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झारखंडः विधानसभा अध्यक्ष ने राजभवन पर उठाई उंगली, भड़की भाजपा

रांची। राजभवन और हेमंत सरकार के मध्य जारी खींचतान के बीच झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष ने राजभवन की...
झारखंडः विधानसभा अध्यक्ष ने राजभवन पर उठाई उंगली, भड़की भाजपा

रांची। राजभवन और हेमंत सरकार के मध्य जारी खींचतान के बीच झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष ने राजभवन की कार्यशैली पर उंगली उठाकर बवाल मचा दिया है। झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रबिंद्रनाथ महतो ने राजभवन के काम-काज पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि राजभवन भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है। विधानसभा अध्यक्ष ने सरना धर्मकोड के विधानसभा के सर्व सम्मत प्रस्ताव और स्थानीय की पहचान वाले 1932 के खतियान संबंधी विधेयक को लेकर राजभवन पर हमला किया है। विधानसभा अध्यक्ष के इस बयान पर बौखलाई भाजपा ने इसे विधानसभा अध्यक्ष की मर्यादा के खिलाफ बताते हुए इस्तीफे की मांग की है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी जेएमएम के एक कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष ने सीधे तौर पर राजभवन के कामकाज पर सवाल उठाया और अपने ट्विटर हैंडल से भी ट्वीट  किया  कि “विधान सभा में विशेष सत्र बुलाकर आदिवासियों की पहचान सरना धर्म कोड को विधान सभा से पारित कर राजभवन को भेजा लेकिन राजभवन से बिल को लौटाया गया। 1932 के खतियान को विधान सभा से पारित कर राजभवन भेजा, वह भी लौटा दिया गया। राज्य भवन भी भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है।” बता दें कि दोनों मामला पूर्व राज्यपाल रमेश बैस के कार्यकाल का है और अभी तक लंबित है।

इधर विधानसभा अध्यक्ष के बयान पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष सीपी सिंह ने कहा कि इस तरह का बयान संसदीय लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। स्पीकर को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए। राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख हैं और स्पीकर विधानसभा के संवैधानिक प्रमुख।

वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सांसद दीपक प्रकाश ने झारखंड विधानसभा अध्यक्ष के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा कि झारखंड विधानसभा अध्यक्ष अपनी संवैधानिक मर्यादाओं का बार बार उल्लंघन कर रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष का पद दलीय राजनीति से ऊपर निष्पक्षता का पद है लेकिन राज्य में  तो सभी नियम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही।  विधानसभा अध्यक्ष झामुमो के प्रवक्ता की तरह पार्टी के मंच से बयान दे रहे। ऐसे में पद की गरिमा तार तार हो रही है।

एक तरफ स्पीकर महोदय को जिन विषयों पर निर्णय लेना है उसे तो वे बार बार सरकार के इशारे पर टाल रहे परंतु जहां उनकी टिप्पणी अपेक्षित नही है उस विषय पर बोलने से नही चूक रहे। राज्यपाल पर स्पीकर की टिप्पणी असंवैधानिक और अशोभनीय है। श्री प्रकाश ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को अपने पद से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। फिर दलीय राजनीति में अपनी सक्रियता दिखानी चाहिए।

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