आज सुबह (सोमवार) कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष, मल्लिकार्जुन खड़गे, नेतृत्व में विपक्षी दलों की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का उद्देश्य संयुक्त उम्मीदवार की घोषणा करना और संसद की मानसून सत्र में विपक्ष की जमीन मजबूत करना था। चर्चा का मुख्य मुद्दा था कि विपक्ष एक "गैर-राजनीतिक" और संविधान-उन्मुख चेहरा किसे घोषित करे, जो सरकार के उम्मीदवार के विपक्ष में एक साझा विकल्प हो सकता है।
सीपी राधाकृष्णन की उम्मीदवारी को एनडीए की रणनीतिक चाल माना जा रहा है, क्योंकि वे तमिलनाडु से आते हैं। जहां एनडीए का प्रभाव बढ़ाना भाजपा के लिए महत्वपूर्ण है। राधाकृष्णन का राजनीतिक सफर शुद्ध एवं सम्मानजनक छवि के साथ रहा है और उन्होंने कई राज्यों में राजभवन की जिम्मेदारियां निभाईं हैं।
वहीं, इंडिया ब्लॉक अपनी साझी ताकत को ध्यान में रखते हुए इस चुनाव में कांग्रेस-रहित, क्षेत्रीय दलों को जोड़ने की रणनीति पर विचार कर रहा है। पहले के विरोधी उम्मीदवार जैसे कि डिप्लोमैट ग़ैर-राजनीतिक व्यक्तित्व जैसे पूर्व में विजयी रहीं मार्गरेट अल्वा—को विचार में लेने का रुझान था।
उपराष्ट्रपति चुनाव अब कुछ ही दिनों में, 9 सितंबर को आयोजित होगा। नामांकन की अंतिम तिथि 21/22 अगस्त है। NDA की स्थिति मजबूत दिखती है क्योंकि उनके पास संसदीय मतदाताओं में बहुमत है। लेकिन INDIA ब्लॉक की एकजुटता और साझा उम्मीदवार के चुनाव से बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में समीकरण बदल सकते हैं।
अब देखना यह है कि क्या विलंबित विपक्ष सशक्त उम्मीदवार खड़े कर दे पाता है या फिर NDA की रणनीतिक मजबूती से चुनाव निष्कर्ष रूप संकल्पित हो जाएगा।