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राजपथ पर धूमधाम से मना गणतंत्र का उत्सव

सेना के तीनों अंगों के जवानों की शानदार पगड़‍ियां, उजले रौबदार चेहरे, शौर्य से चमकती आंखें और बैंड की धुन पर एक साथ उठते बढ़ते संतुलित कदम आज हल्‍के कोहरे की चादर से लिपटे भव्य राजपथ पर देश के गणतंत्र का 67वां उत्सव मनाने उतरे। इस दौरान देश की सैन्य, सांस्कृतिक और लोक विरासत को भी पूरी सजधज के साथ पेश किया गया।
राजपथ पर धूमधाम से मना गणतंत्र का उत्सव

फ्रांस के राष्ट्रपति इस वर्ष की परेड के मुख्य अतिथि बनेे और गणतंत्र दिवस परेड के इतिहास में पहली बार फ्रांस के सैनिकों ने विदेशी टुकड़ी के तौर पर राजपथ पर मार्च किया। इस दौरान दुश्मन का कलेजा कंपा देने वाली हथियार प्रणालियों का भी प्रदर्शन किया गया। परेड के इंतजाम में इस वर्ष सुरक्षा को खास स्थान दिया गया था और विशिष्ट जन के साथ ही वहां मौजूद हजारों लोगों की भीड़ की सुरक्षा के लिए पूरे इलाके के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मियों की पैनी निगाहें थीं।

खुफिया सूचना थी कि आतंकी समूह आज शहर में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को निशाना बना सकते हैं हालांकि परेड देखने आई हजारों लोगों की भीड़ इस डर से एकदम बेपरवाह होकर राष्ट्रीय त्यौहार को मनाने के लिए रंग बिरंगे कपड़ों में आई और परेड का जमकर आनंद लिया। फ्रांस के राष्‍ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच बैठे थे और डेढ़ घंटे की इस परेड के दौरान मोदी को कई बार ओलांद को कुछ बताते समझते देखा गया। भारत की प्रक्षेपास्त्र प्रणाली के अलावा टी 90 भीष्म टैंक, इंफैंटरी काम्बेट व्हिकल बीएमपी 2, आकाश शस्त्र प्रणाली ब्रमोस प्रक्षेपास्त्र प्रणाली का सचल लांचर, स्मर्च प्रक्षेपास्त्र वाहन आदि परेड का मुख्य आकर्षण थे।  

जनरल आफिसर कमांडिंग (दिल्ली) लेफ्टिनेंट जनरल राजन रवीन्द्रन के नेतृत्व में सेना और पुलिस के दस्ते बैंड की मनमोहक धुनों पर सधे कदमों से राजपथ पर सलामी मंच से गुजरे और वहां देश की तीनों सेनाओं के सर्वोच्‍च कमांडर राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उनकी सलामी ली। इससे पूर्व तीन दिन की राजकीय यात्रा पर भारत आए ओलांद राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जीके साथ राजपथ पर पहुंचे जहां प्रधानमंत्राी मोदी ने उनकी अगवानी की और उन्हें तीनों सेनाओं..थल सेना, वायु सेना और नौसेना के प्रमुखों से मिलवाया।

लांस नायक मोहन नाथ गोस्‍वामी को अशोक चक्र 

परेड शुरू होने से कुछ क्षण पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और तीनों सेना प्रमुखों ने इंडिया गेट में अमर जवान ज्योति पर जाकर देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीदों को नमन किया। राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने परेड शुरू होने से पहले लांस नायक मोहन नाथ गोस्वामी को शांति के समय का देश के सर्वोच्‍च शौर्य सम्मान अशोक चक्र से (मरणोपरांत) सम्मानित किया। 9वीं पैरा (विशेष बल) के जवान मोहन ने जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में पिछले वर्ष 2-3 सितंबर की रात को आतंकवादियों से लड़ते हुए अदम्य साहस का परिचय दिया था। पुरस्कार उनकी पत्नी भावना गोस्वामी ने ग्रहण किया।

गणतंत्र दिवस समारोह की खास बातें 

-  सुरक्षा कारणों से इस बार गणतंत्र दिवस परेड में 25 मिनट की कटौती की गई। इसे 115 मिनट की बजाय 90 मिनट में पूरा किया गया। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जहां खाकी रंग के बंद गले के सूट के साथ केसरिया पगड़ी पहने थे, वहीं राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने काली अचकन के साथ काली टोपी पहनी थी।

- गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनने वाले ओलांद फ्रांस के पांचवे शासन प्रमुख हैं। फ्रांस के शासन प्रमुख सबसे अधिक बार मुख्य अतिथि बने है। इसके बाद भूटान और फिर रूस का स्थान आता है।

- परेड में इस बार फ्रांस के सैनिकों के एक दस्ते को शामिल किया गया। यह पहला अवसर है, जब किसी विदेशी सैन्य टुकड़ी ने गणतंत्र दिवस समारोह की परेड मेें हिस्सा लिया। फ्रांस के 76 सैनिकों का यह दस्ता वहां की सबसे पुरानी रेजिमेंट में से एक है। 

परेड में 36 सदस्य श्वान दस्ते ने हिस्सा लिया जिसमें 24 लेब्राडोर और 12 जर्मन शेफर्ड शामिल थे। 26 वर्ष बाद श्वान दस्ते को गणतंत्र दिवस परेड में शामिल किया गया।

- गणतंत्र दिवस समारोह के लिए नई दिल्ली में सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए। पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के करीब 50 हजार जवान तैनात किये गए थे।

-  राजधानी में दो महत्वपूर्ण स्थानों पर विमान रोधक तोपें लगाई गई थीं। राजपथ के इर्द गिर्द 45 इमारतों पर सुरक्षा बलों के सटीक निशानेबाजों को तैनात किया गया। इस दौरान इंदिरा गांधी अंतरराष्टीय हवाई अडडे से विमानों की आवाजाही पर रोक थी।

- इस बार देश की सांस्कृतिक विविधताएं और विकास को दर्शाने वाली कुल 23 झांकियां निकलींं।

- संविधान निर्माता बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की 125 वीं जयंती के अवसर पर उनकी विशालकाय मूर्ति वाली एक झांकी विशेष आकर्षण का केन्द्र रही।

 

 

 

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