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सामाजिक ताने बाने और व्यक्तिगत द्वंद को शब्दों में उकेरती है अँखियन देखी

नई दिल्ली। यश पब्लिकेशंस द्वारा प्रकाशित आईएएस रविन्द्र कुमार की नवीनतम कृति 'अँखियन देखी' उनकी बेहद...
सामाजिक ताने बाने और व्यक्तिगत द्वंद को शब्दों में उकेरती है अँखियन देखी

नई दिल्ली। यश पब्लिकेशंस द्वारा प्रकाशित आईएएस रविन्द्र कुमार की नवीनतम कृति 'अँखियन देखी' उनकी बेहद मर्मस्पर्शी कविताओं का संकलन है। अपनी इस पुस्तक में रविन्द्र कुमार ने दिल को छू लेने वाली उन चुनिंदा घटनाओं को शब्दों में पिरोया है, जो उनके सामने घटित हुईं हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो अपनी इस पुस्तक के माध्यम से रविन्द्र कुमार ने मौजूदा समय के सामाजिक ताने बाने और व्यक्तिगत द्वंद को बेहद खूबसूरती के साथ प्रस्तुत किया है।

हालांकि इससे पहले भी रविन्द्र के चार कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं, जिनमें उन्होंने अपने बचपन और किशोरावस्था के दौरान उठे मन के भावों को व्यक्त किया था। लेकिन 'अँखियन देखी' में उनकी झांसी में तैनाती के दौरान अर्जित अनुभवों को कविताओं के रूप में संकलित किया गया है। झांसी में अपने कार्यकाल के दौरान समाज के पीड़ित और वंचित तबके की व्यथाओं ने उनके मन को झकझोर दिया। उन सभी पीड़ितों की समस्याओं का निवारण करने के दौरान उन्होंने जिस पीड़ा का अनुभव किया, उसे कविताओं के रूप शब्दबद्ध करके अपनी इस पुस्तक में संजोया है।

रविन्द्र कुमार की इस नई पुस्तक में हँसते चेहरे, थकावट, किस किस को संभालूँ , किसान का बेटा, मजदूर चाची, कलेक्टर पापा और ज़मीन सहित कुल तेईस रचनाएं हैं, जो मानव संवेदनाओं और भावनाओं के भिन्न भिन्न रूप प्रदर्शित करती हैं। इन सभी कविताओं में हर्ष का कलरव, विरह की व्यथा, प्रतीक्षा की पीड़ा और रुदन के विदारक स्वर सहित हर तरह के भाव महसूस होते हैं। इन कविताओं को पढ़कर अहसास होता है कि कवि ने कितनी कुशलता और खूबसूरती से पारंपरिक माहौल को आधुनिकता और नवीनता का आवरण पहनाया है।

कवि का परिचय: बिहार के बेगुसराय के एक छोटे से गांव बसही में जन्मे रविन्द्र कुमार की प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई। रविन्द्र बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि थे इसलिए बड़े होने पर उच्च शिक्षा के लिए रांची चले गए और आई आई टी प्रवेश परीक्षा में सफल अभ्यार्थी के रूप में चयनित हुए। मर्चेंट नेवी और शिपिंग क्षेत्र में  काम करने के दौरान इनका रुझान राष्ट्र सेवा के प्रति हुआ। तब इन्होंने नौकरी छोड़कर सिविल सर्विसेज की परीक्षा दी और अपनी कड़ी मेहनत के बल पर आईएएस अधिकारी बने। सिक्किम, उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार में विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके रविन्द्र कुमार वर्तमान में बरेली के जिलाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। रविन्द्र कुमार भारत के ऐसे पहले और एकमात्र आईएएस अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं, जो माउंट एवरेस्ट को दो बार सफलतापूर्वक चढ़ चुके हैं। अब तक इनकी आठ कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं,जिनमें 'एवरेस्ट: सपनों की उड़ान-सफर से शिखर तक' के लिए 2020 में इन्हें 'अमृतलाल नागर' पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इनके जीवन  पर आधारित दो उपन्यास 'सपनों का सारथी' तथा 'स्वप्न रथ' भी प्रकाशित हो चुके हैं और एक सच्ची कहानी संग्रह देवदूत आने वाला है।

पुस्तक का नाम: अँखियन देखी

लेखक: रविन्द्र कुमार (आईआईएस)

प्रकाशक: यश पब्लिकेशंस

मूल्य: 150/- रुपए

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