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रेडलाइट एरिया से निकली मधु कैसे बनी मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की मुख्य राजदार

पूरे देश को झकझोरने वाली मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की मुख्य राजदार मधु कुमारी ने मंगलवार को सरेंडर...
रेडलाइट एरिया से निकली मधु कैसे बनी मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की मुख्य राजदार

पूरे देश को झकझोरने वाली मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की मुख्य राजदार मधु कुमारी ने मंगलवार को सरेंडर कर दिया। इस मामले में 31 मई को 11 लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज होने के बाद से ही वह फरार चल रही थी। वह मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर की राजदार बताई जाती है। माना जा रहा है कि उसे पूछताछ के बाद इस मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस की ऑडिट रिपोर्ट से बालिका गृह में बच्चियों के यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था। मेडिकल जांच में यहां रहने वाली 42 बच्चियों में से 34 के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। अदालत की निगरानी में सीबीआइ इस मामले की जांच कर रही है। मामला सामने आने के बाद से मधु की तलाश में एजेंसियां जुटी थीं। उसके नेपाल भाग जाने की भी खबर आई थी। लेकिन, मंगलवार को सीबीआइ अधिकारियों के सामने अचानक पेश हो कर उसने सबको चौंका दिया। अधिकारियों के सामने बेकसूर होने का दावा करते हुए कहा कि वह ब्रजेश के एनजीओ में काम करती थी, उसकी करीबी होने की बात गलत है। इसके फौरन बाद अदालत में उसने सरेंडर कर दिया।    

शाइस्ता से बनी मधु

पुलिस के मुताबिक मधु मुजफ्फरपुर के रेडलाइट एरिया चर्तुभुज स्थान की रहने वाली है। उसका असली नाम शाइस्ता परवीन है। 1998 में चांद मुहम्मद से उसकी शादी हुई। एक बेटी भी है। नशे की लत की वजह से तीन साल बाद मधु ने अपने पति को छोड़ दिया। 2001 से वह ठाकुर के एनजीओ में काम कर रही थी। संस्था में ब्रजेश के बाद निर्णय लेने का अधिकार उसी के पास था।

मुजफ्फरपुर में 2001 में एएसपी दीपिका सुरी ने रेड लाइट इलाके में फंसी महिलाओं के पुनर्वास का काम शुरू किया था। इसकी पूरे देश में चर्चा हुई थी। कई लड़कियों को दलालों की कैद से आजाद करा उनके बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था की गई थी। उसी दौरान ब्रजेश से शाइस्ता की मुलाकात हुई और कुछ साल बाद उसे ‘मधु’ का नया नाम मिला।

मधु और ब्रजेश ने मिलकर महिलाओं का एक समूह तैयार किया।  कौशल विकास और लाइवली हुड का प्रशिक्षण देने के नाम पर सरकार से कई योजनाएं लीं। 2003 में एड्स कंट्रोल सोसायटी से रेड लाइट एरिया में काम करने का मौका मिला। धीरे-धीरे मधु और ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ ने एड्स कंट्रोल सोसायटी पर एक तरह से नियंत्रण स्थापित कर लिया।

इस जोड़ी का ऐसा रसूख था कि 2004 में एक अधिकारी ने इस संस्था को बिहार की सबसे अच्छा काम करने वाली संस्था करार दिया। 2013 से बालिका गृह चलाने का काम मिला।  2016 में एड्स कंट्रोल सोसायटी के एक अधिकारी इनके प्रभाव में नहीं आए तो कुछ ही दिनों में उनका तबादला हो गया। समाज सेवा के लिए मधु को सम्मानित करने की सिफारिश भी जिला प्रशासन ने राज्य सरकार से की थी।

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