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‘डॉलर’ की कठपुतली बन जाओ या चुप रहो : कुणाल कामरा

‘स्टैंड-अप कॉमेडियन’ कुणाल कामरा ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर ‘‘हाउ टू किल एन...
‘डॉलर’ की कठपुतली बन जाओ या चुप रहो : कुणाल कामरा

‘स्टैंड-अप कॉमेडियन’ कुणाल कामरा ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर ‘‘हाउ टू किल एन आर्टिस्ट: ए स्टेप-बाय-स्टेप गाइड’’ (एक कलाकार को कैसे मारें : चरण दर चरण मार्गदर्शिका) शीर्षक से पांच-सूत्री पोस्ट साझा की।

अपने इस पोस्ट में उन्होंने उनके हालिया कार्यक्रम के खिलाफ हिंसक आक्रोश की आलोचना की और कहा कि एक कलाकार को या तो अपनी आत्मा बेचनी होगी या फिर उसे चुप रहना होगा।
 
पिछले हफ्ते कामरा के ‘यूट्यूब’ चैनल पर जारी किए गए वीडियो ‘‘नया भारत’’ में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ ‘गद्दार’ टिप्पणी को लेकर बड़े पैमाने पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। शिवसैनिकों ने उस जगह पर तोड़फोड़ की, जहां कामरा ने हास्य कार्यक्रम की शूटिंग की थी। ‘स्टैंड-अप कॉमेडियन’ पर मुंबई में तीन प्राथमिकी दर्ज हैं और वह इस समय तमिलनाडु में हैं।
 
कामरा ने अपने इस शो में एक ‘पैरोडी’ गाई थी, जिसमें शिवसेना में विभाजन के लिए शिंदे पर कटाक्ष किया गया था और उन्हें ‘गद्दार’ बताया था। उन्होंने मंगलवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट किया और अधिकारियों द्वारा उनके साथ किए जा रहे व्यवहार की कड़ी आलोचना की।

‘‘‘हाउ टू किल एन आर्टिस्ट: ए स्टेप-बाय-स्टेप गाइड’ शीर्षक से कामरा ने पोस्ट किया, जिसमें पांच बिंदुओं के माध्यम से उन्होंने कटाक्ष किया :

1) आक्रोश - इतना कि ब्रांड अपना काम देना बंद कर दें।

2) अधिक आक्रोश - जब तक कि निजी क्षेत्र और कॉरपोरेट काम देना बंद न कर दें।

3) अत्यधिक आक्रोश - ताकि बड़े स्थल जोखिम न लें।

4) हिंसक आक्रोश - तब तक, जब तक कि सबसे छोटी जगहें भी अपने दरवाजे बंद नहीं कर दें।

5) पूछताछ के लिए उनके (कलाकारों के) दर्शकों को बुलाएं - कला को अपराध स्थल में बदल दें।’’

कामरा के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में एक कलाकार के पास केवल दो विकल्प बचते हैं। उन्होंने लिखा, ‘‘या तो अपनी आत्मा बेच दें और डॉलर की कठपुतली बन जाएं या अपना मुंह बंद कर लें। यह सिर्फ रणनीति नहीं है, बल्कि यह एक राजनीतिक हथियार है। चुप कराने की मशीन है।’’

ऐसी खबरें थीं कि कामरा के शो में शामिल होने वाले दर्शकों को पुलिस के सामने पेश होने का नोटिस भेजा गया था।

हालांकि, पुलिस के एक अधिकारी ने इस बात से इनकार किया।

अधिकारी ने ‘पीटीआई-’ को बताया, ‘‘यह गलत जानकारी है।’’

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