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इंदौर/जहरीला पानीः अफसोस बहुत, जवाबदेही कोई नहीं!

इंदौर में दूषित पानी से कई जानें चली गईं, आरोप-प्रत्यारोप, रोष प्रदर्शन के सिवाय अभी भी ठोस कार्रवाई का...
इंदौर/जहरीला पानीः अफसोस बहुत, जवाबदेही कोई नहीं!

इंदौर में दूषित पानी से कई जानें चली गईं, आरोप-प्रत्यारोप, रोष प्रदर्शन के सिवाय अभी भी ठोस कार्रवाई का अभाव, दोषी तक तय नहीं

कभी वो संकरी गलियां सीमेंट से पक्की रही होंगी। अब ये गलियां खुदाई से उधड़ी हुई हैं। जगह-जगह जेसीबी से खुदाई चल रही है, सड़कों पर लाल और नीले रंग के पानी के टैंकर दौड़ रहे हैं, और गलियां पानी-कीचड़ से भर गई हैं। ये इंदौर का भागीरथपुरा इलाका है, जहां अधिकांश लोग पिछले दिनों उल्टी-दस्त के शिकार रहे हैं। कुछ अस्पताल में अभी भी भर्ती हैं और जिंदगी-मौत के बीच झूल रहे हैं। कुछ अस्पताल से लौट आए हैं और सामान्य होने की कोशिश में हैं। लोगों में नाराजगी है कि इतनी मौतों (11 जनवरी तक सरकारी आंकड़ा 21 है) के बाद भी उनकी वैसी सुनवाई या त्वरित कार्रवाई नहीं हो रही है जैसी होनी चाहिए। नेताओं, अधिकारियों के आने का सिलसिला जारी है, लेकिन पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है। 

इस पूरे मसले पर मध्य प्रदेश के हाइकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने दायर जनहित याचिकाओं पर 6 जनवरी को सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त टिप्पणी की। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने कहा कि ‘‘घटना से दुनियाभर में इंदौर की छवि को नुकसान पहुंचा है। देश का सबसे स्वच्छ शहर दूषित पानी की वजह से चर्चा का विषय बन गया। स्वच्छ पानी नागरिकों का मौलिक अधिकार है। दुखद है कि पूरे शहर में दूषित पानी वितरित हो रहा है।’’ कोर्ट ने ताकीद की कि ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए सख्त कदम उठाए जाएं।

हाइकोर्ट ने निर्देश दिए कि तत्काल साफ पानी की व्यवस्था की जाए। कोर्ट ने प्रभावित क्षेत्रों में सरकारी खर्च पर तुरंत साफ पानी की आपूर्ति के लिए कहा। तुरंत ही खराब और दूषित पाइपलाइनों, ओवरहेड टैंक और बोरवेल के पानी का उपयोग बंद करने के निर्देश दिए गए। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन को अगली सुनवाई के लिए 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये अपना पक्ष रखें और नई विस्तृत रिपोर्ट पेश करें क्योंकि अभी किए जा रहे काम अपर्याप्त हैं।

यह सातवां साल है, जब इंदौर ने लगातार देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीता है। अभी भी गली मुहल्ले में कचरा उठाने की मुहिम जारी है। सड़कें साफ दिखती हैं लेकिन इन साफ सड़कों के नीचे ड्रेनेज और पीने के पानी की पाइप लाइनें एक साथ चलती हैं। कहीं-कहीं तो आलम यह है कि ड्रेनेज चैंबर से बिलकुल सटे हुए या ऊपर नर्मदा जल के चैंबर बने हुए हैं। भागीरथपुरा में यही गलती जानलेवा साबित हुई। यहां नर्मदा पाइप लाइन में ड्रेनेज लाइन का पानी मिल गया और भयंकर हैजा फैल जाने से कई लोग मर गए।

पत्नी की फोटो के सामने राजू ध्रुवकर

70 साल की गीताबाई ध्रुवकर उन्हीं में से एक हैं। गीताबाई अपने पीछे एक बेटा और पति छोड़ गई हैं। वे और उनके पति एक स्थानीय फैक्ट्री में धागा कटर के रूप में काम करते थे। उनके बेटे बताते हैं कि पानी साफ दिखता था, लेकिन कई दिनों से गंध आ रही थी। फिर धीरे-धीरे पानी पीला होना शुरू हुआ और मटमैला हो गया। उनके पति राजू ध्रुवकर बताते हैं, ‘‘उनको केवल अस्थमा था और कोई दिक्कत नहीं थी। उल्टी-दस्त ज्यादा हो जाने से पहले स्थानीय डॉक्टर को दिखाया। उसने सरकारी अस्पताल ले जाने की सलाह दी। दो तीन दिन सरकारी एमवाय अस्पताल (महाराजा यशवंत राव होल्कर) में रखने पर भी जब कोई सुधार नहीं हुआ, तो निजी अरबिंदो अस्पताल ले गए। वहां उसने दम तोड़ दिया।’’

गंदे पानी से हाहाकार मचे 18 दिन हो चुके हैं लेकिन अब तक यहां स्थिति सुधरी नहीं है। लोगों में अभी भी गुस्सा है। लोगों की मांग है कि वर्तमान कलेक्टर और तत्कालीन निगमायुक्त शिवम शर्मा, पूर्व निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव, निलंबित अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और निलंबित कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव के विरुद्ध गैर इरादतन हत्या की धारा (भारतीय दंड संहिता की धारा 105, 106, 125, 127) में एफआइआर दर्ज करने की मांग की है।

नाम न छापने की शर्त पर कुछ लोगों का कहना है कि पानी में ड्रेनेज का पानी मिलने की मुख्य वजह वहां बनी पुलिस चौकी है। जहां पहली बार रिसाव पाया गया वहां पुलिस चौकी का शौचालय बना हुआ है। शौचालय की वेस्ट लाइन को ठीक से ड्रेनेज में नहीं जोड़ा गया। यह अपशिष्ट एक खुले गड्ढे में खाली हो रहा था, जो सीधे पीने के पानी की पाइपलाइन के ऊपर था, वहां से ही सीवेज का पानी पीने के पानी में मिल गया। एक स्थानीय रहवासी ने आउटलुक को बताया, ‘‘पुलिस चौकी के लोगों पर सबसे पहले कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन भारत में पुलिस का कुछ नहीं बिगड़ता। मेरी मां मौत से लड़ कर एक दिन पहले घर पहुंची हैं। मैं उनकी बुरी हालत को कभी नहीं भूल सकता।’’

मामले की जांच के लिए राज्य सरकार ने एक कमिटी का गठन किया है लेकिन जांच सुस्त है और काम बहुत धीमा। अभी भी नगर निगम के सामने जल वितरण की 25 किलोमीटर पाइप लाइन को पूरी तरह बदलना सबसे बड़ी चुनौती है। अब तक कुल छह किलोमीटर की लाइन का काम ही हो सका है। जिस रफ्तार से काम हो रहा है लगता नहीं कि जल्द ही वहां राहत मिलेगी। भागीरथपुरा की 50 हजार से ऊपर की आबादी 40 साल पुरानी पाइप लाइनों के भरोसे ही है। इन पाइप लाइनों को बदलने की लंबे समय से मांग की जा रही थी। पाइप लाइनों को बदलने के लिए करीब 4 साल पहले 14 किलोमीटर की लाइन बदलने के लिए टेंडर जारी किए गए थे। लेकिन प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो सकी।

गंदा पानी आने से भागीरथपुरा में पानी का संकट गहरा गया है। नर्मदा जल की आपूर्ति के बाद निजी और सरकारी बोरिंग के पानी में भी फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया पाया गया है। यह खतरनाक बैक्टीरिया है, जो हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी बीमारियों का कारक होता है। 69 में से 35 सैंपल फेल होने के बाद स्थानीय प्रशासन ने पूरे क्षेत्र के बोरिंग बंद करा दिए हैं। अब तक 3000 से ज्यादा मरीज उल्टी दस्त का इलाज करा रहे हैं।

अब चेतेः खुदाई कर लीकेज पता करने की कोशिश

पहली बार 28-29 दिसंबर के बीच उल्टी दस्त के मरीज सामने आए थे। लेकिन इसका कारण समझ में आता, प्रशासन चेतता उससे पहले स्थिति गंभीर हो गई। तीन दिन तक लोग दूषित पानी पीते रहे। पूरे क्षेत्र में लगभग 600 से ज्यादा निजी और सार्वजनिक बोरिंग हैं। यहां रहने वाली रोमा देवी कहती हैं, ‘‘25 दिसंबर से पानी में नाली जैसी गंध आ रही थी। शिकायत की पर गरीब लोगों की कहीं सुनवाई नहीं है। गरीब लोग मरें तो मरें, किसी को क्या फर्क पड़ता है। मेरे 3 साल के बच्चे को दस्त और बुखार है। दवा चल रही है पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा। हम सिर्फ भगवान के भरोसे हैं।’’

हर घटना के बाद जैसा की होता है, आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। मीडियाकर्मी के सवाल पर मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अभद्र टिप्पणी ने पूरे मामले की गंभीरता को लगभग खत्म ही कर दिया है। प्रदूषित पानी की बहस से मामला उनके बयान की ओर मुड़ गया। विजयवर्गीय अब किसी भी तरह की टिप्पणी से इनकार कर देते हैं। पहले दिए गए बयान में उन्होंने बस इतना ही कहा था, ‘‘करीब 1400 से 1500 लोग प्रभावित हुए थे, जिनमें से 198 लोग अस्पताल में भर्ती हैं। अभी दो और लोगों को भर्ती कराया गया है। कुछ लोगों को डिस्चार्ज भी किया गया है।’’ वे इस इलाके से विधायक भी हैं। हालांकि वे हर दिन सुबह दो घंटे इलाके में गुजारते हैं और व्यवस्था का जायजा लेते हैं। उन्होंने पीड़ितों के मुफ्त इलाज की व्यवस्था की है, जिससे लोगों में उनके प्रति नाराजगी कम हो रही है।

आउटलुक ने जब इस पूरे मुद्दे पर इंदौर शहर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव से बात करना चाहा तो उन्होंने बस इतना ही कहा, ‘‘मेरे कार्यकाल में यह सब हुआ इसका मुझे बहुत दुख है। महापौर होने के नाते जिम्मेदारी मेरी है। यह मेरी नैतिक जिम्मेदारी थी।’’ भार्गव किसी भी तरह की अन्य टिप्पणी से इनकार कर देते हैं। वे बस इतना ही कहते हैं, ‘‘नगर निगम का पूरा अमला लगा हुआ है। हम हर समस्या का समाधान करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। जल्द ही सब ठीक हो जाएगा और लोगों को साफ पानी मिलने लगेगा।’’

वहीं रहने वाली किरण का गुस्सा कम होने का नाम नहीं लेता। वह कहती हैं, ‘‘2 साल से शिकायत कर रहे थे। कोई सुनने नहीं आया।’’ जब उनसे पूछा गया, आप लोगों ने आंदोलन क्यों नहीं किया? वह गुस्से से कहती हैं, ‘‘ड्रेनेज लाइन पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। हम आंदोलन करें कि कमाने जाएं। हर घर में उल्टी दस्त के मरीज हैं। इलाज फ्री हो जाने से क्या होता है। हम बाजार से खरीद कर पानी पी रहे हैं। 120 की एक बॉटल आती है। किससे कहें, घर का बजट बिगड़ रहा है।’’

जहरीले पानी से पांच महीने के आव्यान की जान चली गई

हर घर में एक कहानी है। इन सबमें सबसे दुखद आव्यान की मृत्यु है। आव्यान की उम्र महज पांच महीने थी। दूषित पानी की वजह से जिंदगी की जंग हार गए आव्यान के पिता कुरियर का काम करते हैं। दस साल बाद बड़ी मन्नतों के बाद आव्यान का जन्म हुआ था। परिवार बच्चे को मां के दूध के साथ बाहर का भी दूध देता था, जिसमें थोड़ा पानी मिलाया जाता था। जिस पानी को वे शुद्ध मान कर इस्तेमाल कर रहे थे, उन्हें पता ही नहीं था कि यही पानी उनके बच्चे की जान ले लेगा। 26 दिसंबर को आव्यान को दस्त हुए और 29 दिसंबर की शाम अव्यान की मृत्यु हो गई। अब आव्यान के पिता चाहते हैं कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

इसी तरह टेलरिंग का काम करने वाले संजय यादव की मां भी दूषित पानी का शिकार हो गईं। उनकी मां 70 साल की थीं और 26 दिसंबर की शाम को उल्टी-दस्त से वे इतनी पस्त हो गईं कि 24 घंटे से भी कम समय में उन्होंने इलाज के बावजूद दम तोड़ दिया।

इन सबमें कुछ भाग्यशाली लोग भी रहे, जो इलाज के बाद घर लौट आए। अंजली सोनी जब अस्पताल में भर्ती हुईं, तो बेहद डरी हुई थीं। अंजली कहती हैं, ‘‘हमने बहुत सी शिकायतें कीं। लेकिन कुछ नहीं हुआ। मामला जब इतना बढ़ गया, तब नेता-अफसर रोज चक्कर मार रहे हैं। हम अब पानी खरीद कर पी रहे हैं। यहां तो साफ पानी आने में पता नहीं कितना वक्त लग जाएगा। पर भगवान की दया है कि मैं अस्पताल से वापस आ गई।’’ वो सामने वाले घर की तरह इशारा कर बताती हैं, वहां एक अंकल हैं, वो अभी अस्पताल में हैं। उनकी किडनी खराब हो गई है। वो कोने वाले घर की आंटी अभी अस्पताल में ही है।

वहां किसी का बच्चा भर्ती है, किसी की मां तो किसी का पति। भीड़ में खड़े एक व्यक्ति पूछते हैं, ‘‘नगर प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अब मान रहे हैं कि गलती हुई है, लेकिन मानने से क्या होगा। जिनके परिवार का व्यक्ति चला गया उन्हें दो लाख का चेक दिया जा रहा है। एक आदमी की कीमत सिर्फ दो लाख है सरकार की नजर में।’’ इंदौर के जिस इलाके में दूषित पानी ने इतनी जान लील ली हैं, वह भागीरथपुरा इंदौर विधानसभा क्षेत्र एक में आता है। भारतीय जनता पार्टी के कैलाश विजयवर्गीय यहां से विधायक हैं। वे नगर प्रशासन मंत्री भी हैं, जिनके तहत इंदौर नगर निगम आता है। पानी की सप्लाई की जिम्मेदारी निगम की ही होती है।

बस हाल पूछाः बीमारों से मिलते मुख्यमंत्री मोहन यादव

बढ़ती मौत के आंकड़ों के बाद विजयवर्गीय ने एक मीडिया हाउस को कहा था, ‘‘यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह नगर निगम के जोन के अधिकारी और कर्मचारियों की गलती है। दूषित पानी सप्लाई के बारे में पता चलने पर वहां घोषणा होनी चाहिए थी कि जनता उस पानी का इस्तेमाल न करे। टैंकर से पानी की आपूर्ति की जानी चाहिए थी। लापरवाही करने वालों को सस्पेंड किया गया है।’’

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सबसे स्वच्छ शहर में ही लोगों को स्वच्छ पानी नहीं मिल रहा है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने भी इस मामले में एक जांच कमेटी बनाई है, जिसमें पूर्व मंत्री सहित विधायकों को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी 31 दिसंबर को अलग-अलग अस्पतालों का दौरा कर लोगों के हालचाल लिए।

इंदौर की घटना पर एक मीम घूम रहा है, जो बताता है कि इंदौर को अपनी चमक पाने के लिए बहुत जोर लगाना पड़ेगा। मीम में लिखा है, ‘‘पानी सेहत के लिए हानिकारक है, कृपया नीट पिएं- मद्य परदेस सरकार।’’

मेरे कार्यकाल में यह सब हुआ यह बहुद दुखद है। महापौर होने के नाते जिम्मेदारी मेरी है। मैं इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेता हूं। पुष्यमित्र भार्गव महापौर, इंदौर

फोटोः जयेश मालवीय

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