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बरेली से जारी हुआ फतवा: मनाएं आजादी का जश्न, घरों और दुकानों पर फहराएं तिंरगा

स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराने को लेकर बरेली स्थित दरगाह आला हजरत ने अपने एक अहम फतवे में कहा है कि जश्न-ए-आजादी पर झंडा फहराने या जश्न मनाने में किसी तरह का कोई हर्ज नहीं है। फतवे में मुसलमानों से कहा गया है कि आजादी के जश्न में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लें।
बरेली से जारी हुआ फतवा: मनाएं आजादी का जश्न, घरों और दुकानों पर फहराएं तिंरगा

उत्तर प्रदेश के बरेली में स्थित दरगाह आला हजरत ने रविवार को एक फतवा जारी कर मुस्लिम समुदाय के लोगों को आजादी के जश्न में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने को कहा है। फतवे में कहा गया है कि ऐसा करना कतई इस्लाम के खिलाफ नहीं है। फतवे में दरगाह के आलिमों ने कहै है कि जश्न मनाने के लिए घरों दुकानों और स्कूलों पर झंडा फहराना कहीं से भी इस्लाम के खिलाफ नहीं है। इसलिए तमाम मुसलमान परे जोश ओ खरोश के साथ आजादी का जश्न मनाएं। दरअसल यह फतवा एक सवाल के जवाब में जारी किया गया है। गुजरात के रहने वाले मुहम्मद अली नाम के एक शख्स ने दरगाह आला हजरत से सवाल किया था कि क्या 15 अगस्त और 26 जनवरी पर स्कूल, घर, दुकान और प्रतिष्ठान पर तिरंगा फहराया जा सकता है और आजादी के जश्न में हिस्सा लेना इस्लाम की नजर में कितना सही है।

सवाल के जवाब में बरेली शरीफ स्थित दरगाह आला हजरत के मदरसा मंजरे इस्लाम के मुफ्ती मुहम्मद सलीम नूरी ने आज फतवा जारी कर कहा है कि इस्लामी कानून के उसूलों का सम्मान करते हुए मुल्क का झंडा भी फहरा सकते हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर यह है कि आजादी के जश्न में उन मुस्लिम उलेमा और मजहबी रहनुमाओं को श्रद्वांजलि पेश करें, जिन्होंने जालिम अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ आवाज उठाई थी और अपने जान और माल कुर्बान कर दिए। नूरी ने फतवे में कहा कि एेसा करके उन फिरकापरस्तों की साजिश को भी नाकाम किया जा सकता है, जो मुसलमानों के खिलाफ मुल्क में दुश्मनी का इल्जाम लगाते रहते हैं। एेसी ताकतों को जवाब देने के लिए आजादी के जश्न में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।

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