे लोग बड़ी कंपनियों को छोड़कर ही आ रहे हैं। गोयल बताते हैं कि कम से कम 50% लोग बड़ी कंपनियां छोड़ कर उनके यहां आए हैं। गोयल की बात से धीरज नौभार भी अपनी सहमति दर्ज कराते हैं। वे कहते हैं, हमारे यहां भी जितने लोग आ रहे हैं उनमें से आधे स्थापित कंपनियों से ही हैं।

आकर्षण का खेल

स्टार्टअप की तरफ बढ़ते रुझान का कारण सिर्फ वेतनवृद्धि नहीं है, बल्कि अधिकतर मामलों में वजह व्यक्तिगत ग्रोथ भी है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री के आलोक गुप्ता कहते हैं, "80% मामलों में वेतन की कोई भूमिका नहीं होती है। स्टार्टअप का एक गैर-पारंपरिक तरीका होता है, जो कमर्चारियों को ज्यादा रोमांचक लगता है। बड़े कंपनियों में कर्मचारियों को यह रोमांच नहीं मिलता है।"

स्टार्टअप में कार्य करने के फायदे पर धीरज नौभार कहते हैं, "यहां सब कुछ आपके सामने होता है। हाल में कॉलेज से पास हुआ बच्चा स्टार्टअप में कोडिंग, ऑपरेशन्स, सेल्स और टेक टीम के साथ बैठता है। वह बहुत ही कम समय में स्टार्टअप का पूरा बिजनेस आइडिया समझ जाता है। यहां सीखने का भरपूर मौका है, आप जितना सीख सकें।" वहीं, सौरव कहते हैं कि ग्रोथ और एक्सपोजर के अलावा काम का लचीला समय, इंसेंटिव और कर्मचारी हितों वाली नीतियां भी स्टार्टअप की तरफ बढ़ते आकर्षण के कारण हैं।

बड़ी कंपनियों से टैलेंट को लुभाने के लिए स्टार्टअप कैसे-कैसे इंसेंटिव देते हैं, इसके लिए हम भारतपे का उदाहरण ले सकते हैं। कंपनी ने इस साल दुबई में हुई टी-20 वर्ल्ड कप के लिए 100 टेक एक्सपर्ट को हायर किये थे और कहा था कि सभी लोगों को क्रिकेट वर्ल्डकप के दौरान दुबई में रहकर काम करना होगा। भारतपे ने उस वक्त घोषणा की थी कि दुबई जाने वालों को कंपनी की तरफ से इक्विटी, बीएमडब्ल्यू सुपरबाइक, इन-वोग गैजेट्स जिसमें आईपैड, स्मार्ट कीबोर्ड फोलियो, हरमन कार्डन स्पीकर्स, ग्रीन सोल मॉन्स्टर चेयर, फायरफॉक्स टाइफून 27.5डी साइकिल आदि दिए जाएंगे।

उस समय भारतपे के सह-संस्थापक और सीईओ अशनीर ग्रोवर ने कहा था, "हम भारत में बैंकिंग की अगली पीढ़ी तैयार कर रहे हैं, हम देश की बेहतरीन तकनीकी प्रतिभा को आमंत्रित और उत्साहित करना चाहते हैं। अच्छी प्रतिभा को उचित पैकेज देने के मामले में हम सबसे आगे रहेंगे, क्योंकि यही वास्तविक निवेश है जिसकी हमारे व्यवसाय को जरूरत है।"

हालांकि स्टार्टअप कंपनियों के प्रति तेजी से बढ़ते इस प्रेम का कारण मात्र लुभावने इंसेंटिव नहीं हैं। हकीकत तो यह है कि बड़ी कंपनियों में काम करने वाले कई कमर्चारी स्टार्टअप में इसलिए भी आते हैं क्योंकि उनके मन में भविष्य में खुद का स्टार्टअप खोलने का विचार होता है। एम्बरस्टूडेंट के सह-संस्थापक सौरभ कहते हैं, "शुरू में अच्छे स्टार्टअप में काम कर पैसे कमाने के बाद लोगों ने खुद की फर्म खोल ली। एक ऐसा ही कर्मचारी जो शुरू में हमारे साथ काम करता था, अब खुद का स्टार्टअप शुरू कर चुका है। कई बार तो जब हम नौकरी पर रखते वक्त लोगों से पूछते हैं कि आप हमें क्यों जॉइन करना चाहते हैं, तो वे साफ कहते हैं कि हम यहां सीखने के लिए आए हैं और भविष्य में अपना स्टार्टअप खोलना चाहते हैं।"

साझा वृद्धि

एक तरफ जहां बड़ी कंपनियां अपने टैलेंट को बरकरार रखने में विफल हो रही हैं, तो दूसरी तरफ स्टार्टअप टैलेंट की मांग को पूरा करने के लिए आइआइटी और आइआइएम के दरवाजे तक पहुंच रहे हैं। वे हायरिंग के दौरान मोटी रकम भी पेश कर रहे हैं। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि स्टार्टअप कंपनियां कर्मचारियों को जो भारी-भरकम इंसेंटिव देती हैं, वे उन कंपनियों के लिए शुरुआती निवेश साबित हो रहे हैं। इनसे आगे चल कर उन्हें बड़ा मुनाफा कमाने में मदद मिलेगी।

कुछ युवा इसलिए भी इन कंपनियों के साथ जुड़ना चाहते हैं क्योंकि उनका मानना है कि बड़ी कंपनियां पहले से ही शेयर बाजार में लिस्टेड हैं, उनके साथ कार्य करने वाले कर्मचारियों को कुछ भी फायदा नहीं होता है। लेकिन नए स्टार्टअप्स के साथ कार्य करने पर उन्हें बराबर का फायदा होता है।

तेजी से बढ़ रहे स्टार्टअप

स्टार्टअप एम्प्लॉई स्टॉक ओनरशिप (ईएसओपी) के जरिए अपनी हिस्सेदारी भी कर्मचारियों को देते हैं। ऐसा करने से कर्मचारियों को लगता है कि जब स्टार्टअप बढ़ेगा तो उन्हें भी फायदा होगा। यह भी एक वजह है जो स्टार्टअप्स के विकास में मील का पत्थर साबित हो रहा है।

एडवर्ब टेक्नोलॉजीस में सीनियर एचआर मैनेजर, कनुप्रिया वर्मा आउटलुक से कहती हैं, "स्टार्टअप की तरफ से अपने कर्मचारियों को दिए गए इंसेंटिव और हाल ही शेयर बाजार में हुई उनकी लिस्टिंग ने स्टार्टअप मालिकों के साथ-साथ उनके कर्मचारियों को बराबर फायदा पहुचाया है।"

हाल ही शेयर बाजार में लिस्ट हुई जोमैटो ने अपने ईएसओपी के जरिए 18 कर्मचारियों को करोड़पति बनाया। पेटीएम की लिस्टिंग ने 350 लोगों को और मोबिक्विक ने अपनी लिस्टिंग के जरिए 118 कर्मचारियों को करोड़पति बनाया है। ये आकड़े, स्टार्टअप की ग्रोथ के साथ वहां कार्यरत कर्मचारियों की परस्पर ग्रोथ को दर्शाते हैं।

जारी रहेगा यह ट्रेंड

15 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि देश में हर साल 16 जनवरी राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के रूप में मनाया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्टार्टअप आने वाले समय में देश की रीढ़ बनने जा रहे हैं। उनके अनुसार, साल 2013-14 में जहां चार हजार पेटेंट को स्वीकृति मिली थी, वहीं पिछले साल इनकी संख्या 28 हजार से ज्यादा हो गई।

किसी भी बिजेनस की बढ़ोतरी में सबसे अहम कार्य पूंजी का होता है और हालिया समय में स्टार्टअप्स में निवेश तेजी से बढ़ा है। मार्केट रिसर्च फर्म ग्रांट थॉर्नटन की हालिया रिपोर्ट से पता चलता है कि भारतीय स्टार्टअप्स को 2021 की पहली छमाही के दौरान रिकॉर्ड 43 अरब डॉलर का निवेश मिला।

भारत में स्टार्टअप की ग्रोथ का आकलन इस बात से किया जा सकता है कि अमेरिका जैसे देशों से ज्यादा स्टार्टअप भारत में खुल रहे हैं। पीई फर्म ट्रैकसन के अनुसार, 2015 में बेंगलूरू में 3,080 फर्मों की स्थापना की गई थी, जबकि अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में 2,040 कंपनियां स्थापित हुई थीं।

स्टार्टअप का ग्राफ भविष्य में कैसा रहेगा, इसपर आलोक गुप्ता कहते हैं, “स्टार्टअप इसलिए ज्यादा खुल रहे हैं, क्योंकि अब सरकारों की तरफ से मंजूरी मिलने में ज्यादा समय नहीं लगता है। अगर आपके पास अच्छा आइडिया है तो निवेशक भी आसानी से मिल जाते हैं।”

खिसकती जमीन

स्टार्टअप्स में जहां बूम देखने को मिल रहा है तो वहीं बड़ी कंपनियों से लोगों के नौकरी छोड़ने के आंकड़ों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। एचआर सॉल्यूशंस फर्म टीमलीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर तिमाही में आईटी उद्योग में नौकरी छोड़ने की औसत दर (एट्रिशन रेट) 8.67% थी। वहीं, विप्रो, इंफोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने समान तिमाही में क्रमशः 20.5%, 20.1% और 11.9% के साथ बहुत अधिक एट्रिशन रेट दर्ज किया।

लोग बड़ी कंपनियां इसलिए छोड़ रहे हैं क्योंकि वहां और स्टार्टअप की कार्य संस्कृति में बड़ा अंतर है। पीएचडी चैंबर के आलोक गुप्ता कहते हैं, “बड़ी कंपनियों और स्टार्टअप की कार्य संस्कृति में एक बुनियादी अंतर है। जितनी भी बड़ी कंपनियां हैं, वे अब खुद को स्टार्टअप की तरह देखना चाहती हैं। स्टार्टअप में एप्रूवल, एडमिनिसट्रेशन और एचआर जैसे लेयर नहीं होते हैं और फैसले जल्दी लिए जाते हैं।” अगर बड़ी कंपनियों ने समय के साथ अपनी कार्य संस्कृति को नहीं बदला तो वो ज्यादा समय तक बाजार में नहीं टिक सकेंगी।

सौरव गोयल

सौरव गोयल, को-फाउंडर, एम्बरस्टूडेंट

“यदि बड़ी कंपनियों के कर्मचारियों की सालाना ग्रोथ 10-12% हो रही है, तो स्टार्टअप में कम-से-कम 30-40% की ग्रोथ होती है”

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कनुप्रिया वर्मा

कनुप्रिया वर्मा, सीनियर एचआर मैनेजर, एडवर्ब टेक्नोलॉजी

“कर्मचारियों को स्टार्टअप की तरफ से दिए गए इंसेंटिव और शेयर बाजार में हुई उनकी लिस्टिंग ने स्टार्टअप के मालिकों के साथ उनके कर्मचारियों को  बराबर का फायदा पहुंचाया है”

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आलोक

आलोक गुप्ता, चेयर, पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री

“80% मामलों में वेतन की बड़ी भूमिका नहीं होती। स्टार्टअप का एक अपारंपरिक तरीका होता है जो कमर्चारियों को ज्यादा रोमांचित करता है। बड़ी कंपनियों में उन्हें यह रोमांच नहीं मिलता”

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