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'आखिरकार भगवान ने हमारी सुन ली', सुरंग से बचाए गए मजदूरों के परिजनों ने जताई खुशी, जश्न में डूबा परिवार

उत्तरकाशी टनल हादसे के बाद 17वें दिन आखिरकार बड़ी सफलता मिली और सभी श्रमिकों को रेस्क्यू कर बाहर निकाल...
'आखिरकार भगवान ने हमारी सुन ली', सुरंग से बचाए गए मजदूरों के परिजनों ने जताई खुशी, जश्न में डूबा परिवार

उत्तरकाशी टनल हादसे के बाद 17वें दिन आखिरकार बड़ी सफलता मिली और सभी श्रमिकों को रेस्क्यू कर बाहर निकाल लिया गया। 12 नवंबर को सुरंग में फंसे सभी 41 श्रमिकों को रेस्क्यू टीम के जज्बे और सरकार की कोशिशों द्वारा बाहर निकाल लिया गया। सुरंग से सफलतापूर्वक बचाए गए 41 श्रमिकों की चिकित्सा जांच चिन्यालीसौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में की जा रही है। मजदूरों के बाहर निकलने के बाद श्रमिकों के परिवारवालों ने भी राहत की सांस ली है। सुरंग से निकले कुछ श्रमिकों के चेहरों पर मुस्कान थी तो कुछ के चेहरे 17 दिन की परेशानियों के बाद थके हुए दिख रहे थे। एक ओर जहां श्रमिकों को दोबारा जिंदगी मिली है तो वहीं दूसरी ओर श्रमिकों के परिजनों की जान में जान आई है। श्रमिकों के परिवारवालों में खुशी का माहौल है। बता दें कि 16 दिनों के संघर्ष के बाद 17वें दिन बड़ी सफलता मिली है।

सुरंग के बाहर मौजूद लोगों ने जोरदार जयकारा लगाया और नारे गूंजने लगे और लोगों ने उन एम्बुलेंस का स्वागत किया जो श्रमिकों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ले गईं, जबकि स्थानीय लोगों ने मिठाई बांटी।

क्षेत्र में डेरा डाले चिंतित श्रमिकों के रिश्तेदार भावुक थे। कई दिन की अनिश्चितता के बाद भी वे श्रमिकों के लिए एकजुट थे। सुरंग के बाहर डेरा डाले हुए अनिल के भाई सुनील ने रुंधी आवाज में बताया, 'आखिरकार, भगवान ने हमारी सुन ली। मेरे भाई को बचाया जा सका। मैं अस्पताल ले जाते समय एम्बुलेंस में उसके साथ था।' 

उत्तरकाशी के सिल्क्यारा सुरंग से बचाए गए एक श्रमिक राम मिलन के घर जश्न का माहौल है। बेटे संदीप कुमार ने बताया, "बहुत अच्छा लग रहा है। सब लोग खुश हैं। उनसे बात हुई है। मैं केंद्र सरकार और बचाव कर्मियों का धन्यवाद करता हूं।"

श्रमिक संतोष कुमार की मां ने कहा, "हमारी संतोष से फोन पर बात हुई है, अभी वह अस्पताल में है। आज हमने दिवाली मनाई है... हम केंद्र सरकार और बचाव कर्मियों का धन्यवाद करते हैं।"

श्रमिक राम सुंदर की पत्नी शीला ने कहा, "हम बहुत खुश हैं, कल हमने उनसे फोन पर बात की थी। हम केंद्र सरकार और बचाव कर्मियों का धन्यवाद करते हैं। पूरे गांव में बहुत खुशी है।" वहीं, श्रमिक राम सुंदर की मां धनपति ने कहा, "हम बहुत खुश हैं... कल शाम को हमने दिवाली मनाई, पूरे गांव ने कल खुशी से दिवाली मनाई।"

उत्तरकाशी के सिल्क्यारा सुरंग से बचाए गए श्रमिकों में से एक बिहार के श्रमिक सोनू की मां ने कहा, "मैं बहुत खुश हूं। मैं सरकार और सभी बचाव दल के सदस्यों को धन्यवाद देती हूं... मेरे बेटे ने कहा है कि वह दो दिन में वापस लौट आएगा।"

श्रमिकों में से पश्चिम बंगाल के कूच बिहार के एक श्रमिक के परिवार ने उनके सफलतापूर्वक बचाए जाने की सूचना मिलने के बाद जश्न मनाया।  श्रमिक माणिक तालुकदार के बेटे ने कहा, "हमें बहुत खुशी है कि वे सुरंग से बाहर निकल गए...17 दिन हमें बहुत ही चिंता थी... अभी वे(माणिक तालुकदार) ठीक हैं।"

सिल्कयारा सुरंग से बचाए गए लखीमपुर खीरी के श्रमिक मंजीत की मां ने कहा, "हम बहुत खुश हैं, हमने आज दिवाली मनाई है। हमारा एक ही बेटा है। 17 दिन कैसे बीते हैं यह सिर्फ भगवान जानते हैं। 17 दिन हमारे लिए अंधेरा था, आज उजाला हुआ है। मैं केंद्र और राज्य सरकार का धन्यवाद करती हूं।"

 

12 नवंबर को यानी दिवाली वाले दिन उत्तरकाशी में निर्माणाधीन सिल्क्यारा-बारकोट सुरंग का एक हिस्सा धंस गया और 41 मजदूर फंस गए थे। यह सुरंग चार धाम परियोजना का हिस्सा है, जिसे हिमालयी भूविज्ञान की नाजुकता के कारण वर्षों से पर्यावरण संबंधी चिंताओं के कारण उठाया गया है। निर्माणाधीन सुरंग के 2 किमी लंबे हिस्से में मजदूर फंसे हुए थे। उनके पास पानी तक पहुंच थी और क्षेत्र में अच्छी रोशनी थी क्योंकि घटना के समय बिजली कनेक्शन नहीं काटा गया था। पाइप के जरिए उन्हें खाना भी मुहैया कराया जा रहा था और ऑक्सीजन भी पहुंचाई जा रही थी।

 

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