अरसे बाद लाल किले के पास आइ20 कार बम विस्फोट से सुरक्षा और खुफिया तंत्र पर कई सवाल उभरे, कथित तौर पर डॉक्टरों के फरीदाबाद मॉड्यूल के तंत्र कई राज्यों में मगर पुलिस देर से जागी
दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को शाम 6:52 बजे एक सफेद आइ20 कार में हुए धमाके में कथित तौर पर उसे चला रहा डॉ. उमर उन-नबी सहित 12 लोगों की मौके पर ही मौत और 20 के जख्मी होने और 22 गाड़ियों के उसकी जद में आने से अरसे बाद दहशत तारी हो गई। बाद में अब तक मौत का आंकड़ा 14 हो गया। शुरुआत में पुलिस दुर्घटना ही मानकर चल रही थी, जिससे सरकार को भी उसे आतंकी हमला बताने में दो दिन लग गए। आखिरकार पुलिस को सुराग मिले और सूत्र जोड़े गए, तो बड़ी और आतंकी साजिश्ा का अंदाजा लगा, जिसके तार, बकौल पुलिस, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश से जुड़े हैं। इसमें मारे गए नबी की तरह ज्यादातर डॉक्टरों का नेटवर्क फरीदाबाद के अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ा बताया जाता है। इसी वजह से इसे ‘फरीदाबाद मॉड्यूल’ और ‘व्हाइट कॉलर टेरर’ (सफेद पोश आतंक) बताया जा रहा है।

विस्फोट के वक्त का नजारा
हालांकि कई सवाल अभी अनुत्तरित हैं। मसलन, घटनास्थल से अमोनिया नाइट्रेट के निशान तो मिले लेकिन डिटोनेटर और बैटरी नहीं मिली, तो इसके मायने क्या हैं? पुलिस को श्रीनगर के पास काजीकुंड में संदेहास्पद पोस्टर अक्टूबर के मध्य में ही मिले थे तो इतनी भारी मात्रा में आरडीएक्स और हथियार कैसे दिल्ली तक बेरोकटोक कैसे पहुंच आए? फिर आइ20 कार तकरीबन 11 घंटे दिल्ली में घूमती रही और किसी चेकपोस्ट पर क्यों नहीं पकड़ी गई?
खैर, अब पुलिस की कहानी के मुताबिक, इस हमले की कड़ी कश्मीर के अनंतनाग जिले के नौगाम से जुड़ती है। पुलिस के मुताबिक अक्टूबर के मध्य में वहां दीवालों पर कुछ पोस्टर लगे देखे गए। पुलिस को संदेह है कि ये चेतावनी देते पोस्टर जैश-ए-मोहम्मद के हो सकते हैं। स्थानीय लोगों को उसमें कुछ भी अलग नहीं लगा क्योंकि वहां इस तरह के पोस्टर पहले भी लगाए जाते रहे हैं।
लेकिन श्रीनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. जीवी संदीप चक्रवर्ती को यह कुछ असामान्य लगा और उन्होंने जांच शुरू की। यह संयोग ही है कि एसएसपी चक्रवर्ती खुद पेशे से डॉक्टर हैं और उन्होंने जिस मॉड्यूल का पर्दाफाश किया, वह डॉक्टरों का समूह मिल कर चला रहा था। चक्रवर्ती को सीसीटीवी फुटेज से तीन ऐसे लोगों का पता चला जिन पर पहले भी पत्थरबाजी के अपराध दर्ज थे। उन लोगों को पकड़ने से जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में फैले नेटवर्क का खुलासा हुआ और इसी के सहारे पुलिस फरीदाबाद पहुंची, जहां 2,900 किलोग्राम विस्फोटक, बम बनाने की सामग्री और एके-सीरीज राइफलें बरामद की गईं। श्रीनगर पुलिस ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी मॉड्यूल में शामिल कई कश्मीरी डॉक्टरों और अन्य लोगों को गिरफ्तार किया। पहले माना जा रहा था कि इस दबाव में ही 10 नवंबर को नबी ने दिल्ली में लाल किले के पास हड़बड़ी में ब्लास्ट कर दिया। वैसे, वह लाल किले के पास सुनहरी मस्जिद की पार्किंग में तीन घंटे तक कार में ही बैठा रहा। शायद वह उस दौरान अपने हैंडलर्स से निर्देश का इंतजार कर रहा था।
इस हमले में दिल्ली पुलिस की सबसे बड़ी विफलता यह रही कि जिस विस्फोटक से लदी कार को उमर उन-नबी चला रहा, वह लगभग पूरी दिल्ली में घूमती रही। लगभग 1300 सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद उमर की आइ20 कार इंडिया गेट, शाहजहां रोड, रेल भवन, कर्तव्य पथ, तुगलक रोड, लोधी रोड, अरबिंदो मार्ग, सीपी आउटर सर्कल, बाराखंबा के बाद आखिरी बार लाल किला में दिखाई पड़ी। लगभग 3.16 बजे नबी ने कार को लाल किले की पार्किंग में खड़ा कर दिया और 6.23 बजे कार लेकर वहां पहुंचा जहां विस्फोट हुआ।
इस मामले में हर दिन नए खुलासे और गिरफ्तारियां हो रही हैं। हाल ही में एनआइए ने आमिर रशीद नाम के व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया है। आमिर कश्मीर के पंपोर का रहने वाला है। जिस कार से ब्लास्ट हुआ, वह कार आमिर के नाम पर ही रजिस्टर्ड है। आमिर को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का दावा यह भी है कि यह विस्फोटक सामग्री बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने के लिए की जा रही तैयारी का हिस्सा था। मिशन का नाम डी-6 यानी दिसंबर 6 था। इस तारीख पर ही बाबरी में विवादास्पद ढांचे को गिराया गया था। इस दिन देश के छह बड़े शहरों में हमला होना था। इस मिशन की मास्टरमाइंड डॉ. शाहीन शाहिद थी, जिसे ‘मैडम सर्जन’ नाम से भी जाना जाता था। वह जैश-ए-मोहम्मद के लिए काम कर रही थी। डॉ. शाहीन की डायरी और अन्य दस्तावेजों से पता चला है कि वह इस मिशन के लिए भर्ती, फंडिंग और लॉजिस्टिक्स की देखरेख कर रही थी। उसके साथ दो अन्य डॉक्टर डॉ. मुजम्मिल अहमद गनई और डॉ. उमर उन नबी भी शामिल थे।
शीशे टूटे और दिल भी
यह कोई सामान्य विस्फोट नहीं था, बल्कि कई साल बाद हुआ आतंकी हमला था, जिसने दिल्ली को एक बार फिर डरा दिया। हमले के बाद जो बात सामने आई, वह ज्यादा डराने वाली थी। यह विस्फोट उन लोगों की साजिश थी, जिन पर जान बचाने का जिम्मा होता है। इस विस्फोट में शामिल सभी संदिग्ध आतंकी डॉक्टर हैं। इस विस्फोट के बाद व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल यानी पेशेवरों के संगठन की भयावह तस्वीर सामने आई। इस मॉड्यूल में 8 आतंकी मिल चुके हैं, जिसमें से 6 डॉक्टर हैं। इन 6 डॉक्टरों में से 3 कश्मीर के पुलवामा का और एक काजीगुंड का है। इन डॉक्टरों के साथ एक मौलाना और एक इमाम को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। इन सभी का दिल्ली सटे फरीदाबाद में चल रहे एक मेडिकल विश्वविद्यालय अल फलाह से कनेक्शन रहा है। दिल्ली धमाके से कुछ धमाके से कुछ घंटे पहले, कश्मीर पुलिस ने दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में छापेमारी की थी और आतंकी हमले का पर्दाफाश किया था।
व्हाइट कॉलर टेरर
फॉरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक, कार में 2 किलो से ज्यादा अमोनियम नाइट्रेट और पेट्रोलियम-आधारित विस्फोटक भरे थे। कार में भरा आइआइडी, शहर के बड़े इलाके को दहलाने के लिए तैयार था। इस धमाके की कहानी कश्मीर घाटी से शुरू होकर हरियाणा के धौज गांव तक पहुंचती है। वहां यह ‘व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल’ दो साल से 2,900 किलोग्राम से ज्यादा विस्फोटक इकट्ठा कर रहा था। उसका लक्ष्य दिल्ली-एनसीआर में छह बड़े धमाके करने का बताया जाता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतना विस्फोटक आया कहां से है। जांच एजेंसियों की मानें तो 3200 किलो विस्फोटक पहुंचा है, जिसमें 2900 किलो ग्राम विस्फोटक का पता चल गया है, मगर अभी भी 300 किलो विस्फोटक गायब है। फरीदाबाद से 10 नवंबर की सुबह 2900 किलो विस्फोटक बरामद हुआ था। सुरक्षा एजेंसियां 300 किलोग्राम लापता विस्फोटक की तलाश में कई राज्यों में छापेमारी कर रही हैं।
बरामद अमोनियम नाइट्रेट फर्टिलाइजर के रूप में उपलब्ध रहता है। हरियाणा के नूंह (मेवात) जिले से फरीदाबाद के धौज गांव तक यह पहुंचा, जिसे दो फर्टिलाइजर सेलर्स ने सप्लाई किया था। इसे मेडिकल सप्लाई के बहाने वहां रखा गया था। अल-फलाह यूनिवर्सिटी के किराए के कमरों में इसे इकट्ठा किया गया था, जहां डॉ. मुजम्मिल शकील और उमर नबी काम करते थे।
दिल्ली में विस्फोट से कुछ दिन पहले पुलिस ने फरीदाबाद में लगभग 2900 किलोग्राम विस्फोटक, डेटोनेटर, टाइमर और बम बनाने की अन्य सामग्री बरामद की गई थी। पुलिस के मुताबिक, इससे डॉ. मोहम्मद नबी उमर शायद कार में विस्फोट लाद कर चल पड़ा। जांच एजेंसियों के अनुसार, उसने 9 नवंबर की रात 11:30 बजे से 10 नवंबर को विस्फोट होने तक विभिन्न इलाकों में कार चलाई। यह दिल्ली की सुरक्षा में बड़ी चूक साबित हुई। ह्युंडई आइ20 कार सुबह 7:45 बजे फरीदाबाद से दिल्ली पहुंची और शाम 6:52 बजे तक (करीब 11 घंटे) बिना रुकावट घूमती रही। विपक्ष ने इसे भारी खुफिया नाकामी बताया, खासकर जब जेईएम की पहले से खुफिया इनपुट्स मौजूद थीं।
अनुच्छेद 370 का साया

पुलवामा में उमर का घर ढहाया गया
साल 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने पर कश्मीर घाटी में गुस्सा भड़का था। जेइएम जैसे संगठनों ने इसे और हवा दी। पुलवामा के एक छोटे से गांव में रहने वाला उमर नबी, महत्वाकांक्षी मेडिकल स्टूडेंट, साजिश की कड़ी का पहला हिस्सेदार बना। अनंतनाग के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाला उमर, टेलीग्राम के जरिये जेइएम के संपर्क में आया था। उमर जैसे और भी लोग इस योजना में बाद में जुड़ते चले गए। इनमें से एक लखनऊ की डॉक्टर, शाहीन सईद भी है। प्रयागराज मेडिकल कॉलेज से गोल्ड मेडलिस्ट शाहीन के पिता रिटायर्ड क्लर्क हैं और भाई इंजीनियर है। कोविड के दौरान ऑनलाइन लेक्चर्स के बीच टेलीग्राम के जरिये ही वह भी जेइएम से जुड़ी।
इन सबमें एक और महत्वपूर्ण कड़ी हरियाणा के फरीदाबाद में अल-फलाह विश्वविद्यालय रहा। 1997 में यह एक इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में शुरू हुआ था। 2014 में हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटी एक्ट से इसे निजी विश्वविद्यालय का दर्जा मिला। यूजीसी मान्यता प्राप्त और नैक के ए ग्रेड वाला यह विश्वविद्यालय मुस्लिम बहुल धौज गांव में है। 76 एकड़ कैंपस वाले इस विश्वविद्यालय में मेडिकल, इंजीनियरिंग, लॉ कोर्स चलते हैं। जेइएम के लिए यह कैंपस सुरक्षित अड्डा बन गया। दिल्ली से महज 30 किमी की दूरी भी हर तरह का सामान लाने ले जाने के लिए एकदम मुफीद थी।
सफेद कोट पर काला दाग
इस विस्फोट में कोई एक व्यक्ति या संगठन शामिल नहीं था। डॉ. शाहीन सईद ‘जमात-उल-मोमिनात’ नाम से जेइएम की महिला विंग को लीड कर रही थी। ये लोग मिल कर मेडिकल सप्लाई के नाम पर दवाओं के बहाने अमोनियम नाइट्रेट जैसे विस्फोटक खरीद रहे थे। इसी दौरान शाहीन की मुलाकात मुजम्मिल शकील से हुई। शकील भी पुलवामा में डॉक्टर था। वह अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में लेक्चरर था। शकील वहां कमरा किराए पर लेकर रहता था, जिसमें विस्फोटक इकट्ठा किया जाने लगा।
कार में विस्फोटक ले जाने वाला उमर नबी अल-फलाह में असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी कर रहा था। उमर को अनंतनाग कॉलेज से एक मरीज की मौत के लिए जिम्मेदार मान कर नौकरी से निकाल दिया गया था। उसके साथ दूसरे डॉक्टर, अदील मजीद राथर (सहारनपुर), मोहम्मद अरिफ (कानपुर का जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज) और फारूक (हापुड़ का जीएस मेडिकल कॉलेज) भी शामिल हुए। इनमें नौगाम मस्जिद में नमाज पढ़ाने वाला शोपियां का इरफान अहमद, गांदरबल का जमीर अहमद आहंगर उर्फ मुतलाशा, ‘फर्जंदान-ए-दारुल उलूम देवबंद’ समूह का सदस्य और नूंह (मेवात) का हाफिज मोहम्मद इश्तियाक शामिल था।
आतंक का यह नया मॉड्यूल सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का सबब है, क्योंकि अब आतंक नए-नए रूप धर कर सामने आ रहा है।
अब तक क्या हुआ

आतंक का सायाः विस्फोट के बाद जांच करते अधिकारी
. 10 नवंबर 2025, शाम लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास रेड लाइट पर सफेद हुंडई आइ 20 कार में विस्फोट। 14 लोगों की मौत, कई घायल। पहले हादसा लगने वाले विस्फोट की क्षमता देखकर आतंकवादी घटना की शंका।
. जांच में पता चला, कार उमर मोहम्मद उर्फ उमर उन नबी चला रहा था। विस्फोट के तार अल फलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद से जुड़े। नबी यहां पढ़ाता था।
. कश्मीर के पहलगाम का रहने वाले नबी का पहलगाम वाला घर तोड़ा गया।
. अल फलाह यूनिवर्सिटी का ही डॉक्टर मुजम्मिल फरीदाबाद में गिरफ्तार। लगभग 2900 किलो विस्फोटक बरामद।
. अल फलाह यूनिवर्सिटी से ही डॉ. शाहीन सईद का सुराग मिला। गिरफ्तार। भारत में जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) की महिला शाखा चलाने का आरोप।
. डॉ. शाहीन के साथ, डॉ. मुजफ्फर अहमद, डॉ. आदिल अहमद राथर और डॉ. मुजम्मिल शकील भी गिरफ्तार। जम्मू-कश्मीर पुलिस और स्टेट मेडिकल काउंसिल से मिली जानकारी के बाद, नेशनल मेडिकल कमीशन ने चारों संदिग्ध डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया।
. जारी जांच के बीच ही कश्मीर के नौगाम पुलिस स्टेशन में ब्लास्ट। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव प्रशांत लोखंडे ने हादसे की जानकारी दी। रात 11:20 बजे हुए विस्फोट में, 9 लोगों की मौत, 27 पुलिसकर्मी, 2 अधिकारी और 3 लोग घायल।
. प्रशांत लोखंडे ने बताया, नौगाम पुलिस स्टेशन ने एक पोस्टर से मिली जानकारी के आधार पर एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था। इसी मामले भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री और रसायन बरामद किए गए थे। ये वही विस्फोटक थे, जो अल फलाह यूनिवर्सिटी के डॉक्टर मुजम्मिल यहां से बरामद हुए थे।
. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 2 और डॉक्टरों को हिरासत में लिया। दोनों डॉक्टर अल फलाह यूनिवर्सिटी के हैं।
. गिरफ्तार संदिग्ध डॉक्टरों और डॉक्टर मुजम्मिल के मोबाइल फोन की कॉल डीटेल रिपोर्ट से बड़े नेटवर्क का खुलासा।
. एजेंसियों ने डॉक्टरों की लिस्ट तैयार की, जिसमें अल फलाह यूनिवर्सिटी से पढ़े और वहां काम करने वाले डॉक्टरों की तादाद ज्यादा है। इनमें से कई डॉक्टरों के फोन बंद। एक दर्जन से ज्यादा प्रोफेशनल की तलाश है
कब-कब दहली दिल्ली

25 मई 1996: लाजपत नगर सेंट्रल बाजार में विस्फोट, 16 लोगों की मौत।
1 अक्टूबर 1997: सदर बाजार के पास दो विस्फोट, 30 घायल।
10 अक्टूबर 1997: शांतिवन, कौड़िया पुल और किंग्सवे कैंप इलाकों में तीन विस्फोट, 1 की मौत, लगभग 16 घायल।
18 अक्टूबर 1997: रानी बाग बाजार में विस्फोट, 1 की मौत, लगभग 23 घायल।
26 अक्टूबर 1997: करोल बाग बाजार में दो विस्फोट, 1 की मौत, लगभग 34 घायल।
30 नवंबर 1997: लाल किला इलाके में दो विस्फोट, 3 की मौत, 70 घायल।
30 दिसंबर 1997: पंजाबी बाग के पास बस में विस्फोट, 4 की मौत, लगभग 30 घायल।
18 जून 2000: लाल किला इलाके के पास दो विस्फोट, 2 की मौत, लगभग दर्जनभर घायल।
16 मार्च 2000: सदर बाजार में विस्फोट, 7 घायल।
27 फरवरी 2000: पहाड़गंज में विस्फोट, 8 घायल।
14 अप्रैल 2006: जामा मस्जिद में दो विस्फोट, 14 घायल।
22 मई 2005: लिबर्टी और सत्यम सिनेमा हॉल में दो विस्फोट, 1 की मौत, लगभग 60 घायल।
29 अक्तूबर 2005: सरोजिनी नगर, पहाड़गंज और गोविंदपुरी में तीन विस्फोट, लगभग 60 से ज्यादा की मौत, 100 से ज्यादा लोग घायल।
13 सितंबर 2008: करोल बाग के गफ्फार बाजार, कनॉट प्लेस, बाराखंबा रोड और ग्रेटर कैलाश 1 में विस्फोट, 30 से ज्यादा लोगों की मौत, 100 से ज्यादा घायल।
27 सितंबर 2008: महरौली फूल बाजार में विस्फोट, 3 मरे, 23 घायल।
25 मई 2011: दिल्ली हाइकोर्ट पार्किंग में विस्फोट, कोई नुकसान नहीं।