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मध्यप्रदेश वन विभाग के प्रयासों और वन ग्राम समिति की मेहनत से हो रही है वनों की बहाली

जलवायु परिवर्तन के असर को सीमित करने और वन क्षेत्र में विकास के लिए मध्यप्रदेश वन विभाग...
मध्यप्रदेश वन विभाग के प्रयासों और वन ग्राम समिति की मेहनत से हो रही है वनों की बहाली

जलवायु परिवर्तन के असर को सीमित करने और वन क्षेत्र में विकास के लिए मध्यप्रदेश वन विभाग माइक्रोप्लानिंग के माध्यम से कार्य कर रहा है। वनवासियों और स्थानीय समुदायों की जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ग्राम वन समितियों को इससे जोड़कर इस दिशा में कार्य हो रहे हैं।

स्थानीय समुदायों को नज़रअंदाज करके वनों की बहाली और विकास मुमकिन नहीं है। वनों की सुरक्षा के लिए बनाई गई योजनाओं में स्थानीय समुदायों की जनभागीदारी जरूरी है।

वन जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभाव को कम करने में जंगल सबसे सहायक सिद्ध होते हैं। जंगल अपने आप में ही एक अलग संसार को समेटे होते हैं। धरती की अमूल्य जैव विविधता को बचाए रखने के लिए भी इन जंगलों को बचाए रखना जरुरी है। यही वजह है कि ग्राम वन समितियों के सहयोग से जंगलों की बहाली पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

प्रदेश के विभिन्न वन प्रभागों की ग्राम समितियों के प्रयासों से वन बहाली का मुश्किल कार्य संभव हो सका है। ऐसी ही एक ग्राम वन समिति है पश्चिमी मंडला वन प्रभाग की मनेरी ग्राम वन समिति। इस समिति का गठन 1996 में किया गया था। ग्राम वन समिति को 186.92 हेक्टेयर के प्रबंधन का कार्य सौंपा गया था। कम्पार्टमेंट संख्या 642 आरएफ अत्यधिक निम्नीकृत वन क्षेत्र है। यह वन क्षेत्र औद्योगगिक क्षेत्र के आसपास का होने के कारण गंभीर जैविक दबाव में था। बावजूद इसके स्थानीय समुदायों ने अवैध कटाई और चराई के खिलाफ वनों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्किंग के स्टॉक मैपिंग के अनुसार योजना (वर्ष 2004-14) क्षेत्र वनस्पति से रहित था और आरडीएफ कार्य करने के लिए आवंटित किया गया था। 

साल 2003-04 और 2005-06 के बीच आरडीएफ योजना के तहत इस क्षेत्र की बहाली का काम शुरू हुआ। ग्राम वन समिति मनेरी का नेतृत्व कर रही एक महिला सुश्री कल्लू बाई मार्को ने वन के संरक्षण और प्रबंधन के लिए समुदाय को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ग्राम वन समुदाय के अथक प्रयासों और दृढ़ संकल्प के चलते आज निर्धारित क्षेत्र वनों से बहाल हो गया है। इतना ही नहीं बीते दो सालों में समुदाय ने 3 हजार 526 सागौन और 31 ईंधन के ढेर की कटाई कर लाभ कमाया है। यह वन क्षेत्र जंगलों की बहाली के उद्देश्य से ही समुदाय को आवंटित किया गया था जो अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल रहा है।  

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